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संसदीय समिति के सामने पेश होने के लिए ट्विटर को समन, 18 जून को नए IT नियमों और बाकी शिकायतों पर होगी चर्चा

बता दें कि आईटी पैनल जिसकी अध्यक्षता कांग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर कर रहे हैं, ने ट्विटर अधिकारियों को ताजा विवादों के बीच उनका पक्ष जानने के लिए बुलाया है।

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: June 15, 2021 12:23 PM
किसान आंदोलन के दौरान भी केंद्र सरकार के निर्देश पर ट्विटर को सस्पेंड करने पड़े थे कई अकाउंट्स। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

केंद्र सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों के बीच अलग-अलग मुद्दों को लेकर जारी विवाद के बीच संसद के पैनल ने ट्विटर को समन भेजा है। सूचना-प्रोद्योगिकी पर बनाई गई संसदीय समिति ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट को 18 जून को पेश होने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा सूचना-प्रोद्योगिकी मंत्रालय के अफसरों को भी ट्विटर से जारी ताजा विवाद पर अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया है।

संसद के एक सूत्र ने बताया कि ट्विटर को यह समन सोशल मीडिया कंपनियों से आईटी नियमों पर जारी चर्चा को आगे बढ़ाने के मकसद से भेजा गया है। पैनल ट्विटर से आईटी रेगुलेशन रूल्स और सरकार के साथ उसके हालिया विवादों पर चर्चा करेगा। बताया गया है कि इसमें भाजपा नेता के ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ वाले विवाद पर चर्चा भी शामिल रहेगी। इसके अलावा ट्विटर इंडिया के अधिकारियों की दिल्ली पुलिस से पूछताछ और मौजूदा गाइडलाइंस के पालन पर भी सवाल किए जाएंगे।

बता दें कि आईटी पैनल, जिसकी अध्यक्षता कांग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर कर रहे हैं, ने ट्विटर अधिकारियों को विवादों के बीच उनका पक्ष जानने के लिए बुलाया है। इसमें सोशल मीडिया फर्म से उसके कदमों को लेकर जवाब भी मांगा जाएगा।

सरकार और ट्विटर के बीच लगातार उभर रहे विवाद: बता दें कि मोदी सरकार और ट्विटर के बीच इस साल फरवरी में हुए किसान आंदोलन के बाद से ही विवाद जारी है। दरअसल, सरकार ने इस दौरान पीएम मोदी को लेकर चलाए गए एक हैशटैग को ब्लॉक करने और कई अकाउंट्स को ब्लॉक करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद हाल ही में ट्विटर ने एक भाजपा नेता के कांग्रेस की टूलकिट को लेकर किए गए ट्वीट को मैनिपुलेटेड (छेड़छाड़ वाला) करार दे दिया था, जिस पर फिर से तनाव को हवा मिली।

नए आईटी नियमों पर सबसे ज्यादा टकराव: केंद्र सरकार ने इसके बाद सोशल मीडिया कंपनियों के लिये नये आईटी नियमों के पालन को अनिवार्य करते हुए कहा था नए नियमों के तहत ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे बड़े सोशल मीडिया मंचों को अतिरिक्त उपाय करने की जरूरत है। इसमें भारत में मुख्य अनुपालन अधिकारी, नोडल अधिकारी और शिकायत अधिकारी की नियुक्ति आदि शामिल थीं।

ट्विटर ने पहले अधिकारियों की नियुक्ति में आनाकानी की थी। हालांकि, सूचना-प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से आखिरी चेतावनी मिलने के बाद उसने रुख बदलते हुए कहा था कि नए सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के अनुरूप मुख्य अनुपालन अधिकारी की नियुक्ति करने के अंतिम चरण में है और सरकार को एक हफ्ते के भीतर अतिरिक्त ब्यौरा दे दिया जाएगा।

अंतिम नोटिस में क्या बोला था MeitY?: सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ट्विटर को दिए गए अपने अंतिम नोटिस में कहा था कि ट्विटर द्वारा इन नियमों के अनुपालन से इनकार से पता चलता है कि माइक्रोब्लॉगिंग साइट में प्रतिबद्धता की कमी है और वह भारत के लोगों को अपने मंच पर सुरक्षित अनुभव प्रदान करने का प्रयास नहीं करना चाहती।

मंत्रालय ने कहा था कि ये नियम हालांकि 26 मई, 2021 से प्रभावी हैं, लेकिन सद्भावना के तहत टि्वटर इंक को एक आखिरी नोटिस के जरिए नियमों के अनुपालन का अवसर दिया जाता है। उसे तत्काल नियमों का अनुपालन करना है। यदि वह इसमें विफल रहती है, तो उसे दायित्व से जो छूट मिली है, वह वापस ले ली जाएगी। साथ ही उसे आईटी कानून और अन्य दंडात्मक प्रावधानों के तहत कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा।

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