ताज़ा खबर
 

ISRO: चंद्रयान-2 ने चांद की कक्षा में रखा कदम, थम गई थीं सांसें, अगली परीक्षा सात सितंबर को

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष के. सिवन सिवन ने कहा कि इसरो के वैज्ञानिकों ने जब चंद्रयान-2 को चंद्रमा के इर्द-गिर्द एक कक्षा में प्रवेश कराने के लिए उसके तरल इंजन को फायर करना शुरू किया तब हमारी धड़कनें तेज हो गई थीं।

Author बंगलुरु | Updated: August 21, 2019 1:29 AM
प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट में कहा, ‘चंद्रमा की कक्षा में चंद्रयान-2 के प्रवेश करने पर टीम इसरो को बधाई। यह चंद्रमा की मील का पत्थर माने जाने वाली यात्रा की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।’

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष के. सिवन ने कहा है कि मंगलवार को चंद्रयान-2 के चंद्रमा की कक्षा में कदम रखने का प्रयास करते समय हमारे दिल की धड़कनें लगभग थम सी गई थीं।’ सिवन  सिवन ने कहा कि इसरो के वैज्ञानिकों ने जब चंद्रयान-2 को चंद्रमा के इर्द-गिर्द एक कक्षा में प्रवेश कराने के लिए उसके तरल इंजन को फायर करना शुरू किया तब हमारी धड़कनें तेज हो गई थीं। चंद्रयान-2 को चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कराने के लिए ‘लूनर ऑर्बिट इंसर्शन’ (एलओआइ) प्रक्रिया के प्रणोदन प्रणाली के माध्यम से सुबह नौ बजकर दो मिनट पर सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद सिवन ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘करीब 30 मिनट तक हमारे दिल की धड़कनें लगभग थम सी गई थीं।’

सिवन ने कहा कि सात सितंबर को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने की प्रक्रिया के दौरान स्थिति काफी अलग और तनाव भरी होगी क्योंकि इसरो ने ऐसा पहले कभी नहीं किया है। उन्होंने कहा, ‘अभी तनाव बढ़ गया है, घटा नहीं है।’ बहरहाल, इसरो को सॉफ्ट लैंडिंग को लेकर पूरा विश्वास है। सिवन ने कहा, ‘हमाने विभिन्न प्रणालियों के पर्याप्त परीक्षण किए हैं, जितना संभव हो सकता था, हमने किया है।’ चंद्रयान-2 ने 14 अगस्त को चंद्रमा अंतरण मार्ग (लूनर ट्रांसफर ट्रैजेक्टरी) में कदम रखा था। चंद्रयान-2 में आॅर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) लगे हैं।

इसरो ने कहा कि इसके बाद यान को चंद्रमा की सतह से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर चंद्र ध्रुवों के ऊपर से गुजर रही इसकी अंतिम कक्षा में पहुंचाने के लिए चार और कक्षीय प्रक्रियाओं को अंजाम दिया जाएगा। अंतरिक्ष एजंसी ने कहा कि इसके बाद लैंडर ‘विक्रम’ दो सितंबर को आॅर्बिटर से अलग हो जाएगा। इसरो ने कहा कि सात सितंबर को चंद्रमा की सतह पर साॉफ्ट बाकी पेज 8 पर लैंडिंग कराने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले लैंडर संबंधी दो कक्षीय प्रक्रियाओं को अंजाम दिया जाएगा।

इसरो ने कहा कि अगली कक्षीय प्रक्रिया बुधवार को दोपहर साढ़े 12 से डेढ़ बजे के बीच की जाएगी। देश के कम लागत वाले अंतरिक्ष कार्यक्रम को पंख लगाते हुए इसरो के सबसे शक्तिशाली तीन चरण वाले रॉकेट जीएसएलवी-एमके3-एम1 ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से 22 जुलाई को चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण किया था। इसरो का यह अब तक का सबसे जटिल और सबसे प्रतिष्ठित मिशन है। यदि सब कुछ सही रहता है तो रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत, चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन जाएगा। चंद्रयान-2’ मिशन भारत के लिए इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में अभी तक कोई देश नहीं पहुंचा है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 सेना ने लिया ‘बदला’, LOC पर मार गिराया IAF विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को पकड़ने वाले पाकिस्तानी सैनिक को
2 चिदंबरम की जमानत याचिका खारिज करने वाले जज शुक्रवार को हो रहे रिटायर, पूर्व वित्त मंत्री को बताया ‘किंग पिन’
3 पैनलिस्ट पर भड़के केसी त्यागी बोले- तुम धरने पर नहीं बैठे और मैंने आपातकाल में जेल की सजा काटी है