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प्रेस कॉन्फ्रेंस में भड़क गईं स्वास्थ्य सचिव, मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संभाली स्थिति

स्वास्थ्य सचिव से जब पत्रकारों ने पारंपरिक तंबाकू वाले सिगरट पर बैन नहीं करने को लेकर सवाल पूछा तो वह भड़क उठीं। हालांकि, तभी प्रकाश जावड़ेकर ने स्थिति को संभाल लिया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर।

भारत सरकार ने ई-सिगरेट के उत्पादन एवं बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंद लगा दिया है। बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में फैसला लिया गया। बैठक के बाद हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार के इस कदम पर पत्रकारों के द्वारा कई सवाल किए गए। मसलन, ई-सिगरेट ही क्यों? दूसरी सिगरेट या तंबाकू पर प्रतिबंध क्यों नहीं? इस संदर्भ में पत्रकारों के सवालो का जवाब देते हुए स्वास्थ्य सचिव प्रति सूदन उखड़ गईं। दरअसल, प्रति सूदन सवालों का जवाब देते हुए कहा कि चूंकि कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के अध्ययन में इससे होने वाली हानियों की पुष्टि हो चुकी है। भारत के भी कई संस्थानों ने ई-सिगरेट को स्वास्थ्य के लिए हानिप्रद बताया है, ऐसे में इसे प्रतिबंधित किया जा रहा है। हालांकि, स्वास्थ्य सचिव की इस बात पर पत्रकारों को तसल्ली नहीं हुई और वे काउंटर में सवाल करते रहे।

पत्रकारों के लगातार सवालों से अचानक स्वास्थ्य सचिव नाराज हो गईं। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के ‘डेल्ही कॉन्फिडेंशल’ में छपे एक कॉलम में बताया गया है कि जवाब से पत्रकार जब संतुष्ट नहीं हुए तब स्वास्थ्य सचिव ने उखड़ गईं और कहा, “पूरी पीढ़ी नाली में चली जाएगी।” हालांकि, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने तुरंत स्थिति को संभालने की कोशिश की और पत्रकारों से मुखातिब होते हुए कहा कि उनके सवालों से संबंधित चिंताओं पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सुझावों पर अमल भी किया जाएगा।

गौरतलब है कि बुधवार को सरकार ने ई-सिगरेट पर बैन लगा दिया। कैबिनेट की बैठक के बाद निर्मला सीतारमण ने साफ कर दिया है कि इसका आयात-निर्यात, बिक्री, वितरण, विज्ञापन आदि सब प्रतिबंधित कर दिया गया है। ‘ई सिगरेट ऑर्डिनेंस 2019’ के ड्राफ्ट में स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया था कि कानून का उल्लंघन करने वालों पर एक लाख रुपये का जुर्माना और एक साल सजा का प्रावधान हो। बार-बार अपराध करने वालों के लिए पांच लाख रुपये जुर्माना और तीन साल के अधिकतम सजा की सिफारिश मंत्रलाय ने की थी। गौरतलब है कि ई-सिगरेट का पक्ष लेने वालों की दलील है कि यह तंबाकू की तुलना में कम हानिकारक है। जबकि, सरकार का कहना है कि यह तंबाकू वाले पारंपरिक सिगरेट की तरह ही हानिकारक है।

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