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हरियाणा: जाट और पांच समुदायों के आरक्षण पर हाई कोर्ट की रोक

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा नई बनाई गई पिछड़ा वर्ग (सी) श्रेणी के तहत जाटों और पांच अन्य समुदायों को दिए गए आरक्षण पर रोक लगा दी है।

Author चंडीगढ़ | May 27, 2016 12:03 AM
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा नई बनाई गई पिछड़ा वर्ग (सी) श्रेणी के तहत जाटों और पांच अन्य समुदायों को दिए गए आरक्षण पर रोक लगा दी है।

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा नई बनाई गई पिछड़ा वर्ग (सी) श्रेणी के तहत जाटों और पांच अन्य समुदायों को दिए गए आरक्षण पर रोक लगा दी है। अदालत ने यह आदेश गुरुवार को हरियाणा पिछड़ा वर्ग (नौकरियों और शिक्षण संस्थाओं में दाखिले में आरक्षण) अधिनियम 2016 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। इस कानून को 29 मार्च को राज्य विधानसभा ने सर्वसम्मति से पारित किया था।

न्यायाधीश एसएस सरोन की अध्यक्षता वाले पीठ ने अंतरिम आदेश पारित किया। इस कानून को भिवानी के मुरारी लाल गुप्ता ने चुनौती दी है, जिन्होंने अधिनियम के ‘सी’ खंड को रद्द करने के लिए आदेश की मांग की थी जो नई बनाई गई पिछड़ा वर्ग (सी) श्रेणी के तहत जाट समुदाय को आरक्षण देता है। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि नए कानून के तहत जाटों को जो आरक्षण दिया गया है वह न्यायाधीश केसी गुप्ता आयोग की रिपोर्ट के आधार पर है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय पहले ही खारिज कर चुका है।

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि गुप्ता आयोग की रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण देना न्यायिक आदेश में संशोधन के समान है जो विधानसभा नहीं कर सकती है। वकील के मुताबिक, सिर्फ न्यायपालिका ही उस मुद्दे में संशोधन कर सकती है जिस पर पहले ही आदेश आ चुका है। याचिका में कहा गया है कि 2014 में भी राज्य सरकार जाटों को नौकरियों और बाकी शिक्षण संस्थाओं में आरक्षण के वास्ते, जाटों को अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल करने के लिए ऐसा ही विधेयक लाई थी।

बहरहाल, सर्वोच्च न्यायालय ने राम सिंह और अन्य बनाम भारत संघ के मामले में अपनी व्यवस्था में कहा था कि जाट सामाजिक, शैक्षिक और राजनीतिक तौर पर पिछड़े हुए नहीं हैं। नया कानून जाट और पांच अन्य समुदायों को पिछड़ा वर्ग (सी) श्रेणी के तहत आरक्षण देता है।
पांच अन्य समुदायों में जाट सिख, मुस्लिम जाट, बिश्नोई, रोर और त्यागी शामिल है। इन्हें सरकारी सेवाओं और शिक्षण संस्थानों में दाखिले में 10 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पहले हाई कोर्ट के न्यायाधीश महेश ग्रोवर की अध्यक्षता वालए पीठ के समक्ष आई थी। मामले पर विचार करते हुए पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए मुद्दे पर फैसला पीआइएल पीठ को करना चाहिए।
गौरतलब है कि हरियाणा में आरक्षण की मांग को लेकर जाट समुदाय ने हिंसक आंदोलन किया था। इसके आगे झुकते हुए प्रदेश सरकार ने उन्हें आरक्षण का एलान किया था और इसके लिए एक कानून को 29 मार्च को राज्य विधानसभा ने सर्वसम्मति से पारित किया था। सरकार के इस एलान के बाद जाट मान तो गए थे, लेकिन इस समुदाय के नेताओं ने चेतावनी दे रखी है कि अगर कानून पर अमल नहीं हुआ तो वे आंदोलन को नए सिरे से छेड़ सकते हैं।

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