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कोरोना पर हेल्थ एक्सपर्ट्स ने किया साफ- शुरू हो चुका है कम्युनिटी ट्रांसमिशन, महामारी रोकने में विशेषज्ञों से नहीं लिए गए सुझाव

जिन एक्सपर्ट्स की टीम ने यह दावा किया है उनमें AIIMS और ICMR के हेल्थ एक्सपर्ट्स भी शामिल हैं।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: June 1, 2020 8:04 PM
COVID-19देश में कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ने के साथ रिकवरी रेट भी सुधरा है। (PTI Photo)

देश में कोरोनावायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अब तक भारत में कोरोना के केस 1 लाख 91 हजार का आंकड़ा पार कर चुके हैं। पिछले एक ही दिन में भारत ने कोरोना के केसों में जर्मनी और फ्रांस दोनों को पीछे छोड़ दिया। इनमें से आधे केस लॉकडाउन 4.0 के दौरान ही आए हैं। इस बीच कई रिपोर्ट्स में कहा गया कि भारत में चौथे फेज के दौरान कम्युनिटी ट्रांसमिशन के मामले शुरू हो गए हैं। हालांकि, इस पर सरकार की तरफ से कुछ भी साफ नहीं किया गया। इस बीच अब हेल्थ एक्सपर्ट्स की एक टीम ने दावा किया है कि देश के कुछ हिस्सों में कम्युनिटी ट्रांसमिशन तेजी से फैल रहा है।

जिस टीम ने इस बात का खुलासा किया है कि उनमें ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (AIIMS) के हेल्थ एक्सपर्ट्स और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के दो रिसर्चर्स शामिल हैं। इस टीम का कहना है कि देश में कुछ बड़े वर्गों और अलग-अलग इलाकों में रहने वाली जनसंख्या (सब-पॉपुलेशन) में फैलना शुरू हो गया। एक्सपर्ट्स ने दावा किया कि इस महामारी के खिलाफ कदम उठाने पर महामारी विशेषज्ञों की (एपिडेमियोलॉजिस्ट) की राय नहीं ली गई।

इस रिपोर्ट को सामने लाने वाली टीम में एम्स और आईसीएमआर के एक्सपर्ट्स के अलावा इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन, (IPHA), इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन, (IAPSM) और इंडियन एसोसिएशन ऑफ एपिडेमियोलॉजिस्ट (IAE) के एक्स्पर्ट्स भी शामिल हैं। इस रिपोर्ट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपा जा चुका है।

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रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने कहा है कि इस समय यह मानना काफी मुश्किल है कि कोरोनावायरस महामारी को इस स्टेज में ही खत्म किया जा सकता है। खासकर तब जब कम्युनिटी ट्रांसमिशन अलग-अलग क्षेत्र में आबादियों में फैल चुका है। देश में लगे कड़े लॉकडाउन का एक फायदा यह हुआ कि इससे कोरोना के फैलने का समय बढ़ गया, जिससे इसके कर्व को फ्लैट किया जा सके और हेल्थकेयर सिस्टम पर अचानक ज्यादा बोझ न पड़े।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ऐसा लगता है कि चौथे लॉकडाउन के खत्म होने तक इस लक्ष्य को पा लिया गया है। हालांकि, इस दौरान अर्थव्यवस्था और आम जनता के जीवन में काफी परेशानियां आई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 25 मार्च से 31 मई तक लगा लॉकडाउन काफी कड़ा था, लेकिन फिर भी कोरोना के केस 25 मार्च को 606 से लेकर 24 मई को 1,38,845 तक पहुंच गए। यानी नए केस लगातार और काफी तेजी से बढ़े।

रिपोर्ट तैयार करने वाली टीम में कौन से बड़े नाम?: 16 सदस्यी कोविड टास्क फोर्स में IAPSM के पूर्व अध्यक्ष डॉक्टर शशिकांत और एम्स के हेड ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन डॉक्टर संजय के भी शामिल हैं। इसके अलावा डॉक्टर डीसीएस रेड्डी (बीएचयू, वाराणसी में कम्युनिटी मेडिसिन के पूर्व प्रमुख) और राजेश कुमार (पूर्व प्रोफेसर और चंडीगढ़ पीजीआई में कम्युनिटी मेडिसिन के पूर्व प्रमुख) शामिल हैं। डॉक्टर रेड्डी और डॉक्टर कांत इस वक्त महामारी पर शोध करने वाले आईसीएमआर के समूह में शामिल हैं।

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