West Bengal News: पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार ने कथित अवैध प्रवासियों की पहचान करने और उन्हें डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और सभी जिला प्रशासनों को निर्देश दिया है कि वे हिरासत में लिए गए लोगों को सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ को सौंपने से पहले उनके लिए डिटेंशन सेंटर बनाएं।
नबन्ना के निर्देश में कहा गया है, “राज्य में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों या रोहिंग्याओं को वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके लिए जिलों में डिटेंशन सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इन सभी केंद्रों का उपयोग राज्य की जेलों से रिहा किए गए अवैध प्रवासियों और विदेशी कैदियों को रखने के लिए किया जाएगा। केंद्रों की स्थापना के लिए आवश्यक कदम उठाने के आदेश दिए जा रहे हैं।”
जिला मजिस्ट्रेट को भेजे गए निर्देश
इस संबंध में नबन्ना से राज्य पुलिस के महानिदेशक, जिला मजिस्ट्रेट और हर एक जिले के पुलिस अधीक्षक को निर्देश भेजा गया है। यह निर्देश कोलकाता सहित प्रत्येक पुलिस आयुक्त कार्यालय के आयुक्तों को भी भेजा गया है।
मुख्यमंत्री ने क्या घोषणा की थी?
इस हफ्ते की शुरुआत में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घोषणा की कि नागरिकता संशोधन अधिनियम के दायरे में नहीं आने वाले अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को अदालतों के समक्ष पेश करने के बजाय सीधे सीमा सुरक्षा बल को सौंप दिया जाएगा ताकि उन्हें वापस उनके देश भेज दिया जा सके।
अधिकारियों ने कहा कि नई प्रक्रिया का उद्देश्य हिरासत और निर्वासन प्रक्रियाओं में तेजी लाना है, साथ ही जेल की सजा या कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद स्वदेश वापसी का इंतजार कर रहे विदेशियों के लिए अलग व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
पश्चिम बंगाल बांग्लादेश के साथ भारत की सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में से एक साझा करता है और सीमा पर घुसपैठ राज्य में सालों से एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों ने हाल ही में उत्तर 24 परगना, कूच बिहार और मुर्शिदाबाद सहित सीमावर्ती जिलों में कथित अवैध नेटवर्क और सीमा पार आवाजाही के खिलाफ कई अभियानों की सूचना दी है।
यह भी पढ़ें: बंगाल में अब केवल हिंदू जातियों को मिलेगा OBC आरक्षण
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सरकार ने ओबीसी आरक्षण नीति में बड़ा बदलाव करते हुए कुल आरक्षण को 17 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। नई नीति के तहत अब यह आरक्षण केवल वास्तविक पिछड़े हिंदू समुदायों को दिया जाएगा, जो एससी और एसटी श्रेणी में शामिल नहीं हैं। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
