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केरल: मुस्लिम बहुल मलप्पुरम में हिन्दुओं ने रोजेदारों के लिए मंदिर में दी इफ्तार पार्टी

मुसलमानों ने चंदा करके मंदिर की मरम्मत के लिए 20 लाख रुपये दिये। इसके बाद सैकड़ों साल पुराने इस मंदिर का उद्धार हो सका। मंदिर में रविवार (4 मई) को भगवान विष्णु की प्रतिमा फिर से स्थापित की जाएगी।

रोजेदार उपवास के बाद शाम को तय समय में इफ्तार करते हैं। (Express file photo)

केरल के मलप्पुरम में आपसी भाईचारे की एक शानदार मिसाल देखने को मिली है। केरल के मुस्लिम बहुल इलाके मलप्पुरम के पुन्नाथाला के श्री नरसिंहमूर्ति मंदिर परिसर में 500 लोगों के लिए भव्य इफ्तार का आयोजन किया गया। मंदिर से जुड़े हिन्दुओं ने रोजेदारों के लिए पकवान बनाए और उन्हें बड़े प्यार से खाना खिलाया। निश्चित रूप से यहां मुस्लिम रोजेदारों को शुद्ध शाकाहारी खाना परोसा गया। लेकिन इस इफ्तार पार्टी के पीछे भी एक और कहानी है। दरअसल मलप्पुरम का श्री नरसिंह मूर्ति मंदिर काफी जीर्णशीर्ण हालत में था और मंदिर को मरम्मत की सख्त ज़रूरत थी। अंग्रेजी वेबसाइट हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर कमेटी के सचिव पीटी मोहनन ने बताया कि मंदिर के मरम्मत करने का विचार मुस्लिम समुदाय की ओर से ही दिया गया। मुसलमानों ने चंदा करके मंदिर की मरम्मत के लिए 20 लाख रुपये दिये। इसके बाद सैकड़ों साल पुराने इस मंदिर का उद्धार हो सका। मंदिर में रविवार (4 मई) को भगवान विष्णु की प्रतिमा फिर से स्थापित की जाएगी।

बता दें कि मंदिर के मरम्मत के लिए मुस्लिम युवकों ने श्रमदान भी दिया। कई युवाओं ने चंदा इकट्ठा करने से लेकर सामान उपलब्ध कराने जैसे कई काम किये। मंदिर प्रबंधन पहले मुस्लिम युवाओं के लिए भव्य भोज का आयोजन करने वाला था लेकिन बाद में रोजेदारों के लिए इफ्तार आयोजित करने का फैसला लिया गया। इस इलाके में हिन्दू समुदाय के लोग भी रोजे के दौरान बढ़चढ़ कर मुसलमानों की मदद करते हैं स्थानीय शिक्षक टी असईनार कहते हैं कि ये किसी एक समुदाय का नहीं बल्कि गांव का त्योहार है।

मंदिर कमेटी के सचिव मोहनन ने कहा कि ये गांव हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे का बेजोड़ उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जो लोग देश को हिन्दू-मुसलमानों को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश करते हैं उन्हें यहां से सीख लेनी चाहिए। बता दें कि केन्द्र सरकार की ओर से वध के लिए मंडियों से जानवरों की खरीद पर रोक लगाने के बाद केरल के कई जिलों में केन्द्र सरकार के इस फैसले का विरोध हुआ है। हालांकि मद्रास हाई कोर्ट ने केन्द्र के इस फैसले पर 4 हफ़्ते के लिए रोक लगा दी है।

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