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Horlics: ब्रिटिश सेना के जरिए भारत पहुंचा था हॉर्लिक्स, पढ़ें अमेरिका में शुरू हुई 140 साल पुरानी कंपनी का दिलचस्प इतिहास

प्रथम विश्व युद्ध खत्म होने के बाद ब्रिटिश सेना में शामिल भारतीय सैनिकों ने अपने डायट-प्लान में शामिल हॉर्लिक्स को हिंदुस्तान लाया। इसके बाद इसकी जमकर मार्केटिंग हुई। शुरू-शुरू में यह अमीर परिवारों के खान-पान में नियमित रूप से शामिल हुआ। बाद में यह बच्चों के लिए जरूरी पोषक-तत्व वाला ड्रिंक बन गया।

भारत में हॉर्लिक्स पहली बार ब्रिटिश सैनिकों के साथ आया था. (फोटो सोर्स: एक्सप्रेस आर्काइव)

हॉर्लिक्स का नाम सुनते ही अधिकांश लोगों के जहन में एक नॉस्टैल्जिक फ्लेवर कौंध जाता है। भारत समेत दुनिया की कई पीढ़ियों के लिए स्वाद के साथ-साथ पोषक आहार की भूमिका निभाने वाली 140 साल पुरानी यह कंपनी अब बिकने जा रही है। ‘हिंदुस्तान यूनीलीवर’ नाम की कंपनी ने हॉर्लिक्स और इसके बाकी उत्पादों को 3.3 बिलियन यूरो (लगभग 31,700 करोड़ रुपये) में खरीद रही है। भारत के संदर्भ में यह पहली बार है जब किसी खाद्य-पदार्थ बनाने वाली कंपनी का इतने बड़े स्तर पर सौदा हुआ है। हालांकि, करार के मुताबिक कंपनी का ब्रिटिश मालिकाना हक बरकरार रहेगा।

दरअसल, हॉर्लिक्स को अस्तीत्व में लाने वाले ब्रिटेन में पैदा हुए दो भाई विलयम और जेम्स हॉर्लिक थे। 1873 में अमेरिका के शिकागो में दोनों भाइयों ने अपनी नई माल्टेड मिल्क ड्रिंक कंपनी शुरू की और इसका नाम रखा ‘जे एंड डब्ल्यू हॉर्लिक्स’। उन्होंने उस वक्त अपने प्रॉडक्ट की मार्केटिंग ‘डायस्टॉयड’ से की। जिसका उद्देश्य संतुलित आहार मुहैया कराने से था।

भारत में हॉर्लिक्स की शुरुआत: भारत में हॉर्लिक्स पहली बार ब्रिटिश सैनिकों के साथ आया। प्रथम विश्व युद्ध खत्म होने के बाद ब्रिटिश सेना में शामिल भारतीय सैनिकों ने हॉर्लिक्स को बतौर डायट सप्लीमेंट स्वदेश लाया। इसके बाद इसकी जमकर मार्केटिंग हुई। शुरू-शुरू में यह अमीर परिवारों के खान-पान में नियमित रूप से शामिल हुआ। बाद में यह बच्चों के लिए जरूरी पोषक-तत्व वाला ड्रिंक बन गया।

जब हॉर्लिक्स बना बड़ा ब्रांड: 1961 में हॉर्लिक्स ने भारत में अपने उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए प्रचार-प्रसार और तेज़ किया। इस दौरान भारत में पहली बार इसके विज्ञापन टीवी पर दिखाए जाने लगे। विज्ञापनों के जरिए इसे ‘रात का जरूरी आहार’ बताया गया। इसके बाद सोने से पहले दूध के साथ हॉर्लिक्स लेने का प्रचलन देखते ही देखते हिंदुस्तान में बढ़ गया। 2005 में कंपनी ने अपना एक क्लिनिकल शोध जारी किया। जिसमें दावा किया गया कि जो बच्चे हॉर्लिक्स पीते हैं, वे बाकियों की तुलना में ज्यादा मजबूत, लंबे और बुद्धिमान होते हैं। इस शोध वाले विज्ञापन ने इसे बच्चों में खास लोकप्रिय बना दिया।

भारत में हॉर्लिक्स व्यावसाय के साथ-साथ सामाजिक दायित्वों का भी बाखूबी से निर्वहन करता है। ‘आहार अभियान’ के तहत कंपनी कुपोषण के खिलाफ मुहिम चलाती है। हॉर्लिक्स के हर उत्पाद से एक रुपया कुपोषण के खिलाफ जागरुकता अभियान पर खर्च किया जाता है।

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