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हरियाणा में छाए रहे राजनीति, रामपाल, एसजीपीसी से जुड़े मुद्दे

हरियाणा में 2014 में जहां भाजपा के चुनावी जीत हासिल कर सरकार बनाने की खबर सुर्खियों में रही, वहीं रामपाल मामला और अलग एसजीपीसी के मुद्दे हरियाणा में छाए रहे राजनीति, रामपाल, एसजीपीसी से जुड़े मुद्दे चंडीगढ़। हरियाणा में 2014 में जहां भाजपा के चुनावी जीत हासिल कर सरकार बनाने की खबर सुर्खियों में रही, […]

Author December 18, 2014 1:02 PM

हरियाणा में 2014 में जहां भाजपा के चुनावी जीत हासिल कर सरकार बनाने की खबर सुर्खियों में रही, वहीं रामपाल मामला और अलग एसजीपीसी के मुद्दे हरियाणा में छाए रहे राजनीति, रामपाल, एसजीपीसी से जुड़े मुद्दे चंडीगढ़। हरियाणा में 2014 में जहां भाजपा के चुनावी जीत हासिल कर सरकार बनाने की खबर सुर्खियों में रही, वहीं रामपाल मामला और अलग एसजीपीसी के मुद्दे भी सुर्खियां बने। भाजपा ने लोकसभा चुनाव की तरह ही राज्य में विधानसभा चुनाव में भी जीत हासिल की और हरियाणा में पहली भाजपा सरकार बनाकर कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल जैसे बड़े दावेदारों को राजनीतिक वनवास में भेज दिया।

अक्तूबर के अंत में कार्यभार संभालने वाहरियाणा में छाए रहे राजनीति, रामपाल, एसजीपीसी से जुड़े मुद्दे चंडीगढ़। हरियाणा में 2014 में जहां भाजपा के चुनावी जीत हासिल कर सरकार बनाने की खबर सुर्खियों में रही, वहीं रामपाल मामला और अलग एसजीपीसी के मुद्दे भी सुर्खियां बने। भाजपा ने लोकसभा चुनाव की तरह ही राज्य में विधानसभा चुनाव में भी जीत हासिल की और हरियाणा में पहली भाजपा सरकार बनाकर कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल जैसे बड़े दावेदारों को राजनीतिक वनवास में भेज दिया।

अक्तूबर के अंत में कार्यभार संभालने वाली मनोहर लाल खट्टर सरकार के सामने हालांकि जल्द ही रामपाल मामले के रूप में एक बड़ी चुनौती आ गई। रामपाल अदालत की अवमानना के मामले में पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट में पेश होने की जगह हिसार के बरवाला स्थित अपने सतलोक आश्रम में छिपे थे। रामपाल को गिरफ्तार करने के लिए लगभग दस दिन तक घेरेबंदी चली। इस दौरान रामपाल के निजी कमांडो और कट्टर समर्थकों की पुलिस के साथ झड़प के दौरान कुछ पत्रकारों सहित 200 से अधिक लोग घायल हो गए। इस दौरान पांच महिलाओं और एक बच्चे सहित छह लोगों की मौत भी हुई। आखिरकार आश्रम से रामपाल की गिरफ्तारी के साथ घेरेबंदी खत्म हो गई। उसे बाद में जेल भेज दिया गया। उस पर राजद्रोह और हत्या सहित कई अन्य मामले भी दर्ज किए गए।

इस दौरान लगभग एक हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया जिनमें से ज्यादातर उसके निजी कमांडो, आश्रम के पदाधिकारी और कट्टर समर्थक थे। जुलाई-अगस्त के शुरू में, जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली सरकार थी, हरियाणा के अलग शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के गठन से बड़ा विवाद पैदा हो गया। इसे लेकर कुरुक्षेत्र में विरोधी गुटों के बीच हिंसक संघर्ष हुआ। अकाल तख्त, अमृतसर आधारित एसजीपीसी, पंजाब के शिरोमणि अकाली दल और कुछ संगठनों ने हुड्डा सरकार की अलग इकाई गठित किए जाने की तीखी निंदा की और इसे समुदाय को बांटने और कमजोर करने वाला कदम करार दिया। अक्तूबर के अंत में बालीवुड फिल्मों की तर्ज पर कुछ चोर सोनीपत जिले में एक खाली पड़े मकान से 125 फुट लंबी सुरंग खोदकर एक राष्ट्रीयकृत बैंक के अंदर पहुंचे और लॉकर तोड़कर नकदी, आभूषण व अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो गए। दिसंबर में दो कालेज छात्राएं मीडिया की सुर्खियों में छा गर्इं जिन्होंने कथित छेड़छाड़ पर रोहतक-सोनीपत मार्ग पर चलती बस में तीन युवकों की पिटाई कर दी।

भाजपा ने लोकसभा चुनाव में हरियाणा में आठ सीटों में से सात पर जीत हासिल की थी। कुल दस में शेष दो सीटों पर भाजपा के गठबंधन सहयोगी कुलदीप बिश्नोई के नेतृत्व वाली हजकां ने चुनाव लड़ा था। लेकिन वह दोनों सीटों पर चुनाव हार गई थी । कांग्रेस की प्रतिष्ठा सिर्फ हुड्डा के पुत्र दीपेंद्र सिंह बचा पाए थे जिन्होंने रोहतक सीट बरकरार रखी थी। इनेलो ने दो लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसने हिसार सीट बिश्नोई से छीन ली थी, जहां पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के पोते दुष्यंत विजयी रहे थे। विधानसभा चुनाव में इनेलो 90 में से महज 19 सीटें जीत पाई थी। यहां तक कि चौटाला के पोते व हिसार के सांसद दुष्यंत को भी विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। वे जींद जिले में उचाना कलां से मैदान में थे, लेकिन बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता से चुनाव हार गए। यह सीट पहले चौटाला सीनियर के पास थी। विधानसभा चुनाव में भी बिश्नोई की पार्टी हजकां को जबर्दस्त झटका लगा जो सिर्फ दो सीटें जीत पाई। एक सीट से बिश्नोई और एक सीट से उनकी पत्नी रेणुका विजयी रहीं। भाजपा ने 47 सीटें हासिल कीं और इसके ज्यादातर विधायक ऐसे रहे जो पहली बार जीतकर आए। कांग्रेस केवल 15 सीटें जीत पाई और छह बार विधायक रहे अजय सिंह यादव सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता चुनाव हार गए।

हरियाणा के इतिहास में भाजपा पहली बार अपने दम पर सत्ता में आई। चुनाव से महज कुछ दिन पहले सिरसा आधारित डेरा सच्चा सौदा की राजनीतिक इकाई ने भाजपा को समर्थन देने की घोषणा की थी। पहली बार विधायक बने व संघ के पूर्व प्रचारक 60 साल के खट्टर ने हरियाणा के पहले पंजाबी मुख्यमंत्री बनने का तमगा हासिल किया । वे 18 साल के बाद पहले गैर जाट मुख्यमंत्री भी हैं।ली मनोहर लाल खट्टर सरकार के सामने हालांकि जल्द ही रामपाल मामले के रूप में एक बड़ी चुनौती आ गई। रामपाल अदालत की अवमानना के मामले में पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट में पेश होने की जगह हिसार के बरवाला स्थित अपने सतलोक आश्रम में छिपे थे। रामपाल को गिरफ्तार करने के लिए लगभग दस दिन तक घेरेबंदी चली। इस दौरान रामपाल के निजी कमांडो और कट्टर समर्थकों की पुलिस के साथ झड़प के दौरान कुछ पत्रकारों सहित 200 से अधिक लोग घायल हो गए। इस दौरान पांच महिलाओं और एक बच्चे सहित छह लोगों की मौत भी हुई। आखिरकार आश्रम से रामपाल की गिरफ्तारी के साथ घेरेबंदी खत्म हो गई। उसे बाद में जेल भेज दिया गया।

उस पर राजद्रोह और हत्या सहित कई अन्य मामले भी दर्ज किए गए। इस दौरान लगभग एक हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया जिनमें से ज्यादातर उसके निजी कमांडो, आश्रम के पदाधिकारी और कट्टर समर्थक थे। जुलाई-अगस्त के शुरू में, जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली सरकार थी, हरियाणा के अलग शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के गठन से बड़ा विवाद पैदा हो गया। इसे लेकर कुरुक्षेत्र में विरोधी गुटों के बीच हिंसक संघर्ष हुआ। अकाल तख्त, अमृतसर आधारित एसजीपीसी, पंजाब के शिरोमणि अकाली दल और कुछ संगठनों ने हुड्डा सरकार की अलग इकाई गठित किए जाने की तीखी निंदा की और इसे समुदाय को बांटने और कमजोर करने वाला कदम करार दिया। अक्तूबर के अंत में बालीवुड फिल्मों की तर्ज पर कुछ चोर सोनीपत जिले में एक खाली पड़े मकान से 125 फुट लंबी सुरंग खोदकर एक राष्ट्रीयकृत बैंक के अंदर पहुंचे और लॉकर तोड़कर नकदी, आभूषण व अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो गए। दिसंबर में दो कालेज छात्राएं मीडिया की सुर्खियों में छा गर्इं जिन्होंने कथित छेड़छाड़ पर रोहतक-सोनीपत मार्ग पर चलती बस में तीन युवकों की पिटाई कर दी।

भाजपा ने लोकसभा चुनाव में हरियाणा में आठ सीटों में से सात पर जीत हासिल की थी। कुल दस में शेष दो सीटों पर भाजपा के गठबंधन सहयोगी कुलदीप बिश्नोई के नेतृत्व वाली हजकां ने चुनाव लड़ा था। लेकिन वह दोनों सीटों पर चुनाव हार गई थी । कांग्रेस की प्रतिष्ठा सिर्फ हुड्डा के पुत्र दीपेंद्र सिंह बचा पाए थे जिन्होंने रोहतक सीट बरकरार रखी थी। इनेलो ने दो लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसने हिसार सीट बिश्नोई से छीन ली थी, जहां पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के पोते दुष्यंत विजयी रहे थे। विधानसभा चुनाव में इनेलो 90 में से महज 19 सीटें जीत पाई थी। यहां तक कि चौटाला के पोते व हिसार के सांसद दुष्यंत को भी विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। वे जींद जिले में उचाना कलां से मैदान में थे, लेकिन बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता से चुनाव हार गए।

यह सीट पहले चौटाला सीनियर के पास थी। विधानसभा चुनाव में भी बिश्नोई की पार्टी हजकां को जबर्दस्त झटका लगा जो सिर्फ दो सीटें जीत पाई। एक सीट से बिश्नोई और एक सीट से उनकी पत्नी रेणुका विजयी रहीं। भाजपा ने 47 सीटें हासिल कीं और इसके ज्यादातर विधायक ऐसे रहे जो पहली बार जीतकर आए। कांग्रेस केवल 15 सीटें जीत पाई और छह बार विधायक रहे अजय सिंह यादव सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता चुनाव हार गए। हरियाणा के इतिहास में भाजपा पहली बार अपने दम पर सत्ता में आई। चुनाव से महज कुछ दिन पहले सिरसा आधारित डेरा सच्चा सौदा की राजनीतिक इकाई ने भाजपा को समर्थन देने की घोषणा की थी। पहली बार विधायक बने व संघ के पूर्व प्रचारक 60 साल के खट्टर ने हरियाणा के पहले पंजाबी मुख्यमंत्री बनने का तमगा हासिल किया । वे 18 साल के बाद पहले गैर जाट मुख्यमंत्री भी हैं।भी सुर्खियां बने। भाजपा ने लोकसभा चुनाव की तरह ही राज्य में विधानसभा चुनाव में भी जीत हासिल की और हरियाणा में पहली भाजपा सरकार बनाकर कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल जैसे बड़े दावेदारों को राजनीतिक वनवास में भेज दिया। अक्तूबर के अंत में कार्यभार संभालने वाली मनोहर लाल खट्टर सरकार के सामने हालांकि जल्द ही रामपाल मामले के रूप में एक बड़ी चुनौती आ गई।

रामपाल अदालत की अवमानना के मामले में पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट में पेश होने की जगह हिसार के बरवाला स्थित अपने सतलोक आश्रम में छिपे थे। रामपाल को गिरफ्तार करने के लिए लगभग दस दिन तक घेरेबंदी चली। इस दौरान रामपाल के निजी कमांडो और कट्टर समर्थकों की पुलिस के साथ झड़प के दौरान कुछ पत्रकारों सहित 200 से अधिक लोग घायल हो गए। इस दौरान पांच महिलाओं और एक बच्चे सहित छह लोगों की मौत भी हुई। आखिरकार आश्रम से रामपाल की गिरफ्तारी के साथ घेरेबंदी खत्म हो गई। उसे बाद में जेल भेज दिया गया। उस पर राजद्रोह और हत्या सहित कई अन्य मामले भी दर्ज किए गए। इस दौरान लगभग एक हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया जिनमें से ज्यादातर उसके निजी कमांडो, आश्रम के पदाधिकारी और कट्टर समर्थक थे। जुलाई-अगस्त के शुरू में, जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली सरकार थी, हरियाणा के अलग शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के गठन से बड़ा विवाद पैदा हो गया। इसे लेकर कुरुक्षेत्र में विरोधी गुटों के बीच हिंसक संघर्ष हुआ। अकाल तख्त, अमृतसर आधारित एसजीपीसी, पंजाब के शिरोमणि अकाली दल और कुछ संगठनों ने हुड्डा सरकार की अलग इकाई गठित किए जाने की तीखी निंदा की और इसे समुदाय को बांटने और कमजोर करने वाला कदम करार दिया। अक्तूबर के अंत में बालीवुड फिल्मों की तर्ज पर कुछ चोर सोनीपत जिले में एक खाली पड़े मकान से 125 फुट लंबी सुरंग खोदकर एक राष्ट्रीयकृत बैंक के अंदर पहुंचे और लॉकर तोड़कर नकदी, आभूषण व अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो गए।

दिसंबर में दो कालेज छात्राएं मीडिया की सुर्खियों में छा गर्इं जिन्होंने कथित छेड़छाड़ पर रोहतक-सोनीपत मार्ग पर चलती बस में तीन युवकों की पिटाई कर दी। भाजपा ने लोकसभा चुनाव में हरियाणा में आठ सीटों में से सात पर जीत हासिल की थी। कुल दस में शेष दो सीटों पर भाजपा के गठबंधन सहयोगी कुलदीप बिश्नोई के नेतृत्व वाली हजकां ने चुनाव लड़ा था। लेकिन वह दोनों सीटों पर चुनाव हार गई थी । कांग्रेस की प्रतिष्ठा सिर्फ हुड्डा के पुत्र दीपेंद्र सिंह बचा पाए थे जिन्होंने रोहतक सीट बरकरार रखी थी। इनेलो ने दो लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसने हिसार सीट बिश्नोई से छीन ली थी, जहां पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के पोते दुष्यंत विजयी रहे थे। विधानसभा चुनाव में इनेलो 90 में से महज 19 सीटें जीत पाई थी। यहां तक कि चौटाला के पोते व हिसार के सांसद दुष्यंत को भी विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। वे जींद जिले में उचाना कलां से मैदान में थे, लेकिन बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता से चुनाव हार गए। यह सीट पहले चौटाला सीनियर के पास थी। विधानसभा चुनाव में भी बिश्नोई की पार्टी हजकां को जबर्दस्त झटका लगा जो सिर्फ दो सीटें जीत पाई। एक सीट से बिश्नोई और एक सीट से उनकी पत्नी रेणुका विजयी रहीं। भाजपा ने 47 सीटें हासिल कीं और इसके ज्यादातर विधायक ऐसे रहे जो पहली बार जीतकर आए। कांग्रेस केवल 15 सीटें जीत पाई और छह बार विधायक रहे अजय सिंह यादव सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता चुनाव हार गए।

हरियाणा के इतिहास में भाजपा पहली बार अपने दम पर सत्ता में आई। चुनाव से महज कुछ दिन पहले सिरसा आधारित डेरा सच्चा सौदा की राजनीतिक इकाई ने भाजपा को समर्थन देने की घोषणा की थी। पहली बार विधायक बने व संघ के पूर्व प्रचारक 60 साल के खट्टर ने हरियाणा के पहले पंजाबी मुख्यमंत्री बनने का तमगा हासिल किया । वे 18 साल के बाद पहले गैर जाट मुख्यमंत्री भी हैं।

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