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पाकिस्तान से ज्यादा बांग्लादेश से होती है घुसपैठ

राज्यसभा में एक लिखित जवाब में गृहमंत्रालय की ओर से बताया गया कि पाकिस्तान सीमा से ड्रोन के माध्यम से हथियारों की आपूर्ति के कुछ उदाहरण सुरक्षा और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के ध्यान में आए हैं।

Election, parliament, home ministryअसम के शिवसागर जिले में 14 मार्च को एक चुनावी सभा को संबोधित करते केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा नेता अमित शाह। (फोटो सोर्स- पीटीआई)

आतंकियों और अवांक्षित लोगों की सीमापार से घुसपैठ के मामले में बांग्लादेश पाकिस्तान से ज्यादा आसान रास्ता बन गया है। पाकिस्तान की तुलना में बांग्लादेश से ज्यादा संख्या में घुसपैठ होती है। राज्यसभा में एक लिखित जवाब में गृहमंत्रालय की ओर से बताया गया कि पाकिस्तान सीमा से ड्रोन के माध्यम से हथियारों की आपूर्ति के कुछ उदाहरण सुरक्षा और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के ध्यान में आए हैं। ऐसी चुनौतियों का सामना करने के लिए सरकार कई तरह के कदम उठा रही है।

इन कदमों में प्रभावी निगरानी, ​​खुफिया जानकारी को सुव्यवस्थित करना, बलों की क्षमता निर्माण, सीमाओं पर गश्त करना, सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थानीय आबादी का संवेदीकरण, अवलोकन पदों की स्थापना, आधुनिक और हाई-टेक निगरानी उपकरण का उपयोग आदि शामिल हैं। मंत्रालय का कहना है कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने में कई तरह की दिक्कतें आ रही हैं। कठिन भूभाग होने, नदी वाली और दलदली भूमि, काम करवाने के लिए प्रतिकूल मौसम, भूमि अधिग्रहण की समस्या, लोगों का विरोध और बांग्लादेश के सीमा रक्षकों की ओर से विरोध आदि की वजह से ऐसा करने में मुश्किलें आ रही हैं।

उन्होंने बताया, “सरकार नियमित रूप से बाड़ के काम की प्रगति की निगरानी कर रही है। बीएसएफ ने बॉर्डर आउट पोस्ट और नावों के साथ-साथ भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर नदी की सीमा की रखवाली के लिए कर्मियों को तैनात किया है, साथ ही सीमा पर छोटी नदी/नाले के अंतराल को कवर करने के लिए फ्लड लाइट्स/हाई मास्ट लाइट्स लगाई गई हैं।”

भारत और बांग्लादेश नदियों के जल के बंटवारे की रूपरेखा बनाने, प्रदूषण खत्म करने, नदियों के जल के संरक्षण, बाढ़ प्रबंधन, नदी घाटी प्रबंधन समेत जल संसाधन से जुड़े मुद्दों के विभिन्न पहलुओं पर सहयोग बढ़ाने पर राजी हो गए। एक आधिकारिक बयान में बुधवार को यह जानकारी दी गई। भारत-बांग्लादेश जल संसाधन सचिव स्तर की बैठक यहां मंगलवार 16 मार्च को हुई।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पंकज कुमार, सचिव (जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनर्रुद्धार) ने किया। बांग्लादेशी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जल संसाधन मंत्रालय के वरिष्ठ सचिव कबीर बिन अनवर ने किया। भारत और बांग्लादेश 54 नदियों का पानी आपस में साझा करते हैं जो दोनों देशों के लोगों की आजीविका पर सीधे असर डालती हैं। दोनों पक्षों ने इस मामले में अपने बीच करीबी सहयोग की प्रशंसा की।

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