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हिंदू संगठन ने जारी किया नए साल का कैलेंडर, किया दंगों का जिक्र

घोष ने कहा "सबसे बड़ी सामप्रदायिक हिंसा की घटना साल 2010 में नॉर्थ परगना 24 के देगंगा में हुई थी और समय लेफ्ट फ्रंट सत्ता में थी।"
Author कोलकाता | December 29, 2017 12:10 pm
तपन घोष ने दावा किया है कि इनमें से सबसे ज्यादा हिंसा की घटनाएं 2011 के बाद हुई हैं जब सूबे की सत्ता में तृणमूल कांग्रेस आई थी। (Express Photo by Subham Dutta)

एक हिंदू संगठन द्वारा गुरुवार को नए साल का कैलेंडर जारी किया है जिसमें पिछले 70 सालों से देश में हुई सामप्रदायिक हिंसाओं का जिक्र किया गया है। यह कैंलेंडर हिंदू समहति संगठन द्वारा जारी किया गया है। इस संगठन के संस्थापक और एडवाइजर तपन घोष ने इस पर बात करते हुए कहा “नैतिक धार्मिक सफाई” की घटनाओं को इस कैलेंडर में दर्शाया गया है। घोष ने कहा कि इसमें 57 ऐसी भयानक घटानओं को भी दिखाया गया है जो कि 2001 और 2016 के बीच पश्चिम बंगाल में घटी थीं। तपन घोष ने दावा किया है कि इनमें से सबसे ज्यादा हिंसा की घटनाएं 2011 के बाद हुई हैं जब सूबे की सत्ता में तृणमूल कांग्रेस आई थी।

तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए तपन घोष ने कहा “लेफ्ट फ्रंट की सत्ता के 34 साल में पश्चिम बंगाल के अदंर कई सामप्रदायिक हिंसाएं हुई हैं लेकिन इनमें से ज्यादातर में रिपोर्ट दर्ज तक नहीं की गई। सबसे बड़ी सामप्रदायिक हिंसा की घटना साल 2010 में नॉर्थ परगना 24 के देगंगा इलाके में हुई थी और उस समय लेफ्ट फ्रंट सत्ता में था। इतना ही नहीं ऐसा ही तब हुआ जब तृणमूल कांग्रेस सत्ता में आई थी। हम चाहते हैं कि राज्य सरकार हिंसा के केस में और धर्म के नाम पर हिंसा फैलाने वाले गुनहगारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार करवाए। सरकार को कानून का पालन करना चाहिए।”

आपको बता दें कि हिंदू समहति ने कैलेंडर में जो हिंसाओं की लिस्ट जारी की हैं उन हिंसाओं में सबसे ज्यादा हिंदूओं को निशाना बनाया गया है। गौरतलब है कि इसी साल पश्चिम बंगाल के 24-परगना जिले के बशीरहाट इलाके में 6 जुलाई को एक बार फिर से हिंसा भड़क गई थी। सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक तस्वीरें पोस्ट करने को लेकर दो समुदायों के बीच हिंसक झड़पों हो गई थी जिसके बाद इलाके में धारा 144 लगा दी गई थी। इस हिंसा में कई लोग घायल भी हुए थे।

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