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अपनी चिंता छोड़ कोरोना को हराने में जुटे स्वास्थ्यकर्मी

एम्स सहित राजधानी के अस्पतालों में कोरोना वार्ड में ड्यूटी कर रहे तमाम डॉक्टर कठिन परिस्थिति में मोर्चा थामे हैं। पीपीई किट कम है इसलिए जो सुबह ड्यूटी के लिए पहन लेते हैं। वही दिन भर गरमी व उलझन के बाद भी वे नहीं उतारते।

corona पीड़ितों का इलाज करते डॉक्टर। (file)

एक ओर जहां कोरोना मरीजों के एक के बाद एक स्वास्थ्यकर्मियों से दुर्व्यवहार के मामले सामने आ रहे हैं, वहीं स्वास्थ्यकर्मी एक से बढ़कर एक मिसाल कायम कर रहे हैं। एम्स की एक नर्स ने खुद आगे बढ़ कर कोरोना वार्ड में अपनी ड्यूटी लगवाई। वहीं लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल के नर्सिंग आफीसर दया राम ने भी सर्जरी के लिए दूसरे अस्पताल में भर्ती अपनी पत्नी के पास न होकर वह अपनी कोरोना वार्ड की ड्यूटी बखूबी निभा रहे हैं। उन्होंने अपनी ड्यूटी की मियाद खुद को कोरोना होने या कि हालात संभलने तक खुद ही तय की है। उनकी पत्नी का सोमवार को एक निजी अस्पताल में आॅपरेशन किया गया।

एम्स सहित राजधानी के अस्पतालों में कोरोना वार्ड में ड्यूटी कर रहे तमाम डॉक्टर कठिन परिस्थिति में मोर्चा थामे हैं। पीपीई किट कम है इसलिए जो सुबह ड्यूटी के लिए पहन लेते हैं। वही दिन भर गरमी व उलझन के बाद भी वे नहीं उतारते। इस वजह से कई बार बिना कुछ खाए पिए भी मुस्तैद रह रहे हैं। डॉ नीरज यादव, डॉ राजीव रंजन, डॉ शिवाजी जैसे कई डॉक्टर कई-कई घंटे काम कर रहे हैं वही नर्स भी पीछे नहीं हैं। वे अपनी क्षमता से बढ़कर डटीं हैं।

नर्स दयाराम की पत्नी को पित्त की थैली में पथरी है। डॉक्टरों ने तुरंत आॅपरेशन करने को कहा। यह आपरेशन पहले ही होना था। इस बीच कोरोना की दिक्कत आई तो दयाराम ने अपने दो छोटे बच्चों समेत पत्नी को राजस्थान भेज दिया। दयाराम ने बताया कि तब आपरेशन टाल दिया।

दयाराम ने सोचा कि कहीं कोरोना वार्ड से ड्यूटी खत्म कर घर जाते हुए घर सहित न जाने कितनों को संक्रमित न कर दें, यह सोच घरवालों को गांव पहुंचाया व खुद को अस्पताल में रुकने की मुख्यमंत्री से मंजूरी ली। ताकि ज्यादा सही तरीके से अस्पताल का काम भी देख सकें। अब सरकार की ओर से तय की गई व्यवस्था के तहत डॉक्टर या अन्य कर्मचारी दो हफ्ते की ड्यूटी के बाद 14 दिन तक पृथक रहेंगे। लेकिन दयाराम हर 14 दिन पर पृथक पर जाने को तैयार नहीं हैं उनका कहना है कि वे यहां से तभी हटेंगे जब या तो कोरोना का संक्रमण नियंत्रित होगा या तब जब खुद उनको कोरोना हो जाए।

इस बीच पत्नी को दिक्कत हुई तो दोस्तों से मदद लेकर उन्हें दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवा दिया है, पर वहां गए नहीं। इनकी आठ साल की बेटी व पांच साल का बेटा राजस्थान में ही बुजुर्ग मां के साथ हैं। वहीं इनकी पत्नी की मदद में लगी दूसरी साथी नर्स अपने दो बच्चों को किसी तीसरे के सहारे छोड़ इनकी पत्नी के साथ अस्पताल में है।

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