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1 अगस्त, 2019 के बाद 600 से अधिक लोग लिए गए थे हिरासत में- केंद्र ने LS में बताया

केंद्र सरकार ने लोकसभा को बताया है कि 1 अगस्त 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में 600 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया था। अब कोई भी हाउस अरेस्ट नहीं है।

गृह मंत्रालय ने संसद में कई जानकारियां दीं। फोटो- पीटीआई

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से ही विपक्ष आरोप लगा रहा है कि वहां पर सरकार ने लोगों के साथ जबरदस्ती की, बड़ी संख्या में लोगों को नजरबंद कर दिया गया। अब लोकसभा में गृह मंत्रालय ने जवाब दिया है कि 1 अगस्त 2019 के बाद 627 लोगों को हिरासत में लिया गया था जिसमें अलगाववादी और पत्थरबाज शामिल थे। मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि अब जम्मू-कश्मीर में पब्लिक सेफ्टी ऐक्ट के तहत कोई भी नजरबंद नहीं है।

बता दें कि 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया गया था। इससे पहले जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला समेत कई लोगों को नजरबंद कर दिया गया था। अब नजरबंद किए गए अलगाववादी नेता मीर वाइज को भी रिहा कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि अब कोई भी होम अरेस्ट नहीं है।

VIP सुरक्षा पर भी दिया जवाब

देश में लोगों की सुरक्षा के बारे में भी गृह मंत्रालय ने लोकसभा में जवाब दिया। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि देश में 230 लोगों को सीआरपीएफ और सीआईएसएफ जैसे केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों द्वारा ‘जेड प्लस’, ‘जेड’ और ‘वाई’ श्रेणियों के तहत सुरक्षा प्रदान की जा रही है। रेड्डी ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा, ‘सुरक्षा प्राप्त लोगों की केंद्रीय सूची में शामिल व्यक्तियों के समक्ष जोखिम के बारे में केंद्रीय एजेंसियों के आकलन के आधार पर उन्हें सुक्षा दी जाती है तथा इसकी समय-समय पर समीक्षा की जाती है। इस तरह की समीक्षा के आधार पर सुरक्षा कवर जारी रखने, वापस लेने या संशोधित करने का फैसला होता है।’

मंत्री ने बताया कि मौजूदा में 230 लोगों के नाम इस केंद्रीय सूची में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आमतौर पर इन लोगों की सुरक्षा पर होने वाले खर्च का वहन सरकार द्वारा किया जाता है। हालांकि उन्होंने इस बात का ब्यौरा नहीं दिया कि ऐसे लोगों की सुरक्षा पर कुल कितनी राशि व्यय होती है।

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