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सूरत: काम से घर लौट रहा था, बिहार के शख्‍स को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला

एक अनुमान के मुताबिक, 50 हजार से ज्यादा अप्रवासी मजदूरों को बीते दो हफ्तों में राज्य छोड़कर भागना पड़ा है। लेकिन पुलिस का अाधिकारिक आंकड़ा करीब 15 हजार श्रमिकों तक ही सीमित है।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (फोटो सोर्स : Indian Express)

बिहार मूल का अप्रवासी शख्स जो बीते 15 सालों से गुजरात के सूरत में रह रहा था, शुक्रवार (12 अक्टूबर) की शाम को उन्मादी भीड़ ने कथित तौर पर लाठी—डंडों से पीटकर उसकी हत्या कर दी। पीड़ित का नाम अमरजीत सिंह बताया जा रहा है। परिवार वालों का कहना है कि जिस वक्त हमला किया गया वह अपने काम से घर लौट रहा था। ये हत्या 14 महीने की बच्ची के साथ कथित रेप के बाद भड़की हिंसा में की गई है। इसी हिंसा और हमलों के भय से हिंदी भाषी हजारों कामगारों ने राज्य से पलायन​ किया है। अमरजीत सूरत के पंडेश्वरा इलाके की एक मिल में काम करता था। वह गुजरात में 17 साल की उम्र में काम की तलाश में आया था। बाद में मेहनत से जमा किए पैसों से उसने अपना घर भी बना लिया था। उसका परिवार बिहार के गया जिले में रहता है। अमरजीत के परिवार में उसकी पत्नी और दो बच्चे हैं।

पीड़ित के पिता राजदेव सिंह ने ने मीडिया से बातचीत में इस घटना को घृणित अपराध बताया है। उन्होंने केंद्र, गुजरात और बिहार की सरकारों से मांग की है कि वह गुजरात में हिंदी भाषी परिवारों के साथ हिंसा और नफरत फैलने से रोकने के लिए कदम उठाएं ताकि किसी अन्य परिवार को अपना बेटा न खोना पड़े।

गुजरात में रह रहे हिंदी भाषी कर्मचारियों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। ये घटनाएं बिहारी मूल के 19 साल के मजदूर के द्वारा 14 महीने की बच्ची के साथ कथित रेप का मामला सामने आने के बाद शुरू हुईं। इस मामले में मजदूर को गिरफ्तार किया गया था। ये घटना 28 सितंबर को साबरकांठा जिले में हुई थी।

एक अनुमान के मुताबिक, 50 हजार से ज्यादा अप्रवासी मजदूरों को बीते दो हफ्तों में राज्य छोड़कर भागना पड़ा है। लेकिन पुलिस का अाधिकारिक आंकड़ा करीब 15 हजार श्रमिकों तक ही सीमित है। गुजरात में हाल के वक्त में अप्रवासियों के साथ अपराध की 70 से ज्यादा घटनाएं हुईं हैं। जिसमें सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वाले संदेश भी फैलाए गए। हालांकि पुलिस ने इस मामले में 600 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है। लेकिन पुलिस हिंसा फैलने से रोकने में नाकाम रही है। हालांकि, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भरोसा दिया था कि उन्होंने गुजरात के सीएम से बातचीत की है और हिंसा पर लगाम लगाने की अपील की है। बावजूद इसके हिंसा नहीं थम रही।

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