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मिडल क्‍लास के लिए खुशखबरी, होम लोन पर ब्‍याज सब्सिडी 15 महीने के लिए बढ़ी

Home Loan Interest Subsidy Scheme: गृह ऋण पर लगभग 2.60 लाख रुपये की ब्याज सब्सिडी का लाभ मध्यम आय वर्ग (एमआईजी) से संबंधित लाभार्थियों को इस साल दिसम्बर के बाद अतिरिक्त 15 महीनों तक मिलेगा।

Author September 23, 2017 12:36 PM
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

केंद्र सरकार ने मध्यम आय वर्ग के लिए गृह ऋण पर ब्याज सब्सिडी 15 माह के लिए बढ़ा दी है। 2.60 लाख रुपये तक की सब्सिडी अब मार्च, 2019 तक मिलेगी। सरकार ने कहा है कि केन्द्र सरकार किफायती आवास के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अचल सम्पत्ति उद्योग की चिंताओं पर गौर करेगी केन्द्र सरकार ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत गृह ऋण पर लगभग 2.60 लाख रुपये की ब्याज सब्सिडी का लाभ मध्यम आय वर्ग (एमआईजी) से संबंधित लाभार्थियों को इस साल दिसम्बर के बाद अतिरिक्त 15 महीनों तक मिलेगा। केंद्र सरकार के सचिव (आवास एवं शहरी मामले) दुर्गा शंकर मिश्रा ने शुक्रवार को मुम्बई में एनएआरईडीसीओ द्वारा आयोजित ‘अचल सम्पत्ति एवं बुनियादी ढांचा निवेशक शिखर सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत ब्याज सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए एमआईजी लाभार्थियों को कुछ और समय देने का निर्णय लिया है।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले साल 31 दिसम्बर को घोषणा कर प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत ऋण संबद्ध सब्सिडी योजना (सीएलएसएस) को इस साल दिसम्बर के आखिर तक एमआईजी के लिए भी मान्य कर दिया था। सीएलएसएस के तहत 6.00 लाख रुपये से ज्यादा और 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले एमआईजी लाभार्थियों को 9 लाख रुपये के 20 वर्षीय ऋण पर चार फीसदी ब्याज सब्सिडी मिलेगी। वहीं, 12 लाख रुपये से ज्यादा और 18 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले लाभार्थियों को तीन फीसदी ब्याज सब्सिडी मिलेगी।

मिश्रा ने बाद में एनएआरईडीसीओ के 30 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ एक घंटे बातचीत की और उन्हें आश्वासन दिया कि सरकार उनके द्वारा उठाए गए विभिन्न मुद्दों पर गौर करेगी तथा संभावित कदम उठाने पर विचार किया जाएगा।

प्रतिनिधिमंडल ने पूर्ण एवं निर्माणाधीन परियोजनाओं के लिए तय जीएसटी दरों की विसंगतियों का भी उल्लेख किया। प्रतिनिधिमंडल ने इस बात पर चिंता जताई कि आवासीय परिसंपत्तियों की लागत में जीएसटी एवं अन्य करों का योगदान एक-तिहाई से भी ज्यादा है।

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