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वीरभद्र को गिरफ्तारी और पूछताछ से रोकने वाले जज पहले उनके वकील थे: सीबीआइ

केंद्रीय जांच ब्यूरो ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में बताया कि हाईकोर्ट के जिस जज ने जांच एजंसी को एक मामले में हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की गिरफ्तारी और पूछताछ से रोका वह उनके (सिंह के) वकील रह चुके हैं।

Author , नई दिल्ली | October 27, 2015 10:33 AM
केंद्रीय जांच ब्यूरो ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में बताया कि हाईकोर्ट के जिस जज ने जांच एजंसी को एक मामले में हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की गिरफ्तारी और पूछताछ से रोका वह उनके (सिंह के) वकील रह चुके हैं। (फोटो: ललित कुमार)

केंद्रीय जांच ब्यूरो ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में बताया कि हाईकोर्ट के जिस जज ने जांच एजंसी को एक मामले में हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की गिरफ्तारी और पूछताछ से रोका वह उनके (सिंह के) वकील रह चुके हैं। हितों के टकराव के बारे में सीबीआइ की ओर से लगाए गए आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एफएमआइ कलीफुल्ला और उदय यू ललित ने नोटिस जारी किया और वीरभद्र सिंह और उनकी पत्नी से पूछा कि हिरासत में लेकर पूछताछ करने की सीबीआइ की अर्जी पर क्यों न सुनवाई की जाए।

इससे पहले सीबीआइ की ओर से पेश हुए एटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने दावा किया कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने एक अन्य मामले में सुनवाई से मना कर दिया था क्यों कि वे अतीत में एक मामले में उनके वकील रह चुके थे। मुकुल रोहतगी ने इस तथ्य का भी जिक्र किया कि जज ने एक बार वीरभद्र सिंह के एक मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। लेकिन बाद में एक अन्य मामले की सुनवाई की और उन्हें राहत भी प्रदान की। इस पर न्यायमूर्ति कलीफुल्ला और न्यायमूर्ति उदय यू ललित के पीठ ने टिप्पणी की, अगर आप एक मामले की सुनवाई नहीं करना चाहते हैं तो फिर दूसरे मामले की भी सुनवाई मत कीजिए। ऐसा करने के लिए एक सर्वमान्य परंपरा होनी चाहिए।

न्यायालय सीबीआइ की दो याचिकाओं की सुनवाई कर रहा था। इनमें से एक याचिका में जांच एजंसी ने सिंह से संबंधित याचिका हिमाचल प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है जबकि दूसरी याचिका में हाईकोर्ट का आदेश निरस्त करने का आग्रह किया गया है। रोहतगी ने हाईकोर्ट के आदेश की आलोचना करते हुए इसे निलंबित करने और मामले को दिल्ली स्थानांतरित करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि एक न्यायाधीश, जिसने एक बार सिंह से संबंधित मामले की सुनवाई से खुद को अलग किया था, बाद में उसने मौजूदा मामले की सुनवाई की। यह भी तथ्य है कि आरोपी मुख्यमंत्री है और दूसरी ओर दिल्ली हाईकोर्ट मामले की निगरानी कर रहा है।

उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश के अंश का हवाला देते हुए कहा कि इसमें गिरफ्तारी से राहत और अदालत की पूर्व अनुमति के बगैर आरोपी से पूछताछ नहीं करने का आदेश देकर एक तरह से जांच प्रक्रिया ही रोक दी है। अटार्नी जनरल ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री को गिरफ्तार करने से सीबीआइ को रोक ही नहीं दिया बल्कि उसकी अनुमति से ही आरोप पत्र दाखिल करने की शर्त भी लगा दी।

रोहतगी ने कहा, अगर जांच एजंसी दंड प्रक्रिया सहिता के तहत आय से अधिक संपत्ति के मामले में आरोपी से पूछताछ नहीं करेगी तो फिर वह क्या करेगी। यह मेरा वैधानिक कर्त्तव्य है। उन्होंने कहा कि 26 पेज का अंतरिम आदेश पहले दिन की सुनवाई पर ही पारित कर दिया। उन्होंने कहा, यह कार्यवाही पूर्वग्रह से प्रभावित है। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और पी चिदंबरम ने अटार्नी जनरल की दलीलों का विरोध किया और कहा कि समाचार पत्र की खबर के बजाय हाईकोर्ट के पहले के आदेश को ध्यान से पढ़ना चाहिए।

सिब्बल ने एक बार कहा कि न्यायाधीश ने क्रिकेट स्टेडियम से संबंधित मामले की सुनवाई से खुद को अलग किया था, न कि भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत दर्ज मामले से। रोहतगी ने इस दलील का विरोध किया। हाईकोर्ट ने एक अक्तूबर को सीबीआइ को सिंह और उनकी पत्नी को गिरफ्तार करने से रोक दिया था, परंतु उसे इस मामले में जांच जारी रखने की अनुमति दे दी थी। अदालत ने सिंह दंपति से पूछताछ करने से पहले अदालत को सूचित करने का निर्देश सीबीआइ को दिया था।

मुख्यमंत्री ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दलील दी थी कि सीबीआइ ने दुराग्रह और राजनीतिक प्रतिशोध के साथ उनके निजी और अन्य परिसरों पर छापे मारे थे। वीरभद्र सिंह ने भ्रष्टाचार निवारण कानून और भारतीय दंड संहिता के प्रावधान के तहत दर्ज प्राथमिकी निरस्त करने का अनुरोध किया था। दिल्ली हाईकोर्ट भी गैर सरकारी संगठन कामन काज की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है।

इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि सिंह ने बगैर हिसाब-किताब की करीब पांच करोड़ रुपए की राशि प्राप्त की थी। याचिका में उनके 2009-10, 2010-11 और 2011-12 के संशोधित आयकर रिटर्न का भी हवाला दिया गया है और दावा किया गया है कि इससे पता चलता है कि सिंह की कृषि आमदनी में 6.10 करोड़ रुपए की वृद्धि हुई है।

आयकर विभाग ने इतवार को हाईकोर्ट में दायर अपनी स्थिति रिपोर्ट में दलील दी थी कि उसे मामले की जांच का अधिकार है क्योंकि विवादों में आई संपति राष्ट्रीय राजधानी में स्थित है।

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