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खुले में शौच करने में मुस्लिमों से आगे हैं हिंदू, घर में टॉयलेट होने के बावजूद नहीं करते इस्तेमाल: रिपोर्ट

इस रिपोर्ट के मुताबिक सर्वे में सवालों का जवाब देने वाले कई हिन्दू-मुसलमानों ने कहा कि धर्मगरुओं ने स्पष्ट रूप से उन्हें यह बताया है कि शौच कहां करना ठीक रहता है। इस रिपोर्ट के मुताबिक अगर हिन्दुओं को यह बताया जाए घर से दूर खुले में शौच शुद्धता है, और घर में लैट्रीन जाता अशुद्ध है तो वह मुसलमानों की तुलना में इस पर ज्यादा आसानी से यकीन कर लेंगे।

वेबसाइट पर दर्ज आंकड़े बताते हैं कि 2 अक्टूबर, 2014 यानी जब प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी, तब देश में मात्र 38.70 फीसदी घरों में ही शौचालय थे जो अब बढ़कर 87.69 फीसदी घरों में बन चुका है।

भारत की आबादी का आधा से ज्यादा हिस्सा इस वक्त खुले में शौच जाता है। आंकड़ों के हिसाब से संख्या लगभग 60 करोड़ बैठती है। भारत के बहुसंख्यक हिन्दुओं में खुले में शौच की आदत ज्यादा है। वेबसाइट द प्रिंट डॉट इन की एक रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के ताजा आंकड़े कहते हैं कि 2005 तक 68 फीसदी हिन्दू खुले में शौच करते थे। यानी कि खेतों में, गलियों के किनारे, या फिर झाड़ियों के पीछे। इसकी तुलना में 43 फीसदी मुसलमान ही ऐसा करते हैं। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि भारत में कुछ लोगों के पास शौचालय की सुविधा है बावजूद इसके वे इसका इस्तेमाल नहीं करते हैं। इस मामले में भी हिन्दू मुसलमानों से आगे है। रिपोर्ट के मुताबिक 25 फीसदी ऐसे हिन्दू हैं जो ऐसे घरों में रहते हैं जहां टॉयलेट बना है, बावजूद वह इसका इस्तेमाल नहीं करते हैं। जबकि टॉयलेट वाले घरों में रहने के बावजूद इसका इस्तेमाल ना करने वाले मुसलमानों का आंकड़ा 10 फीसदी है।

रिपोर्ट में यह भी कहा है कि इस व्यवहार की वजह तलाशना काफी मुश्किल है। हालांकि इसमें यह भी जिक्र है कि धार्मिक मान्यताएं इस व्यवहार को प्रभावित करती है। इस रिपोर्ट के मुताबिक सर्वे में सवालों का जवाब देने वाले कई हिन्दू-मुसलमानों ने कहा कि धर्मगरुओं ने स्पष्ट रूप से उन्हें यह बताया है कि शौच कहां करना ठीक रहता है। इस रिपोर्ट के मुताबिक अगर हिन्दुओं को यह बताया जाए घर से दूर खुले में शौच शुद्धता है, और घर में लैट्रीन जाता अशुद्ध है तो वह मुसलमानों की तुलना में इस पर ज्यादा आसानी से यकीन कर लेंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक भले ही शौचालय को लेकर ये रूख भले ही लोगों को परेशान कर सकता है लेकिन ये बातें ग्रामीण भारत के लोग काफी दिनों से जानते हैं। संक्षेप में कहा जाए तो हिन्दुओं में खुले में शौच की आदत की बहुलता का सिर्फ शौचालय की उपलब्धता से लेना-देना नहीं है। बल्कि कई सामाजिक-धार्मिक आदतें भी इसे प्रभावति करती हैं।

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