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हाई कोर्ट का आदेश- नजीब को खोजने के लिए कुत्ते लगाओ, जेएनयू के पूरे एक एकड़ को छान मारो, जरूरी हो तो जामिया में भी तलाशो

जेएनयू से बॉयोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई कर रहा नजीब अहमद 15 सितंबर से लापता है।

Author December 15, 2016 08:51 am
जेएनयू के लापता छात्र नजीब अहमद की मां फातिमा नफीस। (फाइल फोटो)

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार (14 दिसंबर) को दिल्ली पुलिस को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के एक हजार एकड़ में फैले परिसर का “कोना-कोना” छान मारने का आदेश दिया। अदालत ने पुलिस से “छतों, पानी की टंकियों, हॉस्टलों, क्लासरूम और खुले मैदानों के खोजी कुत्तों की मदद से छानबीन के लिए कहा।” हाई कोर्ट करीब दो महीने पहले जेएनयू कैंपस से लापता छात्र नजीब अहमद के मामले की सुनवाई कर रहा था। अदालत नजीब की मां की हिबस कार्पस याचिका पर सुनवाई कर रही थी। नजीब की मां का आरोप है कि पुलिस नजीब के “अपहरण” की आशंका को जांच में ध्यान नहीं रख रही है।

हाई कोर्ट की जस्टिस जीएस सिस्तानी और जस्टिस विनोद गोयल की पीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए जेएनयू और जेएनयू छात्रसंघ से मामले में पुलिस को “पूरा सहयोग करने” का हलफनामा देने के लिए कहा। अदालत ने सुनवाई के दौरान ये भी कहा कि दिल्ली पुलिस जरूरत होने पर जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कैंपस की भी यूनिवर्सिटी से इजाजत लेकर छानबीन कर सकती है। नजीब अहमद जेएनयू के स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी का छात्र था। नजीब 15 अक्टूबर से कैंपस में लापता है। कथित तौर पर जिस रात से नजीब लापता है उसी रात उसकी कथित तौर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों से झड़प हुई थी।

जेएनयू की वकील मोनिका अरोड़ा ने अदालत को बताया कि नजीब के लापता होने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन और दिल्ली पुलिस द्वारा जेएनयू कैंपस की “पूरी जांच” की जा चुकी है। हालांकि दिल्ली पुलिस ने बताया कि उसने “पूरे कैंपस” की जांच नहीं की है। अदालत ने सुनवाई के दौरान पूछा, “क्या आपने छतों, पानी की टंकियों और हॉस्टलों की जांच की? क्या आपने खोजी कुत्तों की मदद ली?” नजीब की मां फातिमा की तरफ से पेश हुए वकील कोलिन गोंजालविस ने अदालत को बताया कि “जेएनयू छात्रसंघ ने कहा है कि वो खोजबीन में पूरा सहयोग करेगा।”

दिल्ली पुलिस के वकील राहुल मेहरा ने अदालत को बताया कि पुलिस नजीब से कहासुनी में कथित तौर पर शामिल कुछ छात्रों का “लाई डिटेक्टर टेस्ट” करना चाहती है। संभव है कि दिल्ली पुलिस करीब 10 दिन बाद ये टेस्ट कराए। अदालत ने फोरेंसिक लैब को भी इस मामले को प्राथमिकता  देने के लिए कहा है। दिल्ली पुलिस द्वारा ये दलील दिए जाने पर कि सीसीटीवी कैमरे न होने से पता करना मुश्किल है कि नजीब कैंपस से बाहर गया या नहीं, अदालत ने जेएनयू प्रशासन से परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगवाने के लिए कहा।

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