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एअर इंडिया पर बरसा हाई कोर्ट- सारी फ्लाइट्स बंद क्‍यों नहीं कर देते

पिछली सुनवाई के दौरान डिविजन बेंच ने एअर इंडिया से पूछा था कि किन कारणों से चंडीगढ़ और बैंकॉक के बीच संचालित होने वाली फ्लाइट को बंद कर दिया गया। चंडीगढ़ से बैंकॉक के बीच संचालित होने वाली ये फ्लाइट जुलाई में बंद कर दी गई थी।

(Photo-Reuters)

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने मंगलवार को एअर इंडिया को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि उसे पूरे देश में अपनी सेवाएं बंद कर देनी चाहिए जबकि एअर इंडिया के कार्यकारी निदेशक को आदेश दिया कि वह मामले की अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट में सशरीर उपस्थित रहें। ये निर्देश मुख्य न्यायाधीश कृष्ण मुरारी और जस्टिस अरुण पल्ली की डिविजन बेंच ने दिए। बेंच मोहाली इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की तरफ से चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

पिछली सुनवाई के दौरान डिविजन बेंच ने एअर इंडिया से पूछा था कि किन कारणों से चंडीगढ़ और बैंकॉक के बीच संचालित होने वाली फ्लाइट को बंद कर दिया गया। वैसे बता दें कि चंडीगढ़ से बैंकॉक के बीच संचालित होने वाली ये फ्लाइट जुलाई में बंद कर दी गई थी। उस वक्त हज यात्रा के लिए विमानों की जरूरत के कारण ऐसा किया गया था।

एअर इंडिया को कोर्ट ने निर्देश दिया था कि उसके कार्यकारी निदेशक विभिन्न सेक्टर पर उनकी फ्लाइट के शिड्यूल, लोड फैक्टर और फ्लाइट की संभावनाओं के बारे में एक हलफनामा कोर्ट में दाखिल करें। एयरलाइन को ये निर्देश भी दिया गया था कि वह चंडीगढ़—बैंकॉक के बीच उड़ान की संभावनाओं और लोड फैक्टर के बारे में हलफनामा भी दायर करें।

बुधवार (17 अक्टूबर) को मामले की सुनवाई के दौरान, एयरलाइन के वकीलों ने मंगलवार (16 अक्टूबर) को कोर्ट को बताया था कि उन्हें इस रूट पर फ्लाइट का संचालन करने के कारण 8 करोड़ रुपये का घाटा सहना पड़ रहा था। अपने हलफनामे में, एअर इंडिया ने साफ किया है कि चंडीगढ़ से बैंकॉक के बीच सीधी फ्लाइट में सिर्फ 65 फीसदी सीटें ही भर पा रहीं थीं। सुनवाई के दौरान डिविजन बेंच ने कहा,”क्यों नहीं आप पूरे देश और दुनिया में चलने वाली अपनी फ्लाइट को बंद कर देते हैं? आप पूरी तरह बंद कर दीजिए। एक सिंगल फ्लाइट का संचालन भी मत करवाइए।”

बाद में कोर्ट ने एयर इंडिया के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर को निर्देश दिया कि वह कोर्ट में सहयोग के लिए मामले की सुनवाई की अगली तारीख पर उपस्थित रहें क्योंकि कोर्ट ने ये पाया गया कि दाखिल किया गया हलफनामा कोर्ट के पिछले आदेश के मुताबिक नहीं है। बेंच ने कहा कि हलफनामे में विभिन्न रूट पर संचालित फ्लाइट में लोड फैक्टर के बारे में जानकारी नहीं दी गई है। कोर्ट ने कहा कि उन्हें एयरलाइन के द्वारा संचालित की जाने वाली सभी फ्लाइट के बारे में जानकारी चाहिए।

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