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आयुर्वेद से होगा कोरोना का इलाज? स्वास्थ्य मंत्री बोले- खतरे वाली जगहों पर काम कर रहे लोगों पर किया जाएगा अश्वगंधा जैसी चार दवाओं का ट्रायल

भारत में इस वक्त 6 कंपनियां कोरोनावायरस से लड़ने में मददगार वैक्सीन बनाने की कोशिश में जुटी हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन।

देश में कोरोनावायरस संक्रमण का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस हफ्ते टेस्ट्स की संख्या बढ़ने के साथ ही नए मरीजों की संख्या में भी जबरदस्त उछाल आया है। हर दिन करीब 2500 नए मरीज सामने आ रहे हैं। वैक्सीन की गैरमौजूदगी में अभी डॉक्टरों के पास इस संख्या को कम करने का कोई तरीका भी नहीं है। हालांकि, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने उम्मीद जगाई है। उन्होंने कहा है कि देश में अब आयुर्वेद से जुड़ी दवाओं का ट्रायल होगा। इसे स्वास्थ्यकर्मियों और कोरोना के खिलाफ जंग में जुटे लोगों पर ट्राय किया जाएगा और देखा जाएगा कि इन दवाओं का क्या असर है।

स्वास्थ्य मंत्री ने गुरुवार को कहा, “जिस प्रकार से कोविड-19 के प्रति सारी दुनिया में एक तरह की जंग छिड़ी है। ऐसे में भारत में एक ऐतिहासिक काम शुरू हुआ है। भारत का आयुष मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले CSIR, इन तीनो संस्थाओं को मिलाकर आईसीएमआर के टेक्निकल सपोर्ट के साथ आयुष की कुछ दवाइयां, जैसे अश्वगंधा है, यष्टिमधु है, गुडुची पिप्पाली है या आयुष-64 है। इन दवाओं के बारे में आज व्यापक क्लिनिकल ट्रायल शुरू हो रहे हैं।

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डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा, “यह ट्रायल उन लोगों पर होंगे जो हेल्थ वर्कर्स हैं, जो हाई-रिस्क एरिया में काम कर रहे हैं या समाज के अंदर वे लोग जो कोरोना मरीजों के संपर्क में हैं, उसके कारण खतरे में हैं। उन सबके ऊपर प्रोफाइल एक्सेस की दृष्टि से कोरोना बीमारी के खिलाफ लड़ने में क्या किरदार हो सकता है। ट्रायल से यही जानने की कोशिश की जाएगी।”

गौरतलब है कि भारत में अभी 6 फर्म्स कोरोनावायरस के खिलाफ वैक्सीन बनाने में जुटी हैं। इनमें एक है सेरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, जो वैक्सीन की डोज बनाने और बेचने में दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन कंपनी है। हर साल इस कंपनी में 1.5 अरब डोज बनती हैं। यह कंपनी अमेरिका की कोडाजेनिक्स बायोटेक कंपनी के साथ कोरोना की वैक्सीन बनाने में जुटी है। सेरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया सितंबर तक ह्यूमन ट्रायल शुरू कर सकती है।

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इसके अलावा भारत की हैदराबाद की भारत बायोटेक ने भी अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन मैडिसन और फ्लूजेन फर्म के साथ 3 करोड़ वैक्सीन बनाने के लिए रिसर्च में जुटी है। वहीं भारत की जायडस कैडिला कंपनी एक साथ दो वैक्सीन पर काम कर रही है। इसके अलावा दवा बनाने वाली कंपनी बायलॉजिकल ई, इंडियन इम्यूनोलॉजिक्स और मिनवैक्स भी एक-एक वैक्सीन बनाने की होड़ में जुटी हैं।

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