हर साल जून और जुलाई में पंजाब के धान के खेतों में बिहार और उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर आते हैं। ये मजदूर धान की रोपाई के लिए पंजाब पहुंचते हैं और कुछ ही हफ्तों में इतनी कमाई कर लेते हैं, जितनी अपने गांव में महीनों तक मजदूरी करके भी नहीं कर पाते।
इस बार भी रोपाई के मौसम में हजारों प्रवासी मजदूर पंजाब पहुंचे हैं। लेकिन खेती के साथ-साथ इस बार एक नया ट्रेंड भी देखने को मिल रहा है। इंस्टाग्राम रील्स इन प्रवासी मजदूरों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं।
इस ट्रेंड के केंद्र में भोजपुरी लोकगीत ‘ए बूढ़ा बाबा पलक पलक दारी’ है। यह गीत बिहार में शादी-ब्याह के दौरान गाया जाता है, जहां दुल्हन पक्ष मजाकिया अंदाज में दूल्हे और उसके परिवार को छेड़ता है। मशहूर भोजपुरी और मैथिली गायिका शारदा सिन्हा ने इस गाने को अपनी आवाज दी थी। अब धान की रोपाई के इस सीजन में यही गाना फिर से ट्रेंड कर रहा है। इंस्टाग्राम पर इस गाने पर 84 हजार से ज्यादा रील्स बन चुकी हैं। इनमें ज्यादातर बिहार में शूट की गई हैं।
इस गाने में लंबे सफेद दाढ़ी वाले एक बुजुर्ग का जिक्र है। यह तस्वीर पंजाब के बुजुर्ग सिख किसानों से काफी मिलती-जुलती है। प्रवासी मजदूरों ने इसी समानता को देखते हुए खेतों में मिलने वाले बुजुर्ग सिख किसानों के साथ इस गाने पर रील्स बनानी शुरू कर दीं। देखते ही देखते यह ट्रेंड पंजाब और बिहार के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव की पहचान बन गया।
इस ट्रेंड को आगे बढ़ाने में धान की रोपाई करने वाली मजदूर और कंटेंट क्रिएटर अंजलि देवी की भी बड़ी भूमिका रही है। उनके इंस्टाग्राम पर करीब 4 हजार फॉलोअर्स हैं। पंजाब पहुंचने के बाद उन्होंने दो सफेद दाढ़ी वाले बुजुर्ग पंजाबी किसानों के साथ इस गाने पर एक रील बनाई। इस वीडियो को 8 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है।
अंजलि देवी ने पंजाबी गाने ‘आई कदी तेनू पंजाब दिखावांगे’ पर भी एक रील बनाई। यह वीडियो खेत में चाय के ब्रेक के दौरान शूट किया गया था। इसे भी 60 हजार से ज्यादा बार देखा जा चुका है।
सिर्फ अंजलि देवी ही नहीं, मनु मधु कौर भी इस ट्रेंड का हिस्सा हैं। उन्होंने बिहार में व्लॉगिंग शुरू की थी। शादी के बाद वह पंजाब में बस गईं और अपने नाम के साथ ‘कौर’ जोड़ लिया। उनके इंस्टाग्राम पर करीब 1,200 फॉलोअर्स हैं, लेकिन उनके वीडियो लाखों लोगों तक पहुंच रहे हैं।
इस ट्रेंड में पुरुष मजदूर भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। कई मजदूर खेतों में मिलने वाले ‘बूढ़ा बाबा’ के साथ वीडियो बनाते हैं। कई बुजुर्ग किसान भी खुशी-खुशी कैमरे के सामने अभिनय करते नजर आते हैं। एक अन्य कंटेंट क्रिएटर सदा अनिल ने भी इस गाने का अपना संस्करण बनाया है, जिसे करीब 10 लाख बार देखा जा चुका है।
ये वीडियो सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं हैं। इनके जरिए सोशल मीडिया पर लाखों लोग प्रवासी मजदूरों की उस दुनिया को देख रहे हैं, जिसके बारे में पहले बहुत कम लोग जानते थे। इन वीडियो में मेहनत, दोस्ती, हंसी-मजाक और सांस्कृतिक मेलजोल की खूबसूरत झलक दिखाई देती है।
‘बूढ़ा बाबा’ ट्रेंड के अलावा एक और रील सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इसमें बिहार और उत्तर प्रदेश के प्रवासी मजदूरों के बीच धान की रोपाई का दोस्ताना मुकाबला दिखाया गया है।
एक वायरल वीडियो में दोनों राज्यों के मजदूर यह मुकाबला करते नजर आते हैं कि कौन पहले एक एकड़ खेत में धान की रोपाई पूरी करेगा। इस प्रतियोगिता को देखने के लिए करीब 200 पंजाबी लोग खेत के किनारे खड़े होकर उनका उत्साह बढ़ाते नजर आते हैं।
यह मुकाबला सिर्फ कैमरे के लिए नहीं होता। मजदूरों की कमाई उनकी रफ्तार पर निर्भर करती है। आमतौर पर धान की रोपाई के लिए एक टीम को प्रति एकड़ करीब 4,500 रुपये मिलते हैं, जिसे सभी मजदूर आपस में बांट लेते हैं।
इन मजदूरों का दिन सुबह 4 बजे शुरू हो जाता है, ताकि दोपहर की तेज गर्मी से बचा जा सके। पूरे दिन कड़ी मेहनत के बाद उनके पास मनोरंजन का बहुत कम समय बचता है। शायद यही वजह है कि रील्स बनाने का यह ट्रेंड उनके बीच इतना लोकप्रिय हो गया है।
बिहार से हर साल पंजाब आने वाले मजदूर राम प्रकाश के लिए यह सीजन बहुत अहम होता है। गांव में वह रोजाना मजदूरी करके परिवार का खर्च चलाते हैं। लेकिन पंजाब आकर सिर्फ एक-दो महीने में 50 हजार से 75 हजार रुपये तक कमा लेते हैं। इसी पैसे से वह घर बनवाने और परिवार की दूसरी जरूरतें पूरी करते हैं।
मजदूर ऋषभ यादव कहते हैं, “मैं भी रील बनाता हूं, लेकिन अभी उतना लोकप्रिय नहीं हो पाया हूं। अब बहुत कुछ बदल गया है। लगभग हर मजदूर के पास स्मार्टफोन है। पूरे दिन धान की रोपाई करने के बाद रात में हम वीडियो देखते और रील्स बनाते हैं।
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