जम्मू कश्मीर में अक्सर भाजपा को शिकायत रहती थी कि फंड देने में जम्मू के साथ भेदभाव किया जाता है। भाजपा लंबे समय में इसी मुद्दे को उठा को अपनी राजनीति कर रही थी, लेकिन इस बार के वित्तीय वर्ष के आंकड़ों ने यह शिकायत दूर कर दी। जम्मू कश्मीर विधानसभा में उमर अब्दुल्ला सरकार ने 2026-27 वित्तीय वर्ष के आंकड़े पेश किया, जिसमें बताया गया कि कश्मीर के 10 जिलों के मुकाबले जम्मू के 10 जिलों को अधिक फंड मिले।

केंद्रशासित प्रदेश में कुल 9566.30 करोड़ रुपये के कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) आवंटन में से 5102.25 करोड़ रुपये के लिए और 4464.05 करोड़ रुपये कश्मीर के लिए आवंटित किए गए थे। इसमें 5837.91 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जिसमें से 3292.93 करोड़ रुपये जम्मू और 2544.98 करोड़ रुपये कश्मीर को दिए गए हैं।

जम्मू और श्रीनगर जिलों को मिला अधिक फंड

दोनों प्रांतों में जम्मू और श्रीनगर जिलों को सबसे अधिक फंड मिला है। जम्मू जिले के लिए 2314.35 करोड़ रुपये का फंड तय किया गया, जो श्रीनगर के 1486.88 करोड़ रुपये के फंड से करीब दोगुना है।

जम्मू प्रांत में राजौरी को 419.14 करोड़ रुपये के साथ दूसरा सबसे अधिक फंड मिला है, इसके बाद पुंछ (400.08 करोड़ रुपये), कठुआ (377.78 करोड़ रुपये), उधमपुर (361.95 करोड़ रुपये), डोडा (318.42 करोड़ रुपये), रियासी (249.34 करोड़ रुपये), किश्तवाड़ (242.93 करोड़ रुपये), सांबा (211 करोड़ रुपये) और रामबन (197.20 करोड़ रुपये) का नंबर आता है। असल में, अकेले जम्मू जिले का हिस्सा इस डिवीजन के अनुमानित कैपेक्स (Capex) आवंटन का लगभग आधा है।

कश्मीर को कितना मिला?

कश्मीर में, अनंतनाग को सबसे अधिक 697.05 करोड़ रुपये का फंड मिला है। इसके अलावा, बारामूला (468.93 करोड़ रुपये), पुलवामा (448.30 करोड़ रुपये), बडगाम (287.74 करोड़ रुपये), कुपवाड़ा (284.87 करोड़ रुपये), गांदरबल (247.18 करोड़ रुपये), बांदीपोरा (206.97 करोड़ रुपये), कुलगाम (184.24 करोड़ रुपये) और शोपियां का नंबर आता है, जिसे घाटी में सबसे कम 151.84 करोड़ रुपये का फंड दिया गया है।

‘असली बात बारीकियों में छिपी है’

अगर राजनीतिक नजरिए से गौर करें तो फंड का बंटवारा उम्मीद के मुताबिक नहीं किया गया। जम्मू जिले में सबसे अधिक कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) फंड दिया गया है। यहाँ की 11 विधानसभा सीटों में से 10 पर भाजपा के विधायक हैं और एक सीट पर निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा हैं, जो उमर अब्दुल्ला सरकार में मंत्री भी हैं।

श्रीनगर जिले को कश्मीर प्रांत में सबसे अधिक फंड मिला है। यहाँ की आठ विधानसभा सीटों में से 7 पर सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के विधायक हैं और एक सीट पर कांग्रेस का विधायक है।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला गांदरबल जिले की दो विधानसभा सीटों में से एक से विधायक हैं; इस जिले के लिए 247.18 करोड़ रुपये दिए गए।

भाजपा ने निष्कर्ष से बचने की सलाह दी

जम्मू (खासकर जम्मू, सांबा और कठुआ के मैदानी जिलों) को संसाधन आवंटित करने के बारे में भाजपा के दावों के संदर्भ में जब इन आंकड़ों के बारे में पूछा गया, तो भाजपा प्रवक्ता अंकुर शर्मा ने कहा कि पार्टी के पास जिलेवार आवंटन का विवरण नहीं है और उन्होंने कुल आंकड़ों के आधार पर कोई निष्कर्ष निकालने से बचने की सलाह दी।

उन्होंने कहा, “कुछ भी कहने से पहले इन बजटीय आवंटनों के उप-वर्गीकरण को देखना होगा। हो सकता है कि जम्मू डिवीजन के लिए आवंटन इसलिए अधिक हो क्योंकि वहाँ पनबिजली परियोजनाओं के लिए आवंटन किया गया है। असली बात बारीकियों (डिटेल) में छिपी होती है।”

भाजपा के उधमपुर ईस्ट से विधायक आर.एस. पठानिया ने कहा कि पार्टी का मानना ​​है कि विकास के लिए फंड जम्मू बनाम कश्मीर की तुलना के बजाय विकास की जरूरतों के आधार पर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “जम्मू और उधमपुर के बीच बराबरी नहीं हो सकती। इसी तरह, जम्मू और राजौरी के बीच भी बराबरी नहीं हो सकती।” उन्होंने आगे कहा कि जम्मू को अधिक निवेश की जरूरत है क्योंकि इसका भौगोलिक दायरा भी बड़ा है और विकास की जरूरतें भी अधिक हैं।

आर.एस पठानिया ने कहा, “हम जम्मू और कश्मीर के बीच किसी लड़ाई में यकीन नहीं रखते। हम बस यह चाहते हैं कि फंड का बंटवारा तय मानदंडों के आधार पर हो और जम्मू को उसका हिस्सा मिले।”

क्या बोली नेशनल कॉन्फ्रेंस?

नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रांतीय अध्यक्ष रतन लाल गुप्ता ने भाजपा पर जम्मू के लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहा कि तथ्य और आंकड़े कुछ और ही कह रहे। रतन लाल गुप्ता ने आगे कहा, “श्रीनगर की तुलना में जम्मू शहर को भी अधिक फंड मिला है। भाजपा चाहे कुछ भी कहे, सच तो यह है कि उमर सरकार विकास के रास्ते पर सबको साथ लेकर चलने में यकीन रखती है। यह जाति, पंथ, धर्म या इलाके के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करती है।”

पावर सेक्टर को मिला सबसे बड़ा अधिक

जिलेवार आंकड़ों से पता चला कि फंड पाने वाले सेक्टरों में काफी अंतर है। जम्मू जिले में, मुख्य आवंटन में पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के लिए 417.51 ​​करोड़ रुपये, हाउसिंग और अर्बन डेवलपमेंट के लिए 359.58 करोड़ रुपये, एग्रीकल्चर प्रोडक्शन के लिए 279.94 करोड़ रुपये, पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट के लिए 219.83 करोड़ रुपये और एनिमल और शीप हसबेंडरी के लिए 195.94 करोड़ रुपये शामिल हैं।

श्रीनगर में, मुख्य आवंटनों में पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के लिए 238.59 करोड़ रुपये, हेल्थ और मेडिकल एजुकेशन के लिए 224.57 करोड़ रुपये, एग्रीकल्चर प्रोडक्शन के लिए 204.86 करोड़ रुपये, हाउसिंग और अर्बन डेवलपमेंट के लिए 152.04 करोड़ रुपये, एनिमल और शीप हसबेंडरी के लिए 119.09 करोड़ रुपये और इंडस्ट्रीज़ और कॉमर्स के लिए 115.69 करोड़ रुपये शामिल हैं।

दोनों प्रांत के दूसरे जिलों के लिए भी आवंटन पावर डेवलपमेंट और पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट को मिले हैं। हालांकि अनंतनाग में, टूरिज्म मुख्य सेक्टरों में से एक है, इसे 113.51 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

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