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Whatsapp पर BJP का कब्जा? राहुल गांधी ने US मीडिया की खबर साझा कर PM नरेंद्र मोदी पर कसा तंज

राहुल ने जो रिपोर्ट शेयर की, उसका शीर्षक है- Facebook’s Ties to India’s Ruling Party Complicate Its Fight Against Hate Speech। बिली पेरिगो द्वारा लिखे गए इस आर्टिकल में बताया गया कि कैसे Facebook हेट स्पीच चेक करने में विफल रहा।

Rahul Gandhi, Congress, INC, WhatsApp-BJP Nexus, BJP, Narendra Modiकांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी। (फाइल फोटो)

पूर्व Congress चीफ राहुल गांधी ने Facebook की सोशल मैसेजिंग ऐप Whatsapp को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और BJP पर तंज कसा है। शनिवार को उन्होंने अमेरिकी मीडिया की एक खबर साझा करते कहा कि यह रिपोर्ट बीजेपी और वॉट्सऐप के नेक्सस का खुलासा करती है।

खबर शेयर करते हुए उन्होंने ट्वीट किया, “अमेरिका की TIME मैग्जीन WhatsApp-BJP के गठजोड़ को बेनकाब करती है। 40 करोड़ भारतीय इसे इस्तेमाल करते हैं। वॉट्सएप चाहता है कि उसे पेमेंट्स करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाए, जिसके लिए पीएम मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार की मंजूरी की जरूरत है। इस प्रकार, वॉट्सएप पर बीजेपी की पकड़ है।”

राहुल ने जो रिपोर्ट शेयर की, उसका शीर्षक है- Facebook’s Ties to India’s Ruling Party Complicate Its Fight Against Hate Speech। बिली पेरिगो द्वारा लिखे गए इस आर्टिकल में बताया गया कि कैसे Facebook हेट स्पीच चेक करने में विफल रहा, जिसमें कुछ बीजेपी नेताओं के बयान भी थे, जिन्होंने भड़काऊ भाषण देकर सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म के निर्धारित प्रोटोकॉल्स का उल्लंघन किया।

इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कैसे फेसबुक इंडिया का एक टॉप अधिकारी उस मीटिंग के बीच से उठकर चला गया था, जिसमें बीजेपी नेता के एक पोस्ट का जिक्र हुआ था। कहा गया कि नेता के उस एफबी पोस्ट ने कंपनी के हेट स्पीच नियमों का उल्लंघन किया था।

‘टाइम’ की खबर में यह भी कहा गया कि भारत फेसबुक का सबसे बड़ा मार्केट है। यहां 328 मिलियन यूजर्स सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर हैं, जबकि 400 मिलियन भारत फेसबुक की मैसेजिंग सेवा वॉट्सएप चलाते हैं। ये प्लैटफॉर्म्स भारतीय राजनीति में खास तौर से काफी अहमियत रखते हैं।

2014 के आम चुनाव के बाद अंखी दास (Ankhi Das) ने ‘QUARTZ’ के लिए एक ओपेड आर्टिकल लिखा था, जिसमें उन्होंने तर्क दिया था कि नरेंद्र मोदी ने अपने अभियान में फेसबुक का लाभ उठाने के तरीके के कारण जीत हासिल की थी।

हालांकि, इन दोनों ही सोशल प्लैटफॉर्म्स को नफरत और गलत सूचनाएं फैलाने के लिए भी इस्तेमाल किया गया। नतीजतन कई जगह अल्पसंख्यकों पर हमले हुए और देश भर में सांप्रदायिक तनाव की घटनाएं बढ़ीं।

खबर में यह भी बताया गया कि फेसबुक और रिलायंस जियो के बीच हुई एक डील की घोषणा के बाद वॉट्सएप पे और जियो के नेटवर्क को मर्ज करने पर भी विचार-विमर्श हुआ था। मगर वॉट्सएप का भविष्य इस बात पर भी निर्भर करता है कि उसे नेशनल पेमेंट्स रेग्युलेटर से इसके लिए अनुमति मिलती है या नहीं। यह अभी तक पेडिंग है।

टाइम की रिपोर्ट में इंडस्ट्री एनालिस्ट फर्म काउंटरप्वॉइंट रिसर्च के वीपी नील शाह के हवाले से कहा गया- अब फेसबुक के लिए यह मंजूरी हासिल करना आसान होगा, क्योंकि उसकी ओर अंबानी जो होंगे।

The Billionaire Raj के लेखक जेम्स क्रैबट्री ने अमेरिकी मीडिया को बताया कि फेसबुक भारत सरकार के अच्छे संबंध रखना चाहेगा और उन चीजों को करने के बारे में दो बार सोच सकता है, जो उसे सरकार विरोधी बना सकती है।

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