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Corona Virus Effect: घरेलू सहायिकाओं की पीड़ा, अब नहीं बजता मालिकों का फोन

घरेलू कामगार यूनियन के आंकड़ों की माने तो दिल्ली में करीब आठ लाख घरेलू कामगार मौजूद हैं। यूनियन की संयोजक माया जान ने कहा-दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा स

कोरोना वायरस की वजह से घरों में काम करने वाली सहायिकाओं को काम नहीं मिल रहा है।

दिल्ली राजधानी क्षेत्र में करीब एक दशक से घरों में झाडू-पोछा-बर्तन के साथ रसोई का काम कर आजीविका चलाने वाली काजल महतो को कोविड-19 से ज्यादा मलाल उस फोन नंबर का है जो अब कभी नहीं उठता। हरिजन बस्ती में रहने वाली काजल महतो कहती हैं-नंबर वही है लेकिन हालात बदल गए है। उनकी मालिकीन का यह नंबर पूर्णबंदी से पहले तकरीबन रोज बज जाया करता था, जरा सी लेट होने पर। पिछले दो महीने से नहीं उठ रहा, शायद उन्हें डर है कि कहीं हम पगार न मांग बैठे। पीड़ित काजल की पड़ोसी विनिता की भी यही आपबीती है।

दरअसल, काजल, विनिता अकेली पीड़ित नहीं है। घरों में काम करने वाली सहायिकाओं में ज्यादातर की स्थिति कमोबेश ऐसी ही है। कोरोना कोप ने उन्हें सड़क पर ला खड़ा किया है। पूर्णबंदी से जो लोग ज्यादा प्रभावित हुए उनमें ये लोग शामिल हैं। सरकार की ओर से इस वर्ग की सुध नहीं लेने से इनकी समस्याएं और विकट हो गई हैं।

बता दें कि घरेलू कामगार को प्लेसमेंट एजंसियों या गैर सरकारी संस्थाओं के अलावा आपसी संपर्क से काम मिलता है। वायरस संक्रमण रोकथाम के नजरिए से जो सामाजिक पहल हुई है उसमें इन्हें सोसाइटियों में घुसने पर पाबंदी लगा दी गई है। आम घरों में भी उनका प्रवेश प्रतिबंधित है। कई आरडब्लूए ने तो उनके आने-जाने की मनाही वाले नोटिस चस्पा दिए है। दिल्ली ही नहीं पूरे एनसीआर की स्तिथि यही है। गार्ड उन्हें घरों में घुसने नहीं दे रहे है।

कई जगह उनकी 2-2 महीने की पगार फंसी पड़ी है। वे गैर सरकारी संगठनों, यूनियनों के चक्कर लगा रहीं हैं ताकि सरकार के आर्थिक सहायता वाली सूची में उनका भी नाम जुड़ जाए। घरेलू कामगार यूनियन के आंकड़ों की माने तो दिल्ली में करीब आठ लाख घरेलू कामगार मौजूद हैं। यूनियन की संयोजक माया जान ने कहा-दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा सभी जगह प्रशासन का ध्यान इस ओर खींचा गया। लेकिन अभी राहत नहीं मिली है। सरकार को इनके लिए भी आर्थिक पैकेज की घोषणा करनी चाहिए।

घरेलू कामगारों को वेतन न दिए जाने की कड़ी भर्त्सना करते हुए जान ने कहा-ज्यादातर घरेलू कामगारों के लिए मार्च महीने का भी वेतन न मिलने से भीख मांगने की स्थिति आ गई है। घरेलू कामगार का काम छूट चुका है। पहले का वेतन भी नहीं मिलने से कई परिवारों की स्थिति बदतर हो चुकी है। घरेलू कामगार जो पहले ही बेहद ही कम वेतन पर काम करने के लिए मजबूर थे, उनके लिए जीना भी मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन आवासीय सोसाइटियों के भेदभावपूर्ण दिशा-निर्देशों को रोकने के लिए कदम उठाए।

पंजीकरण को लेकर श्रममंत्री को भेजे पांच सुझाव
दिल्ली के श्रम मंत्री गोपाल राय को मजदूरों के संगठन दिल्ली असंगठित निर्माण मजदूर यूनियन ने आॅनलाइन पंजीकरण को लेकर और अदालत के फैसले के मद्देनजर पांच सुझाव भेजे हैं और बोर्ड की सलाहकार समिति की बैठक तत्काल बुलाई जाने की मांग की है। यूनियन के महासचिव अमजद हसन ने कहा-श्रमिक बोर्ड की ओर से भवन निर्माण के क्षेत्र में कार्यरत मजदूरों का आनलाइन पंजीकरण व नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू होते ही कई समस्याओं से घिर गई। आनलाइन पंजीकरण व नवीनीकरण में 30-35 फीसद ही सफलता ही मिल रही है जिससे मजदूर बहुत ही दुखी व परेशान है। सभी जिलों में तत्काल कम से कम चार काउंटर भी खोले जाए।

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