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राकेश टिकैत और 12 अन्य के खिलाफ हरियाणा में केस दर्ज, धारा-144 तोड़ की थी महापंचायत

पुलिस का आरोप है कि किसान महापंचायत में कोरोना महामारी के बावजूद हजारों लोगों की भीड़ जुटाई गई। इस दौरान लोगों ने कोविड प्रोटोकॉल का भी जमकर उल्लंघन किया।

पुलिस ने टिकैत और अन्य किसान नेताओं के खिलाफ धारा 144 का उल्लंघन करने के साथ ही धारा 269 और 270 के तहत भी मुकदमा दर्ज किया है। (फोटो – पीटीआई)

कोरोना महामारी के दौरान हरियाणा में किसान महापंचायत का आयोजन करने पर किसान नेता राकेश टिकैत सहित 12 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। राकेश टिकैत ने शनिवार को हरियाणा के अंबाला कैंट के धरौली गांव में किसान महापंचायत को संबोधित किया था। हरियाणा पुलिस ने सभी किसान नेताओं के खिलाफ सीआरपीसी की धारा-144 का उल्लंघन करने के लिए केस दर्ज किया है।

हरियाणा पुलिस ने जिन 12 किसान नेताओं पर मामला दर्ज किया है, उनमें रतन मान सिंह, बलदेव सिंह और जसमेर सैनी का नाम भी शामिल है। हरियाणा पुलिस के अनुसार कोरोना के फैलते संक्रमण की वजह से जिले में धारा-144 लागू की गई थी। लेकिन स्थानीय पुलिस अधिकारियों के द्वारा मना करने के बावजूद किसान नेताओं ने महापंचायत का आयोजन किया। जिसके बाद एक पुलिस अधिकारी की शिकायत पर किसान महापंचायत में शामिल सभी किसान नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

पुलिस का आरोप है कि किसान महापंचायत में कोरोना महामारी के बावजूद हजारों लोगों की भीड़ जुटाई गई। इस दौरान लोगों ने कोविड प्रोटोकॉल का भी जमकर उल्लंघन किया। किसान महापंचायत में लोगों ने ना तो मास्क पहन रखा था और ना ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया था। पुलिस ने टिकैत और अन्य किसान नेताओं के खिलाफ धारा 144 का उल्लंघन करने के साथ ही धारा 269 और 270 के तहत भी मुकदमा दर्ज किया है।

बता दें कि भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता और किसान नेता राकेश टिकैत ने पिछले दिनों कहा था कि सरकार कोरोना महामारी का सहारा लेकर किसानों का आंदोलन खत्म नहीं करवा सकती है। साथ ही उन्होंने कहा था कि किसानों की लड़ाई लंबी चलेगी और किसान बिना तीनों कृषि कानूनों को वापस कराए हुए अपने घर नहीं जाएंगे। इसके अलावा उन्होंने किसानों से आग्रह किया था कि वे मास्क लगाएं और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।

पिछले पांच महीने से अधिक समय से देशभर से आए किसान दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं. किसान केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए तीनों कृषि कानूनों को रद्द और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर क़ानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं। हालांकि जनवरी महीने से ही सरकार और किसान संगठनों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है। किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच गतिरोध जारी है।

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