हरियाणाः विधानसभा उपाध्यक्ष की कार पर हमला, किसानों ने तोड़े शीशे

हरियाणा में किसानों ने रविवार को विधानसभा उपाध्यक्ष रणबीर गंगवा की कार पर सिरसा जिले में हमला किया। पुलिस ने कहा कि पथराव से उनकी कार का पिछला शीशा टूट गया, लेकिन किसी को चोट नहीं आई।

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विधानसभा उपाध्यक्ष की कार पर हमला, किसानों ने तोड़े शीशे ( फाइल फोटो- इंडियन एक्सप्रेस/ मनोज ढाका)

हरियाणा में किसानों ने रविवार को विधानसभा उपाध्यक्ष रणबीर गंगवा की कार पर सिरसा जिले में हमला किया। पुलिस ने कहा कि पथराव से उनकी कार का पिछला शीशा टूट गया, लेकिन किसी को चोट नहीं आई। इस दौरान किसानों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की।

सिरसा पुलिस के अनुसार सिरसा से सांसद सुनीता दुग्गल पार्टी के एक कार्यक्रम में हिसार जिले के नलवा क्षेत्र से भाजपा विधायक गंगवा के साथ मौजूद थीं। काले झंडे लिए किसान चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के बाहर एकत्र हो गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस ने कहा कि कार्यक्रम खत्म होने के बाद जब नेता बाहर आ रहे थे, उसी दौरान प्रदर्शनकारियों ने गंगवा की कार को निशाना बनाया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद कुछ लोगों ने वाहन को घेर लिया। घटना के समय गंगवा आगे की सीट पर बैठे थे। हमले में कार का पिछला शीशा टूट गया। पुलिस ने गंगवा को इलाके से सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

घटना के वक्त सुनीता दुग्गल एक अन्य कार में थीं। किसान नेताओं ने बाद में कहा कि कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। उन्होंने दावा किया कि वे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और जब पुलिस कर्मियों ने उन्हें वहां से जबरन हटा दिया तो उन्होंने आपत्ति जताई।

उधर, किसानों ने झज्जर में भी प्रदर्शन किया जहां प्रदेश भाजपा प्रमुख ओपी धनखड़ एक पार्टी कार्यक्रम में शामिल होने वाले थे। अपने हाथों में काले झंडे लिए प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे भाजपा या उसकी सहयोगी जननायक जनता पार्टी (जजपा) को तब तक कार्यक्रम नहीं करने देंगे जब तक कि विवादास्पद कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया जाता।

हरियाणा भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के प्रमुख गुरनाम सिंह चढूनी ने रविवार को पंजाब के गुरदासपुर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भाजपा सरकार को अगर यह लगता है कि यह आंदोलन समाप्त हो जाएगा, तो वह गलत समझ रही है। वास्तव में, यह अधिक ताकत हासिल कर रहा है और किसान तभी आराम करेंगे जब ये कानून रद्द हो जाएंगे।

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