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नम आंखों से हिमाचल के सात सपूतों को अंतिम विदाई

हिमाचल प्रदेश के इतिहास में संभवत: यह पहला अवसर था जब देश के लिए जान देने वाले सात जवानों को एक ही दिन अंतिम विदाई दी गई। मणिपुर के उग्रवादी हमले में शहीद हुए जवानों का रविवार को मंडी, कांगड़ा, बिलासपुर और सिरमौर के उनके पैतृक गांवों में अंतिम संस्कार किया गया।

Author June 8, 2015 10:11 AM
हिमाचल प्रदेश के मंडी में सियून चाउट गांव में रविवार को जब मणिपुर हमले के शहीद हवलदार प्रकाश चंद का शव पहुंचा तो परिजन उनके ताबूत से लिपट कर रो पड़े। (फोटो: बीरबल शर्मा)

हिमाचल प्रदेश के इतिहास में संभवत: यह पहला अवसर था जब देश के लिए जान देने वाले सात जवानों को एक ही दिन अंतिम विदाई दी गई। मणिपुर के उग्रवादी हमले में शहीद हुए जवानों का रविवार को मंडी, कांगड़ा, बिलासपुर और सिरमौर के उनके पैतृक गांवों में अंतिम संस्कार किया गया।

मंडी जिले के विकास भारद्वाज की लडभडोल तहसील के पटनू गांव में अंत्येष्टि की गई। प्रकाश चंद का द्रंग में सियून चाउट गांव के सुराहण नाला में जबकि इसी क्षेत्र के गांव मसेरन (पाली) के मनोज कुमार का मसेरन नाला में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

कांगड़ा जिले के गरली-परागपुर के मूहीं गांव के लांसनायक रजनीश सिंह को विपाशा के किनारे अंतिम विदाई दी गई। बिलासपुर जिले के हीरापुर गांव के शहीद राजेश कुमार का गोविंद सागर के किनारे औहर स्थित श्मशानघाट पर अंतिम संस्कार हुआ। सिरमौर जिले के हरिपुरधार क्षेत्र के डकासना में अशोक कुमार और पांवटा क्षेत्र के मानपुर में सोहन सिंह का भी राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

तोपों की सलामी के साथ नन्हे हाथों ने दी मुखाग्नि

मणिपुर के चंदेल में उग्रवादी हमले में शहीद हुए हिमाचल के सपूतों का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर रविवार को अपनों के पास पहुंचा। शहीदों की सूची में नाम शुमार करने वाले जवानों को नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई।

मंडी जिले के जोगिंदरनगर उपमंडल के तहत आने वाली लडभडोल तहसील के पटनू गांव में सुबह आठ बजे जैसे ही विकास भारद्वाज का शव पहुंचा वहां मौजूद हजारों लोग बिलखने लगे। मां मीरा देवी और पिता राकेश भारद्वाज का बुरा हाल था। करीब आधे घंटे के बाद अंतिम यात्रा शुरू हुई। श्मशान घाट में तिल रखने की जगह नहीं थी। स्थानीय पुलिस और सेना के जवानों ने शहीद को आठ तोपों की सलामी दी। चिता को बहन शिवानी ने मुखाग्नि दी। प्रशासन की ओर से जिला उपायुक्त संदीप कदम, कर्नल सुधीर टोकस, पुलिस उपाधीक्षक राजेश कुमार मौजूद थे।

द्रंग क्षेत्र की पंचायत सियून के चाउट निवासी हवलदार प्रकाश चंद और पाली पंचायत के मसेरन निवासी सिपाही मनोज कुमार भी रविवार को पंचतत्त्व में विलीन हुए। शहीद मनोज कुमार को उनके बेटे अर्णव और प्रकाश चंद को उनके बेटे अंकित ने मुखाग्नि दी। सरकार की ओर से स्थानीय विधायक और वरिष्ठ मंत्री कौल सिंह ठाकुर, सांसद रामस्वरूप शर्मा, भाजपा नेता जवाहर ठाकुर, एडीसी मंडी रूग्वेद सिंह, एसडीएम पधर विनय मोदी, डोगरा रेजिमेंट के ब्रिगेडियर और कर्नल सहित सेना के करीब दो दर्जन जवान अंत्येष्टि में शामिल हुए।

गरली-परागपुर के मूहीं गांव निवासी लांसनायक रजनीश सिंह का रविवार को विपाशा नदी किनारे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सिंह के दस साल के बेटे शिवांग ने पिता की चिता को आग दी तो मौके पर मौजूद हर व्यक्ति रो पड़ा। डेढ़ महीने पहले ही छुट्टियां बिताकर पलटन में लौटे रजनीश ने पत्नी शमिता से अपने नवनिर्मित मकान के गृह प्रवेश समारोह के लिए जल्द लौटने का वादा किया था। लेकिन रविवार को तिरंगे में लिपट कर मूहीं पहुंची रजनीश की पार्थिव देह ने शमिता और बेटे शिवांग व सुजल के तमाम सपने बिखेर दिए। शमिता को ढाढस बंधाने पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल शनिवार को मूंही पहुंचे थे।

बिलासपुर में गोविंद सागर के किनारे औहर श्मशानघाट पर राजेश कुमार का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शहीद के 12 साल के बेटे आयुष ने पिता को मुखाग्नि दी। राजेश की पार्थिव देह को लेकर सेना की टुकड़ी सुबह करीब आठ बजे हीरापुर पहुंची। सेना के साथ ही शहीद के पिता पूर्व सैनिक जोगिंद्र सिंह और भाई मुकेश व दिनेश ने भी सलामी दी।

सिरमौर जिले के दो जाबांज नायक अशोक कुमार और सिपाही सोहन लाल को भी अपनों ने अलविदा कहा। भारतीय सेना के डोगरा रेजीमेंट के सिपाही सोहन लाल का उनके पैतृक गांव मानपुर देवडा में अंतिम संस्कार हुआ। सोहल लाल के पार्थिव शरीर को उनके भाई हरविंद्र सिंह ने मुखाग्नि दी। सैनिक कल्याण मंत्री धनीराम शांडिल ने सरकार की ओर से शहीद को पुष्पचक्र अर्पित किया। विधायक राजीव बिंदल, सुरेश कश्यप, बलदेव तोमर के अलावा जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम पांवटा एचएस राणा, डीएसपी योगेश रोल्टा भी मौजूद थे।

हरिपुरधार में सिरमौर के ही नायक शहीद अशोक कुमार के पार्थिव शरीर पर मुख्य संसदीय सचिव विनय कुमार ने प्रदेश सरकार की ओर से पुष्पचक्र अर्पित किए। शहीद के भाई जगत सिंह राणा ने पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी। जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम संगडाह अशोक चौहान, डीएसपी मनमोहन सिंह के अलावा चार हजार से अधिक लोगों ने नायक को अंतिम विदाई दी।

बीरबल शर्मा, सुभाष मेहरा, शक्ति उपाध्याय, दिनेश कनौजिया

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