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गुरमीत राम रहीम की पैरोल की अर्जी पर बोले सीएम मनोहर लाल खट्टर- किसी को रोक नहीं सकते

बता दें कि रेप के दो मामलों और एक पत्रकार की हत्या मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद हरियाणा के रोहतक जिले के सुनरिया जेल में बंद राम रहीम ने सिरसा जिले में अपने खेतों की देखभाल के लिए 42 दिन के पैरोल का अनुरोध किया है।

Author नई दिल्ली | June 25, 2019 10:36 PM

बलात्कार व हत्या के मामलों में दोषी और डेरा सच्चा सौदा के मुखिया गुरमीत राम रहीम की पैरोल अर्जी पर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि वह इससे किसी को रोक नहीं सकते हैं। मंगलवार (25 जून, 2019) को उन्होंने पत्रकारों से कहा कि ऐसे मामलों में कई कानूनी प्रक्रियाएं होती हैं और अगर कोई व्यक्ति पैरोल का अधिकार रखता है, तो वह उसकी मांग कर सकता है। हम किसी को रोक नहीं सकते हैं। फिलहाल के लिए इस मसले (राम रहीम के पैरोल पर) पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। सीएम के मुताबिक, राम रहीम के पैरोल आवेदन पर निर्णय राज्य के हितों को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। सीएम ने ये बातें उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहीं, जिसमें इनेलो विधायक जाकिर हुसैन और परमिंदर ढुल भाजपा में शामिल हुए। ये पूछे जाने पर कि उस हालात में कौन जिम्मेदार होगा, जब अगर डेरा प्रमुख को पैरोल प्रदान करने पर हिंसा भड़क जाए, खट्टर बोले, ‘‘आप खुद ही निष्कर्ष निकाल रहे हैं, जैसे कोई निर्णय कर लिया गया है।’’

बलात्कार के दो मामलों और एक पत्रकार की हत्या मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद हरियाणा के रोहतक जिले के सुनरिया जेल में बंद राम रहीम ने सिरसा जिले में अपने खेतों की देखभाल के लिए 42 दिन के पैरोल का अनुरोध किया है। 51 वर्षीय राम रहीम डेरा अनुयाई रंजीत सिंह की हत्या मामले में भी सुनवाई का सामना कर रहा है। साथ ही उस पर अनुयायियों को नपुंसक बनाने का भी एक मामला चल रहा है। राम रहीम को जेल अधीक्षक से एक अनुकूल रिपोर्ट मिली है जिन्होंने कहा कि उसका आचरण अच्छा है और उसने किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया है।

इससे पहले, दिन में सिरसा के उपायुक्त अशोक कुमार गर्ग ने कहा कि चीजें प्रक्रिया में हैं और राजस्व एवं पुलिस विभागों से रिपोर्ट मांगी गई हैं। गर्ग ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘अभी सिर्फ इतना कह सकता हूं कि चीजें प्रक्रिया में हैं।’’ सीएम ने कहा कि किसी भी पैरोल अर्जी में विधिक, प्रशासनिक और अन्य प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। उन्होंने कहा कि पैरोल की अर्जी जेल अधीक्षक के समक्ष दायर की जाती है जो उसे संबंधित उपायुक्त को अग्रेषित करता है। उसके बाद पुलिस अधीक्षक से एक रिपोर्ट मांगी जाती है और अंत में मंडल आयुक्त द्वारा सिफारिश की जाती है।

उन्होंने कहा कि मंडल आयुक्त की सिफारिश मिलने के बाद जरूरी होने पर सरकार अपनी भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘अगर सरकार की कोई भूमिका नहीं होगी, वह नहीं निभाएगी।’’ खट्टर बोले, ‘‘ऐसा निर्णय किया जाएगा जो कि राज्य के हित में हो। यदि हमें (सरकार) ऐसा कोई निर्णय करना हो जो कि राज्य के हित में नहीं हो तो वह नहीं किया जाएगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने (पैरोल मुद्दे पर) अभी तक तक कोई निर्णय नहीं किया है।’’ खट्टर ने कहा कि पैरोल मुद्दा डीसी..एसपी स्तर पर है और सिरसा एसपी या डीसी अपनी रिपोर्ट कब सौंपेंगे, इसकी कोई समयसीमा नहीं है। उन्होंने कहा कि एक रिपोर्ट सौंपे जाने पर एक चीजें आगे बढ़ेंगी। (पीटीआई-भाषा इन्पुट्स के साथ)

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