अरुणाचल प्रदेश में सेना की अदालत ने एक हवलदार को अग्निवीर पर यौन उत्पीड़न के आरोपों से बरी कर दिया है। अग्निवीर के साथ 18 सिख लाइट इन्फैंट्री (SIKH LI) में सेवारत हवलदार पर 46 इन्फैंट्री ब्रिगेड के आदेशानुसार जिला कोर्ट मार्शल (DCM) द्वारा मुकदमा चलाया गया। हवलदार पर एक अग्निवीर का यौन शोषण करने का आरोप था।

उन पर सेना अधिनियम की धारा 46 (a) के तहत आरोप लगाया गया था, जो अस्वाभाविक और अपमानजनक आचरण से संबंधित है। आरोप है कि 1 दिसंबर 2023 को रात करीब 8.30 बजे हवलदार ने उसी यूनिट के अग्निवीर को आवास के बाथरूम में ले जाकर उसके साथ गलत व्यवहार किया।

अरुणाचल प्रदेश के न्युकमाडुंग में जून 2025 में मुकदमा शुरू हुआ और 30 जुलाई 2025 को उन्हें आरोपों से बरी कर दिया गया। हालांकि, नवंबर 2025 में कोर्ट मार्शल के संयोजक प्राधिकारी ने फैसले पर पुनर्विचार का आदेश दिया। पुनर्विचार के बाद कोर्ट मार्शल ने 26 फरवरी 2026 को दिए गए अपने फैसले में हवलदार को फिर से आरोपों से बरी कर दिया।

अग्निवीर ने हवलदार पर लगाया यौन शोषण का आरोप

जांच के दौरान यह बात सामने आई कि पहले बैच के अग्निवीर सितंबर 2023 के मध्य में 18 सिख एलआई यूनिट में आए थे और लगभग डेढ़ महीने से कैडर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे थे। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सभी अग्निवीरों को नवंबर 2023 के पहले सप्ताह में उनकी संबंधित कंपनियों में तैनात कर दिया गया था। अग्निवीर को एक विशेष कंपनी में भेजा गया और कंपनी में आते ही उसने कथित तौर पर अपने सहकर्मी से शिकायत करना शुरू कर दिया कि कंपनी बहुत सख्त है और यहां अग्निवीरों की संख्या कम है इसलिए काम का दबाव बहुत अधिक होगा। आरोप यह भी था कि पहले ही दिन से उसने कंपनी बदलने की इच्छा ज़ाहिर करना शुरू कर दिया था।

हवलदार को सेना की अदालत ने किया बरी

अभियोजन पक्ष का आरोप था कि हवलदार 1 दिसंबर 2023 की रात को कथित पीड़ित के बैरक में आया, उसे स्टोर का सामान स्थानांतरित करने के लिए अपने साथ चलने को कहा और फिर उसे बाथरूम में ले जाकर उसका यौन उत्पीड़न किया। वहीं, बचाव पक्ष का तर्क था कि आरोपी कभी अपनी बैरक से बाहर नहीं निकला इसलिए कथित पीड़िता को बाथरूम ले जाकर अपराध करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। कथित पीड़िता की बैरक में मौजूद अग्निवीर समेत अन्य सैनिकों से अदालत में पूछताछ की गई और उन्होंने गवाही दी कि आरोपी कभी बैरक में नहीं आया और न ही उसने कथित पीड़िता को अपने साथ ले गया।

इसके अलावा, इस अवधि के दौरान कथित पीड़ित के बैरक में एक लंबी दूरी की गश्ती (एलआरपी) निरीक्षण चल रहा था और एलआरपी कमांडर द्वारा एलआरपी निरीक्षण और ब्रीफिंग किए जाने के दौरान पीड़ित सहित सभी व्यक्ति अंदर मौजूद थे। आरोपी हवलदार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील अक्षत आनंद ने कहा कि यह एक अनूठा मामला है, खासकर वर्तमान संदर्भ में जहां झूठे आरोप लगाए जाने के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं।

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दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति मामले में AAP नेता अरविंद केरीवाल और मनीष सिसोदिया को बरी कर दिया। इसके बाद दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को राष्ट्रीय राजधानी में पार्टी समर्थकों की एक विशाल सभा को संबोधित किया। केजरीवाल के बरी होने के बाद यह उनकी पहली सभा थी। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें