हरियाणाः रिटायर जस्टिस सोमनाथ करेंगे करनाल लाठीचार्ज की जांच, खट्टर सरकार ने बनाया आयोग, 1 महीने में रिपोर्ट

पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के रिटायर जस्टिस सोमनाथ अग्रवाल को जिम्मा दिया गया है कि वह मामले की तह में जाकर सच का पता लगाए। उन्हें एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को समक्ष पेश करनी होगी।

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करनाल में लाठीचार्ज के विरोध में पंचायत के लिए जमा हुए किसान। (पीटीआई)।

करनाल में किसानों पर हुए लाठीचार्ज की जांच के लिए हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर ने आयोग का गठन कर दिया है। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के रिटायर जस्टिस सोमनाथ अग्रवाल को जिम्मा दिया गया है कि वह मामले की तह में जाकर सच का पता लगाए। उन्हें एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को समक्ष पेश करनी होगी।

खट्टर सरकार ने बुधवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में यह फैसला लिया। कमीशन आईएएस ऑफिसर आयुष सिन्हा के मामले की भी जांच करेगा। आयोग देखेगा कि कौन से ऐसे कारण रहे जिससे स्थिति काबू से बाहर चली गई। पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज किन कारणों से किया इस पर भी जांच की जाएगी। ध्यान रहे कि करनाल मामले पर राकेश टिकैत ने कहा था कि एक कमांडर है जिसने सिर तोड़ने का आदेश दिया था। पुलिस बल के माध्यम से वो पूरे देश पर कब्जा करना चाहते हैं।

हरियाणा पुलिस ने बस्तर टोल प्लाजा के पास प्रदर्शन कर रहे किसानों पर लाठीचार्ज किया था। वो एक कार्यक्रम के विरोध में बड़ी संख्या में एकत्र हुए थे। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर शामिल होने वाले थे। घटना के बाद एक वीडियो की एक क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने भी इसे ट्वीट किया था। इसमें करनाल के एसडीएम आयुष सिन्हा को कथित तौर पर पुलिसकर्मियों को किसानों का सिर फोड़ने का निर्देश देते हुए देखा गया है।

आयुष कह रहे हैं कि किसानों के सिर पर हमला करो ताकि उन्हें आगे बढ़ने से रोका जा सके। वीडियो वायरल हुआ तो बवाल मच गया। राकेश टिकैत समेत तमाम किसान नेता करनाल जाकर जम गए। किसानों के साथ प्रशासन की कई दौर की बातचीत हुई। किसान अड़े थे कि आयुष पर केस दर्ज किया जाए, लेकिन सरकार नहीं मानी। आखिर में मामले की जांच पर दोनों पक्षों में सहमति बनी। सरकार ने किसान नेताओं को आश्वस्त किया था कि जांच रिटायर जस्टिस से कराई जाएगी।

गौरतलब है कि केंद्र द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसानों के प्रदर्शन को बुधवार को 300 दिन पूरे हो गए। संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि यह आंदोलन देश के लाखों किसानों की इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता का सबूत है। उनकी मांगे स्पष्ट है लेकिन मोदी सरकार किसानों की जायज मांगों को नहीं मानने पर अड़ी है।

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