ताज़ा खबर
 

जवानों के लिए बीएसएफ ने शुरु की हेल्पलाइन

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने एक विशेष टेलीफोन आधारित हेल्पलाइन शुरू की है ताकि उसके जवान 31 जनवरी तक गुप्त तरीके से अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें।

Author नई दिल्ली | January 14, 2017 1:11 AM

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने एक विशेष टेलीफोन आधारित हेल्पलाइन शुरू की है ताकि उसके जवान 31 जनवरी तक गुप्त तरीके से अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें। कुछ दिन पहले बल के एक जवान ने सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर कथित तौर पर खराब गुणवत्ता वाला खाना मिलने का आरोप लगाया था।
अधिकारियों ने कहा कि बीएसएफ के महानिदेशक केके शर्मा ने गुरुवार देश भर में बल की क्षेत्रीय इकाइयों के साथ उपग्रह आधारित एक सैनिक सम्मेलन किया था। इसमें उन्होंने जवानों से गुप्त तरीके से अपनी शिकायतें उन्हें बताने को कहा। शर्मा ने यहां बीएसएफ मुख्यालय के दो टेलीफोन नंबर भी बताए और कहा कि जवान और अधिकारी इन हेल्पलाइनों पर अपनी कोई भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, कॉल करते वक्त उनके नाम, रैंक, पदनाम वगैरह नहीं पूछे जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह हेल्पलाइन 31 जनवरी तक काम करेगी। उसके बाद वाजिब शिकायतों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

बता दें कि इससे पहले रविवार (नौ जनवरी) को बीएसएफ के कांस्टेबल तेज बहादुर यादव ने फेसबुक पर कई वीडियो शेयर करके सैनिकों को खराब खाना दिए जाने की शिकायत की। बुधवार (11 जनवरी) शाम चार बजे तक इस वीडियो को लाखों से ज्यादा लोग देख चुके हैं। तेज बहादुर ने फेसबुक पर तीन और वीडियो शेयर किए हैं। इन वीडियो में जली रोटी, पानी वाली दाल को दिखाया गया है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने तत्काल मामले की जांच का आदेश दे दिया। बीएसएफ ने मामले पर सफायी देते हुए खराब दिए जाने से इनकार किया। लेकिन पूरे मामले में भावनाओं में बहकर इस बात की अनदेखी की जा रही है कि यादव ने अपनी सेवा शर्तों का उल्लंघन किया है।

42 वर्षीय यादव हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के रहने वाले हैं। वो 1996 में बीएसएफ में भर्ती हुए थे। उन्हें जम्मू-कश्मीर स्थित राजौरी सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के निकट तैनात किया गया था। वीडियो में यादव ने आरोप लगाया है कि सैनिकों को पिछले 10 दिनों से लगातार जली हुई रोटी और पानी मिली हुई दाल खाने में दी जा रही है। यादव ने आरोप लगाया कि कई बार जवानों को भूखा भी रहना होता है। यादव 2032 में रिटायर होने वाले हैं लेकिन उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) की अर्जी दी है। माना जा रहा है कि वीआरएस स्वीकार किए जाने पर इसी महीने के अंत तक उन्हें सेवा मुक्त किया जा सकता है।

संवेदनशील क्षेत्र में तैनात यादव ने वीडियो पोस्ट करके सुरक्षा बलों पर लागू होने वाली सेवा शर्तों का उल्लंघन किया है। सैन्य बल और अर्ध सैनिक बल की सेवा शर्तें काफी कड़ी होती हैं। इन सेवा शर्तों के अनुसार सुरक्षा बलों के ऊपर से नीचे के पद के अधिकारियों पर अपने विचार सार्वजनिक करने पर रोक होती है, खासकर संवेदनशील मुद्दों पर। यादव द्वारा अपनी दिक्कत को इस तरह फेसबुक पर शेयर करने और उसके वायरल होने से दूसरे सैन्य बलों को भी ऐसा करने की प्रेरणा मिल सकती है।

पिछले कुछ समय से सुरक्षा बलों के अनुशासन का मुद्दा उठता रहा है। फेसबुक और ट्विटर के बढ़ते प्रयोग से स्थिति पहले से चिंताजनक हुई है। पिछले साल “वन रैंक वन पेंशन” आंदोलन के समय व्हाट्सऐप के प्रयोग को सरकार विशेष रूप से चिंतित हो गयी थी। सेना में काम करने वाले अधिकारियों और जवानों द्वारा एनक्रिप्टेड मैसेज सर्विस के प्रयोग से सरकार के लिए उनकी निगरानी मुश्किल हो गयी। साल 2012 में लेह में तैनात एक रेजिमेंट में अफसरों और सैनिकों के बीच मारपीट से सभी लोग स्तब्ध रह गये थे।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App