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HAL का 20 हजार करोड़ रुपया बकाया, विदेशी कंपनी को हो गया इतने का भुगतान

सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा निर्माण कंपनी HAL इन दिनों वित्‍तीय संकट के दौर से गुजर रही है। एचएएल के प्रमुख आर. माधवन का कहना है कि मौजूदा वित्‍त वर्ष के आखिर तक एयरफोर्स पर कुल 20,000 करोड़ रुपए का बकाया हो जाएगा। दूसरी तरफ, राफेल लड़ाकू विमान के अलावा अपाचे और चिनकूक हेलिकॉप्‍टर के लिए फ्रांसीसी और अमेरिकी कंपनियों को डिलिवरी के पहले ही हजारों करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है।

HALएचएएल के पास अपने कर्मचारियों को सैलरी देने के भी पैसे नहीं! (FILE PIC)

सरकारी क्षेत्र की रक्षा निर्माण कंपनी हिन्‍दुस्‍तान एयरोनोटिक्‍स लिमिटेड (HAL) के पास कर्मचारियों को देने के लिए पर्याप्‍त पैसे नहीं हैं। सैलरी देने के लिए एचएएल को ओवरड्राफ्ट के जरिये 1000 करोड़ रुपए लेने पड़े हैं। रक्षा निर्माण कंपनी के अध्‍यक्ष आर. माधवन ने बताया कि मौजूदा वित्‍त वर्ष के खत्‍म होने तक एचएएल का एयरफोर्स पर कुल 20 हजार करोड़ रुपए का बकाया हो जाएगा। रक्षा विशेषज्ञ और डिफेंस ब्‍लॉगर अजय शुक्‍ला ने इसको लेकर दिलचस्‍प खुलासा किया है। उन्‍होंने बताया कि वायुसेना एचएएल का भुगतान नहीं कर रही है, लेकिन विदेशी कंपनियों का समय पर पेमेंट किया जा रहा है। इस रक्षा विशेषज्ञ ने रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से बताया कि 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए फ्रांस की कंपनी दॉसो को तकरीबन 20 हजार करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। लेकिन, एचएएल को महीनों से भुगतान नहीं किया गया है।

एचएएल को बैंक से पहली बार लेने पड़ा कर्ज: सरकारी क्षेत्र की रक्षा कंपनी को वेतन के तौर पर हर महीने 358 करोड़ रुपए का भुगतान करना होता है। इसके अलावा प्रोडक्‍शन को जारी रखने के लिए भी हर महीने 1,300 से 1,400 करोड़ रुपए की जरूरत होती है। कर्मचारियों के वेतन के साथ अन्‍य गतिविधियों को जारी रखने के लिए एचएएल को पहली बार जनवरी में बैंक से 781 करोड़ रुपए का कर्ज लेना पड़ा। गौरतलब है कि एचएएल अपने कैश रिजर्व से सरकार को 11,024 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर चुकी है। इसमें डिविडेंड (लाभ में हिस्‍सा) के तौर पर सरकार को दी गई 4,631 करोड़ रुपए की रकम भी शामिल है। बताया जाता है कि विदेशी रक्षा कंपनियों को भुगतान करने के कारण वायुसेना के पास एचएएल को देने के लिए पैसा ही नहीं बचा।

दॉसो और बोइंग से न तो फाइटर जेट मिला न ही हेलिकॉप्‍टर: भारत के सशस्‍त्र बलों ने लड़ाकू विमान हेलिकॉप्‍टर खरीदने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कई रक्षा करार किए हैं। इनमें से राफेल लड़ाकू विमान (दॉसो, फ्रांस) और अपाचे व चिनकूक हेलिकॉप्‍टर (बोइंग, अमेरिका) खरीद करार प्रमुख हैं। हेलिकॉप्‍टर के लिए अमेरिकी रक्षा कंपनी के साथ वर्ष 2015 में समझौता किया गया था। अमेरिकी कंपनी को भी सालाना 2,000 करोड़ रुपए के हिसाब से भुगतान किया जा चुका है। दोनों कंपनियां इसी वर्ष से डिलिवरी शुरू करने वाली हैं। एचएएल के प्रमुख माधवन ने कहा, ‘एचएएल वायुसेना को लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्‍टर के साथ अन्‍य सेवाएं मुहैया करा चुकी है। इसके बावजूद एचएएल का एचएएल पर फिलहाल 15,700 करोड़ रुपए का बकाया है। 31 मार्च तक यह आंकड़ा 20,000 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा।’ एचएएल में कुल 29 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। बता दें कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने राफेल लड़ाकू विमान बनाने के संदर्भ में एचएएल को अक्षम करार दिया था।

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