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दिल्लीः फोन में बजने वाले मैसेज पर HC की केंद्र को फटकार, कहा- वैक्सीन हैं ही नहीं तो लगवाएगा कौन

कोर्ट ने सरकार को उस फोन संदेश पर आड़े हाथ लिया जिसमें लोगों से वैक्सीन लगवाने की अपील की जा रही है। जब भी कोई व्यक्ति किसी को फोन करे पहले ये अपील उसे सुननी ही पड़ती है।

कोविड वैक्सीन (फाइल फोटो)

केंद्र की हरकतों से आजिज आ चुके दिल्ली हाईकोर्ट के सब्र का पैमाना गुरुवार को फिर से छलक पड़ा। कोर्ट ने सरकार को उस फोन संदेश पर आड़े हाथ लिया जिसमें लोगों से वैक्सीन लगवाने की अपील की जा रही है। जब भी कोई व्यक्ति किसी को फोन करे पहले ये अपील उसे सुननी ही पड़ती है।

हाईकोर्ट ने केंद्र को फटकार लगाते हुए पूछा कि इस संदेश का क्या मतलब है। सरकार के पास वैक्सीन है ही नहीं, लेकिन लोगों को लगातार कहा जा रहा है कि वैक्सीन लगवाए। कोर्ट का सवाल था कि जब वैक्सीन है ही नहीं तो लगवाएगा कौन। बिफरे कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ये मैसेज लोगों को परेशान कर रहा है। एक तरफ लोग कोरोना से मर रहे हैं और सरकार कुछ नहीं कर पा रही वहीं दूसरी तरफ फोन मैसेज के जरिए उनके जख्मों पर नमक छिड़का जा रहा है।

कोरोना काल यानि आफत काल। न तो दवाएं हैं और न ही ऑक्सिजन। खुद को विश्व गुरु बताने वाली सरकार को ये भी नहीं पता कि खतरनाक वायरस की मार से जूझ रहे लोगों को कैसे रक्षा कवच प्रदान किया जाए। कुछ अर्सा पहले तक दानवीर कर्ण की तरह से दूसरों को वैक्सीन दे रही मोदी सरकार माथे पर हाथ रखे बैठी है।

लेकिन इन सबसे बीच सरकार की खुद को शाबाशी देने की आदत पहले की तरह से बरकरार है। सटीक शब्दों में कहें तो सरकार अपनी नाकामियों को उपलब्धियां बताने की दिशा में ज्यादा मुखऱ हो गई है। कोई कमी है तो दूसरों पर ठीकरा। अगर फिर भी बात न बने तो सरकार के नुमाइंदे 70 साल का लेखाजोखा जनता को बताने लगते हैं। पर उनके पास कोरोना से लड़ाई के मामले में कोई जवाब नहीं।

आलम ये है कि सरकार के पास किसी की बात का कोई जवाब नहीं है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी आज तंज करते हुए कहा- न तो ऑक्सिजन है और न ही दवाएं। वैक्सीन का तो अता पता भी नहीं है। अगर कुछ है तो केवल सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट और मोदी की फोटो। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट भी सरकार को लगातार फटकार लगा रहा है। दूसरे सूबों के हाईकोर्ट तो लगातार तल्ख हो रहे हैं। लेकिन सरकार खुद में खोई है। सरकार के नुमाइंदे लोगों को पॉजिटिव रहने के नुस्खे बता रहे हैं। उनका कहना है कि मौतौं की तरफ न देखो। ये समझो कि केवल पांच फीसदी लोग ही गंभीर रूप से बीमार हैं।

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