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राजमार्ग हवा हवाई, जनता जमीन पर आई

राष्ट्रीय राजमार्गों पर 65 हजार करोड़ रुपए का निवेश करने का एलान किया गया था लेकिन धरातल पर कुछ भी नहीं उतरा है।

राजमार्ग हवा हवाई, जनता जमीन पर आई

ओमप्रकाश ठाकुर

डबल इंजन की सरकार के होते हुए भी पिछले चार सालों में प्रदेश के लिए घोषित 69 राष्ट्रीय राजमार्गों में से अधिकांश की संरेखन रिपोर्ट या एलाइनमेंट रिपोर्ट सड़क परिवहन व भूतल मंत्रालय के पांस पहुंच जाने के बाद भी मंजूर नहीं हो पाई है। इन राष्ट्रीय राजमार्गों पर 65 हजार करोड़ रुपए का निवेश करने का एलान किया गया था लेकिन धरातल पर कुछ भी नहीं उतरा है।

गौरतलब हो कि सड़कें पहाडी राज्य हिमाचल की जीवन रेखा है। पहाड़ों पर पीठ के बोझ को कम करने के लिए प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री डाक्टर यशवंत सिंह परमार से लेकर मौजूदा मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर तक के शासन काल तक हर गांव व पंचायत तक सड़कों की मांग लगातार होती रही।

जब 2014 में लोकसभा चुनावों में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद केंद्रीय सड़क व भूतल मंत्री नितिन गडकरी ने प्रदेश को 69 राष्ट्रीय राजमार्ग देने की घोषणा की तो जनता को लगा कि केंद्र में अब जाकर ऐसी सरकार सत्ता में आई है जो पहाड़ी राज्यों की तकलीफों व जरूरतों को समझती हैं। इससे पहले 1999 से 2004 तक केंद्र में रही वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में भी में सड़कों का जाल बिछाने का काम बड़े पैमाने पर हुआ था। खास कर प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत ज्यादा सड़कें बनी थीं।

गडकरी ने साथ ही एलान किया कि केंद्र सरकार इन राष्ट्रीय राजमार्गों पर 65 हजार करोड़ रुपए का निवेश करेगी। 75 लाख के आबादी वाले इस राज्य के लिए निवेश की यह रकम बहुत ज्यादा थी। पहाड़ के लोगों ने केंद्र सरकार पर भरोसा कर लिया। यह भरोसा तब और ज्यादा बढ़ गया जब केंद्र सरकार ने इन तमाम राष्ट्रीय राजमार्गों को 14 सितंबर 2016 को सैंद्धातिक मंजूरी तक दे दी और राज्य सरकार से डीपीआर बनाने का आग्रह किया।

जब डीपीआर बनने में देरी होने लगी तो भाजपा ने तब की प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया कि वह डीपीआर बनाने में देरी कर रही है। भाजपा ने इसे 2017 के विधानसभा चुनावों से पहले बड़ा मुद्दा बनाया और प्रदेश में भी व केंद्र में भी एक पार्टी की सरकार हो जनता को इसकी जरूरत महसूस कराने का जमकर प्रचार किया। तब डबल इंजन की सरकार की अवधारणा को जनता के बीच ले जाया गया।

ऐसे में गडकरी की घोषणाओं से जनता को उम्मीद बंधी थी कि डबल इंजन की सरकार कुछ कर सकती है और पहाड़ के लोगों की ‘जीवन रेखा’ सड़कों का जाल बिछा कर उनका भाग्य बदल सकती हैं। प्रदेश में दिसंबर 2017 में विधानसभा चुनाव हुए और भाजपा को बहुमत मिला। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनावों में भी चारों सीटें भाजपा की झोली में डाल दी गर्इं।

अब केंद्र व प्रदेश में दोनों ही जगहों पर भाजपा की सरकारें हैं। बावजूद इसके 2017 से लेकर अब तक राष्ट्रीय राजमार्ग धरातल पर नहीं उतरे हैं और अब उम्मीद भी बुझने लगी हैं। अभी अगस्त को समाप्त हुए प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में सदन में सामने आया कि प्रदेश सरकार ने जिन राष्ट्रीय राजमार्गों की संरेखन रिपोर्ट या एलाइनमेंट रिपोर्ट को अगस्त व सितंबर 2018 में केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय को मंजूरी को भेज दिया था, उनको अब तक मंजूरी नहीं मिली है।

सितंबर 2018 से लेकर अगस्त 2022 तक करीब चार साल हो जाते है। डबल इंजन की सरकार में चार साल से इन 69 राष्ट्रीय राजमार्गों में अधिकांश की न तो संरेखन रिपोर्ट मंजूर हुई और न ही यह राष्ट्रीय राजमार्ग अधिसूचित हो पाए। बजट का तो सवाल ही नहीं हैं। यह जवाब सदन में मुख्यमंत्री ने दिया है। उपचुनावों में डबल इंजन की सरकार को प्रदेश की जनता नकार चुकी है और अब आने वाले चुनावों में कोई घोषणा होती भी है तो पहले की घोषणाओं का जवाब तो जनता मांगेगी ही। वह समय अब आ गया है।

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