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किसान आंदोलनः हरियाणा ने शुरू की केस वापसी की प्रक्रिया, एसीएस ने जिला उपायुक्तों से तलब किया ये ब्योरा

मृतक किसानों के परिवार को मुआवजा देने के सवाल पर सीएम खट्टर ने कहा कि हरियाणा के मृतक किसानों की संख्या 73 है। इस मामले में अभी जांच चल रही है। विचार विमर्श के बाद ही मुआवजे के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।

हरियाणा सरकार ने किसानों पर दर्ज हुए मुक़दमे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। (पीटीआई फाइल फोटो)

हरियाणा सरकार ने तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ एक साल से भी अधिक समय तक चले आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज हुए मुक़दमे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने सभी राज्यों के जिला उपायुक्तों को केस का ब्यौरा देने के लिए एक पत्र भी लिखा है।

हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा की ओर से सभी जिलों के उपायुक्तों को लिखे पत्र में कहा गया है कि आपसे अनुरोध है कि पिछले साल के 9 सितंबर से अब तक हरियाणा में किसानों के खिलाफ दर्ज हुए एफआईआर की जानकारी पूरे तथ्यों और अपनी टिप्पणी के साथ भेजें। साथ ही पत्र में यह भी बताने के लिए कहा गया कि कौन कौन से मामले जनहित में वापस लिए जा सकते हैं। सभी जिलों के एसपी से भी इस मामले को लेकर रिपोर्ट मांगी गई है।

वहीं हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन सदन में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने एक सवाल के जवाब में कहा कि पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार किसान आंदोलन के दौरान अब तक 276 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से चार मामले गंभीर धाराओं में दर्ज हैं। 272 मामलों में से 178 मामलों में चार्जशीट तैयार की जा चुकी है। 158 मामलों का अभी भी पता नहीं चल पाया है। आठ मामलों को निरस्त करने के लिए रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है और साथ ही चार मामलों के निरस्तीकरण रिपोर्ट को दाखिल किया गया है। 

इसके अलावा उन्होंने कहा कि 29 मामलों को निरस्त करने की प्रक्रिया जारी है। राज्य सरकार बलात्कार, हत्या जैसे जघन्य अपराधों से जुड़े मामलों को छोड़कर किसानों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस ले लेगी। साथ ही उन्होंने मृतक किसानों के परिवार को मुआवजा देने के सवाल पर कहा कि फिलहाल किसानों से बातचीत चल रही है। सीआईडी ​​की रिपोर्ट के मुताबिक 46 किसानों का पोस्टमार्टम किया गया है। किसानों से बातचीत के दौरान पता चला कि हरियाणा के मृतक किसानों की संख्या 73 है। इस मामले में अभी जांच चल रही है। विचार विमर्श के बाद ही मुआवजे के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।

गौरतलब है कि बीते 11 दिसंबर को दिल्ली की सीमा पर चल रहा किसान आंदोलन समाप्त हो गया। किसान संगठनों ने सरकार के द्वारा अधिकतर मांगे माने जाने के बाद ही आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया। सरकार और किसान संगठनों के बीच जिन मुद्दों को लेकर सहमति बनी। उनमें एमएसपी को लेकर एक कमेटी बनाने, आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारी किसानों पर दर्ज हुए मुकदमे वापस लेने और मृतक किसानों के परिवारजनों को मुआवजा देने जैसे मुद्दे भी शामिल थे।

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