Himanta Biswa Sarma vs Pawan Khera: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी पर लगाए गए आरोपों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को राहत देते हुए शुक्रवार को उनकी अग्रिम जमानत की मांग स्वीकार कर ली। इस मामले पवन खेड़ा की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सीएम हिमंता पर तंज कसा था, जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें सिंघवी से सीख लेने की कोई जरूरत नहीं है।
दरअसल, पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला हम सभी को याद दिलाता है कि जब व्यक्तिगत स्वतंत्रता दांव पर होती है तो अदालतें ही हमारी आशा का अंतिम आधार बनी रहती हैं। उन्होंने असम के मुख्यमंत्री से भी आग्रह किया कि वह इस पर पुनर्विचार करें कि क्या किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए पवन खेड़ा के खिलाफ ऐसी भाषा का प्रयोग करना उचित है और उन्हें इस पर खेद व्यक्त करना चाहिए।
सिंघवी ने ‘हाथ जोड़कर’ किया था निवेदन
सीएम हिमंता बिस्वा सरमा का जिक्र करते हुए अभिषेक मनु सिंघी ने पूछा,”मैं हाथ जोड़कर असम के मुख्यमंत्री से निवेदन करता हूं कि क्या वह वास्तव में कोर्ट के फैसले के बाद अपने रुख पर पुनर्विचार नहीं करना चाहते?” सिंघवी के इस बयान पर अब मुख्यमंत्री हिमंता ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि उन्हें सिंघवी (अभिषेक मनु सिंघवी) से कोई सीख लेने की जरूरत नहीं है।
हिमंता बिस्वा सरमा ने एक्स एक पोस्ट में लिखा, “मुझे किसी से भी विशेषकर अभिषेक मनु सिंघवी से लोकतंत्र, सार्वजनिक संवाद या शालीनता पर पाठ की आवश्यकता नहीं है। असली मुद्दा एक महिला से जुड़ा है, जिसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन राष्ट्रीय टेलीविजन पर जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके दूसरे देशों से लाए गए दस्तावेजों से उसकी छवि खराब की गई है।”
हिमंता बोले- ये तो बस शुरुआत है
हिमंता ने लिखा, “मुझे पूरा विश्वास है कि अदालतें जल्द ही इस पर ध्यान देंगी और चुनावी नतीजों को प्रभावित करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके एक महिला की छवि खराब करने के इस घिनौने कृत्य के लिए दोषी को सजा मिलेगी।” वहीं सिंघवी पर आक्रामक होते हुए हिमंता ने कहा, ” डॉ. सिंघवी ऐसे मंच पर बोलना आसान है, जहां मैं जवाब देने के लिए मौजूद नहीं हूं।
हिमंता बिस्वा सरमा ने मामले को आगे बढ़ाने के संकेत भी दिए हैं। उन्होंने लिखा, “इसे बहस नहीं कहते, यह तो बस निष्पक्ष आदान-प्रदान से बचना है, जिसकी आप वकालत कर रहे थे। मैं स्पष्ट कर दूं, यह तो बस शुरुआत है, अंत नहीं। सत्यमेव जयते।”
पवन खेड़ा की याचिका पर क्या बोले सिंघवी
कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम जमानत को ‘कानूनी मर्यादा की विजय’ करार दिया है। उन्होंने इस कानूनी प्रक्रिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट कोर्ट से शीर्ष अदालत तक का यह घटनाक्रम साफ करता है कि सत्ता का दुरुपयोग केवल विपक्ष की आवाज दबाने और नेताओं को प्रताड़ित करने के लिए किया जा रहा है।
अभिषेक मनु सिंघवी ने जोर देकर कहा कि जिस प्रेस कॉन्फ्रेंस को आधार बनाकर मानहानि का आरोप लगाया गया है, उसमें सभी तथ्य और दस्तावेज पूरी पारदर्शिता के साथ जनता के सामने रखे गए थे।
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सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को जालसाजी और मानहानि मामले में बड़ी राहत देते हुए अग्रिम जमानत (anticipatory bail) दे दी है। अदालत ने कहा कि मामले की जांच जारी रह सकती है लेकिन गिरफ्तारी की आवश्यकता पर संतुलन बनाए रखना होगा। इस फैसले से फिलहाल खेड़ा की गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। पढ़िए पूरी खबर…
