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किसान आंदोलन से खट्टर सरकार पर संकट, टिकैत के साथ खड़े हैं जाट नेता, बताया सच्चा देशभक्त

दुष्यंत चौटाला के चाचा और इनेलो के वरिष्ठ नेता अभय सिंह चौटाला ने एक दिन पहले ही विधायकी से इस्तीफा देते हुए कहा था कि वे शनिवार को गाजीपुर में प्रदर्शन स्थल पर जाएंगे।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र हिसार | Updated: January 30, 2021 1:19 PM
Haryana, Khap Panchayatहरियाणा में किसान आंदोलन को लेकर हुई खाप पंचायत। (एक्सप्रेस फोटो- मनोज ढाका)

कृषि कानून पर केंद्र सरकार और किसान संगठनों का टकराव अब भाजपा शासित राज्यों के लिए सिरदर्द साबित हो रहा है। हरियाणा पर इसका सबसे ज्यादा असर देखा जा सकता है। यहां भाजपा जाट नेताओं की पार्टी जजपा के साथ ही गठबंधन में है। अब तक किसान आंदोलनों पर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के बीच कोई तनातनी देखने को नहीं मिली है। हालांकि, अब जजपा पर प्रदर्शनों चलते दबाव बढ़ता जा रहा है।

एक दिन पहले ही दुष्यंत चौटाला के छोटे भाई दिग्विजय चौटाला ने राकेश टिकैत का समर्थन करने की बात कही। दिग्विजय ने टिकैत को ‘सच्चा देशभक्त’ बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा किसानों के हितों की बात की है। अगर सरकार को कार्रवाई करनी है, तो उसे (गुरनाम सिंह) चढूनी जैसे लोगों को पकड़ना चाहिए, जिन्होंने लोगों को भड़काया। लेकिन राकेश टिकैत और किसान सच्चे देशभक्त हैं।

कृषि कानूनों के मुद्दे पर हल न निकलने की वजह से दुष्यंत चौटाला पर भी सामने आकर जाटों का समर्थन करने का दबाव बन रहा है। राज्य के विपक्षी दलों और किसानों की ओर से दुष्यंत पर दबाव है कि वह भगवा दल से अपने संबंध तोड़ लें और कृषि कानूनों को लेकर आंदोलनरत किसानों का समर्थन करे। इस बीच, इनेलो के वरिष्ठ नेता अभय सिंह चौटाला ने कहा कि वह टिकैत और अन्य किसानों के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए शनिवार को गाजीपुर में प्रदर्शन स्थल पर जाएंगे। उन्होंने कृषि कानूनों के मुद्दे पर विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा से अधिक किसानों को गाजीपुर, टीकरी और सिंघू में प्रदर्शन स्थलों में जुटना चाहिए।

बता दें कि 90 सीटों वाली हरियाणा विधानसभा के 50 विधायक किसान परिवारों से संबंध रखते हैं। कई ने तो खुले तौर पर कृषि गतिविधियों को अपनी कमाई का जरिया तक बताया है। ऐसे में भाजपा पर भी किसान आंदोलन की वजह से भारी दबाह है। इससे पहले हरियाणा सरकार के कई निर्दलीय विधायक भाजपा से समर्थन वापस भी ले चुके हैं।

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