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हिंदू महासभा का सरकार से आग्रह, कहा- CAA के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को गोली मार दो

हिंदू महासभा ने यह भी कहा कि राजद्रोह के लिए नसीरुद्दीन शाह और काफील खान जैसे लोगों को फांसी पर लटका दिया जाए।

दिल्ली के शाहीन बाग में सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन करती महिलाएं। (AP Photo)

हिंदू महासभा ने सरकार से आग्रह किया है कि सीएए का विरोध करने वाले प्रदर्शनकारियों को गोली मार दी जाए। साथ ही महासभा ने यह भी कहा कि राजद्रोह के लिए नसीरुद्दीन शाह और काफील खान जैसे लोगों को फांसी पर लटका दिया जाए।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू महासभा ने कहा कि नसीरुद्दीन शाह आतंकवादियों से प्रभावित हैं। हिंदू महासभा के प्रवक्ता अशोक पांडेय ने ये बातें कही है।

हिंदू महसभा शुरू से ही सीएए, एनपीआर और एनआरसी का विरोध करने वालों के खिलाफ आक्रामक रूख अपनाए हुए है। हिंदू महासभा ने सरकार से यह भी मांग की थी कि सीएए का विरोध करने वालों को पुलिस गोली मार दे ताकि इनलोगों (सीएए विरोधियों) की सुरक्षा और इनके प्रदर्शन स्थल की सुरक्षा पर टैक्सपेयर्स का पैसा न खर्च हो।

सीएए और एनआरसी को लेकर देश में कहीं विरोध-प्रदर्शन हो रहा है तो कहीं इसके समर्थन में रैलियां निकाली जा रही है। दिल्ली के शाहीनबाग, लखनऊ के घंटाघर, पटना के सब्जीबाग, मुंबई में मुंबई बाग जैसी जगहों पर लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन हुए। वहीं हिंदूवादी संगठनों ने इसके समर्थन में रैलियां निकाली है।

पिछले महीने हिंदू महासभा के प्रमुख चक्रपाणी ने कहा था, “अंग्रेजों के अविभाजित भारत से चले जाने के बाद पाकिस्तान ने एक इस्लामिक राष्ट्र बनना चुना लेकिन भारत के धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बना। इस वजह से सीएए आवश्यक हो गया। अगर धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र नहीं बनने की जगह हिंदू राष्ट्र चुना होता तो आज सीएए की जरूरत नहीं होती।”

वहीं शाहीन बाग में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ जारी प्रदर्शन की आलोचना करते हुए केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि जो हो रहा है उसमें असहमति के अधिकार की अभिव्यक्ति नहीं है बल्कि ‘‘दूसरों पर विचार थोपने का प्रयास है।’’ खान ने यहां एक सम्मेलन से इतर कहा कि कुछ लोगों ने कानून अपने हाथों में लेने और जनजीवन को प्रभावित करने का फैसला कर लिया है।

राज्यपाल ने कहा, ‘‘यह असहमति का अधिकार नहीं है, यह दूसरों पर विचार थोपने का प्रयास है। आपके पास अपने विचार अभिव्यक्त करने का अधिकार है लेकिन आपके पास सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त करने का अधिकार नहीं है।’’ सीएए के खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में जारी प्रदर्शनों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि 1986 में भी लाखों लोग थे जिन्होंने शाह बानो मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले को पलटे जाने का विरोध किया था। (भाषा इनपुट के साथ)

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