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हिंदू महासभा ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी- बाबरी मस्जिद मामले में कारसेवकों के खिलाफ दर्ज मुकदमें वापस लिए जाएं

इस मामले में सरकार ने कई कारसेवकों के खिलाफ मुकदमें दर्ज किए थे। जिन लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुए थे, उनमें 47 भाजपा नेता और सैंकड़ों कारसेवकों के नाम शामिल हैं।

Author नई दिल्ली | Updated: November 12, 2019 4:23 PM
6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिरा दी गई थी। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। अब खबर आयी है कि हिंदूवादी संगठन ‘हिंदू महासभा’ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखकर राम मंदिर कारसेवकों के खिलाफ दर्ज मामलों को खारिज करने की मांग की है। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि की तरफ से यह चिट्ठी लिखी गई है। स्वामी चक्रपाणि राम मंदिर मामले में एक पार्टी भी थे।

भाजपा के कई बड़े नेता हैं आरोपीः बता दें कि साल 6 दिसंबर, 1992 में लाखों की तादाद में कारसेवकों ने अयोध्या पहुंचकर बाबरी मस्जिद को गिरा दिया था। उस दिन उग्र भीड़ ने कुछ ही घंटों में मस्जिद के ढांचे को गिरा दिया था। जिससे देशभर में सांप्रदायिक दंगे हुए थे और कई लोगों की जान गई थी। इस मामले में सरकार ने कई कारसेवकों के खिलाफ मुकदमें दर्ज किए थे। जिन लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुए थे, उनमें 47 भाजपा नेता और सैंकड़ों कारसेवकों के नाम शामिल हैं। जो लोग इस मामले में आरोपी हैं उनमें भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती, मुरली मनोहर जोशी आदि का नाम प्रमुख है। इस मामले में अप्रैल, 2020 तक अंतिम फैसला आने का अनुमान है।

क्या हुआ था उस दिनः विश्व हिंदू परिषद, शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मिलकर मस्जिद को ढहा दिया था। माना जाता है कि बाबरी विध्वंस की नींव साल 1990 में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी द्वारा निकाली गई रथयात्रा के साथ ही पड़ गई थी। 6 दिसंबर, 1992 को सुबह के करीब भाजपा और विहिप के कुछ नेताओं ने विवादित ढांचे के पास पहुंचकर पूजा-अर्चना की थी। इन नेताओं में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी के साथ कई संत भी शामिल थे। इनके पीछे लाखों की संख्या में कारसेवक भी थे। दोपहर को कुछ उग्र कारसेवक सुरक्षा घेरा तोड़कर मस्जिद के गुंबद तक पहुंच गए और इसके साथ ही कारसेवकों की भीड़ ने मस्जिद को गिराना शुरु कर दिया।

उल्लेखनीय है बीती 9 नवंबर को अयोध्या केस पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ चुका है। जिसके मुताबिक कोर्ट ने विवादित स्थल पर रामलला विराजमान का अधिकार बताया है। इसके साथ ही कोर्ट ने सरकार को 3 माह में ट्रस्ट बनाकर मंदिर का निर्माण कार्य शुरु करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने मस्जिद के लिए भी अयोध्या में 5 एकड़ जगह मुस्लिमों को दिए जाने के निर्देश दिए हैं।

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