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मोदी जी क्या जानें, घर कैसे चलता है!

कई महिलाओं खासकर कामकाजी महिलाओं ने मोदी के फैसले का समर्थन भी किया है।

Author नई दिल्ली | Published on: November 10, 2016 2:43 AM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

केंद्र सरकार की ओर से 500 और 1000 रुपए के नोटों को अमान्य करने के अचानक फैसले से होने वाली असुविधाओं के कारण जहां लोगों में घबराहट पैदा हो गई, वहीं इसका एक बड़ा प्रभाव गृहणियों पर देखने का मिला। रसोई के इंतजामों से लेकर, घर का किराया देने, दूध वाले-पेपर वाले का बिल भरने के साथ-साथ घर वालों के नजरों से बचाकर आपात स्थिति के लिए जमा पैसों को लेकर गृहणियां बुधवार को सुबह से परेशान दिखीं। कुछेक ने तो यहां तक कह डाला कि नरेंद्र मोदी को कैसे पता होगा कि घर कैसे चलता है।

मोदी सरकार के करंसी नोटों को लेकर इस ‘ऐतिहासिक फैसले’ ने कई गृहणियों का ‘अर्थ-शास्त्र’ बिगाड़ दिया है। दिल्ली के मयूर विहार फेस-1 में रहने वाली कविता अपने बेटे और बुजुर्ग सास-श्वसुर के साथ अकेले रहती हैं। पति किसी दूसरे शहर में काम करते हैं और महीने का खर्च कविता को सौंप जाते हैं। कविता इस फैसले से बुरी तरह से परेशान हैं। उन्होंने कहा, ‘मेरे पास खुले पैसे नाम-मात्र के हैं, पति ने आठ हजार घर के खर्चे के लिए दिए थे, जिनमें केवल 500 और कुछ 1000 रुपए के नोट हैं। समझ आ रहा कि क्या करें, रसोई कैसे चलाएं, सास-श्वसुर की जरूरतें कैसे पूरी करें, पति तो अब रविवार की सुबह ही घर आएंगे तब तक उधारी से काम चलाना होगा। मैनें बैंक में कभी लेन-देन नहीं किया है’।

एक साल की पीहू की मां सुबह-सुबह पांच सौ का नोट लेकर बाजार में भटकती मिल गईं। बोलीं, ‘बच्चे और घर के लोगों की चाय के लिए दूध लेना है, लेकिन चार-पांच दुकानों में गई लौटा दिया, अब मदर डेयरी के स्टोर पर जा कर देख रही हूं वहां मिलता है या नहीं। घर में काम वाली बाई ने भी कुछ इमरजेंसी बता कर पैसे मांग रखे हैं, अब उसे 500 का दूंगी तो उसके किसी काम का नहीं और खुले हैं नहीं, यदि दूध लेकर खुले मिल जाएगा तो उसे कुछ दे सकूंगी’।
घर और नौकरी की रस्साकशी में बेहाल संजिता ने कहा, ‘मैंने मंगलवार को ही चौदह हजार रुपए बैंक से निकाले थे किराया देने के लिए, आज मकानमालिक ने लेने से इनकार कर दिया। अब बैंक की लंबी कतार झेलो। घर और बाहर के कामों के बीच इतना समय कहां है’। वहीं गृहणियों के एक बड़े वर्ग की समस्या है कि पति की नजरों से छुपाकर जमा की गई 500 और 1000 रुपए के नोटों की राशि का वो क्या करें।

500 और 1000 रुपए के नोट बंद- मोदी सरकार के फैसले पर क्‍या सोचती है जनता

मदर डेयरी के पास रहने वाली रूपा ने कहा कि उनके पास पांच हजार पड़े हैं और सभी 500 के नोट हैं, अब किसी दोस्त से पूछूंगी कि वे अपने खाते में जमा करवा कर वापस कर दे क्योंकि पति को बताया तो फिर वापसी की उम्मीद नहीं है।उसी इलाके में रहने वाली ममता ने कहा, ‘गृहस्थ जीवन में पत्नी अगर चोरी से पैसे छुपाने का काम न करे तो घर की आपात स्थितियों को कैसे संभालेंगी। मैं भी ऐसा करती हूं और कई बार मेडिकल इमरजेंसी या किसी अन्य जरूरत में मेरे ये पैसे काम आए हैं। लेकिन मुझे ये पैसे अब पति को सौंपने होंगे, मेरा कोई व्यक्तिगत बैंक अकाउंट नहीं है। ऐसे में एक तो पैसे वापसी पर शक है, दूसरा क्लेश भी हो सकता है’।

ममता ने प्रधानमंत्री के फैसले पर झल्लाते हुए कहा कि मोदी को कैसे पता होगा कि घर कैसे चलता है। कई महिलाओं खासकर कामकाजी महिलाओं ने मोदी के फैसले का समर्थन किया। निजी फर्म में काम करने वाली एकता ने कहा कि कालेधन और जाली नोटों पर लगाम लगाने के लिए जरूरी है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि नकदी पर निर्भर आम लोगों और गृहणियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कुछ उपाय किए जाने चाहिए थे।

 

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