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असम के सीएम ने बताया ‘मोदी का मंत्र’, बोले- सरकार की बुराई सुनने के लिए होगा शून्य काल

असम के मुख्यमंत्री बने हेमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि मुझे लगता है कि मोदीजी ने गुजरात में जीरो ऑवर शुरू किया था, तो मुझे भी असम में यह अभ्यास शुरू करना चाहिए।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा। (एक्सप्रेस फोटोः अमित मेहरा)

सम के नवनियुक्त मुख्यमंत्री और पूर्वोत्तर में भाजपा के प्रमुख नेता हेमंत बिस्वा सरमा ने द इंडियन एक्सप्रेस के ई.अड्डा पर शिरकत की। जिसमें उन्होंने कोरोना महामारी से लड़ने, असम को आगे ले जाने के उपाय, अपने राजनीतिक करियर, कांग्रेस नेतृत्व की समस्या, सीएए, एनआरसी और केंद्र -राज्य के बीच संबध जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। हेमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली में मुलाकात की थी। मुलाकात के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने मुझे सलाह दी है कि उन्हें कैबिनेट की बैठकों के दौरान भी  ‘ज़ीरो ऑवर’ जैसी अवधारणा को अपनाना चाहिए। जिससे उन्हें सरकार के बारे में आलोचना सुनने को मिलेगी।

सरमा ने बुधवार को द इंडियन एक्सप्रेस ई.अड्डा में नेशनल ओपिनियंस एडिटर वंदिता मिश्रा के साथ बातचीत में बताया कि हम कैबिनेट में नकारात्मक प्रतिक्रिया देने वाले सभी मंत्रियों को एक साथ करेंगे और इनकी जिम्मेदारी एक वरिष्ठ मंत्री को देंगे। उन्होंने कहा कि मैं स्वयं  कैबिनेट में शामिल होकर वरिष्ठ मंत्री द्वारा बताई गयी समस्यों को सुनकर उसके निवारण का प्रयास करूंगा।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने  गुजरात में मुख्यमंत्री के रूप में जो अनुभव किया है उन सबके बारे में मैंने उनसे जानकारी ली है। उन्होंने कहा मुझे लगता है कि मोदीजी ने ऐसा गुजरात में किया है, तो मुझे भी असम में यह अभ्यास शुरू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपके काम को अच्छा बोलने वाले बहुत मिलेंगे, जबकि बुरा बताने वाले कम होंगे। जबतक आप बुराई नहीं सुनेंगे तब तक आप सुधार भी नहीं कर पाएंगे। एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आलोचनाओं को न केवल सुनते है बल्कि उसमें सुधार करने के लिए काम भी करते है।

केंद्र-राज्य संबंधों पर विस्तार से  चर्चा करते हुए उन्होंने हाल की घटना का जिक्र करते हुए  कहा कि पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी  पीएम मोदी द्वारा बुलाई गई चक्रवात यास समीक्षा बैठक को छोड़कर चली गयी थी। उन्होंने कहा कि उनको प्रधानमंत्री के पद का सम्मान करना होगा। इस तरह देश नहीं चलेगा। साथ ही उन्होंने ममता बनर्जी का जिक्र करते हुए कहा कि कोई सीएम ऐसे कैसे कह सकता है कि मैं प्रधानमंत्री के लिए 30 मिनट का इंतजार क्यों करूं? उन्होंने कहा कि मैंने अपने पूरे राजनीतिक करियर में इस तरह की बातें कभी नहीं सुनीं है। उन्होंने यह भी  बताया कि  मैंने मुख्यमंत्री को सोनिया गांधी से मिलने के लिए वेटिंग रूम में दो से तीन घंटे बैठे हुए देखा है। उन्होंने कहा कि उनको अपने अहंकार को अलग रखकर प्रधानमंत्री का अभिवादन करना चाहिए था।

संघवाद के विषय पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज केंद्र-राज्य इस तरह से हो गए है कि ममता बनर्जी जैसी सीएम केंद्र सरकार को चुनौती देने की हिम्मत रखतीं हैं। 2002 से असम में कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे सरमा ने कहा कि केंद्र सरकार सभी राज्यों में विकास गतिविधियों को जारी रखेगी, वहां चाहे जिसकी भी सरकार हो। उन्होंने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में वह बिना किसी भेदभाव के प्रत्येक व्यक्ति के लिए काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

उन्होंने यह भी कहा जो लोग एनआरसी और संबंधित न्यायिक प्रक्रिया में अपनी भारतीय नागरिकता साबित नहीं कर सकते हैं, उन्हें बांग्लादेश भेजने से पहले ही मताधिकार से वंचित किया जा सकता है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया की अभी तक एनआरसी के तहत 19 लाख से अधिक आवेदकों को बाहर कर दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सीमावर्ती जिलों में शामिल नामों में से 20 प्रतिशत और अन्य जगहों पर 10 प्रतिशत के पुन: जाँच की मांग करती है। उन्होंने कहा कि एनआरसी से बाहर होने के बाद भी लोगों को राज्य के फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल में अपील करने का मौका मिलेगा।

हेमंत सरमा ने कहा कि जब तक हम उन्हें वापस नहीं भेजते, जब तक के लिए हमें  गैर-नागरिकों का एक वर्ग बनाना होगा। उन्होंने कहा कि हमें उन्हें मौलिक, स्वास्थ्य और शिक्षा के अधिकार, जीवन और स्वतंत्रता के अधिकारों का आनंद लेने की अनुमति देनी होगी। लेकिन जबतक बांग्लादेश में प्रत्यर्पण के सवाल का समाधान नहीं हो जाता तब तक उन्हें मताधिकार से वंचित किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने सीएए पर कहा कि असम में सीएए विवादास्पद माना जाता है, जबकि असम इसका एक मुखर समर्थक था। उन्होंने कहा कि सीएए हमारी ऐतिहासिक जिम्मेदारी निभा रहा है। इसे सांप्रदायिकता के चश्में से नहीं देखा जाना चाहिए।

चुनाव प्रचार के दौरान उनके द्वारा की गई टिप्पणी, जिसमें उन्होंने कि कहा था कि उन्हें अल्पसंख्यकों वोट नहीं चाहिए, इस पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि एक राजनीतिक प्रचारक और मुख्यमंत्री के बीच अंतर होना चाहिए। उन्होंने बताया कि हमने उन क्षेत्रों में  किया है जहाँ अल्पसंख्यक रहते हैं। हमने असम में मुसलमानों के लिए 8 लाख घरों का निर्माण शुरू किया है। वे जिस क्षेत्र में रहते हैं, वहां सड़कें, भवन, कॉलेज, संस्थान के बाद संस्थान बनाए जा रहे हैं।

उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि लेकिन एक राजनीतिक व्यक्ति के रूप में मैं जानता हूं कि मैं वहां अपना वोट लेने नहीं जा रहा हूं। उन्होंने कहा कि अगर मैं वोट की लालच में काम करता हूं तो सारा ध्यान वही केंद्रित करता। जहां मुझे वोट मिलेंगे। लेकिन आज एक मुख्यमंत्री के रूप में अगर आप मुझसे पूछें कि मैं उस 35 फीसदी आबादी के लिए काम करने जा रहा हूं या नहीं। इस सवाल का जवाब दूंगा कि, हां  मैं अल्पसंख्यकों की उनत्ति के लिए ज्यादा से ज्यादा काम करूंगा। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि अगर मैं भाजपा राजनेता के रूप में मैं वोट मांगने जाऊंगा तो वहां मुझे एक भी वोट नहीं मिलेगा।

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