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हरियाणा चुनाव के बहुकोणीय मुकाबले में प्रतिष्ठा दांव पर

चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा के आगामी 15 अक्तूबर को होने वाले चुनाव में सूबे की सियासत की कई बड़ी तोपों की प्रतिष्ठा दॉव पर है। तीन प्रमुख ‘लाल’ परिवारों की अगली पीढ़ी के चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला बहुकोणीय हो गया है। हाल के समय तक मुकाबला मुख्यत: कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल तक सीमित […]

Author Updated: October 4, 2014 3:11 PM

चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा के आगामी 15 अक्तूबर को होने वाले चुनाव में सूबे की सियासत की कई बड़ी तोपों की प्रतिष्ठा दॉव पर है। तीन प्रमुख ‘लाल’ परिवारों की अगली पीढ़ी के चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला बहुकोणीय हो गया है।

हाल के समय तक मुकाबला मुख्यत: कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल तक सीमित रहता था लेकिन इस बार कई नए खिलाड़ी भी चुनावी दंगल में उतर आए हैं।

हालांकि मुख्य खिलाड़ियों के रूप में कांग्रेस, भाजपा और इंडियन नेशनल लोकदल को ही देखा जा रहा है। तीनों ही अपने दम पर सत्ता हासिल करने की उम्मीद कर रहे हैं।

वर्ष 1966 में अलग राज्य के तौर पर अस्तित्व में आए हरियाणा में ऐसा पहली बार है जब भाजपा राज्य की सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। बसपा, हरियाणा जनहित कांग्रेस, वामदलों के अलावा दो नई पार्टियां भी चुनाव लड़ रही हैं। इन नई पार्टियों में पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा के नेतृत्व वाली हरियाणा जन चेतना पार्टी और निर्दलीय विधायक गोपाल कांडा की हरियाणा लोकहित पार्टी शामिल हैं।

स्वतंत्रता सेनानी दिवंगत चौधरी रणबीर सिंह के पुत्र और दो बार मुख्यमंत्री रहे भूपिंदर सिंह हुड्डा एक बार फिर रोहतक जिले के गढ़ी सांपला किलोई निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं।

किलोई में हुड्डा के सामने खड़े प्रतिद्वंद्वी बेशक ज्यादा चर्चित नेता नहीं हैं लेकिन सत्ता विरोधी लहर और अन्य कारकों के चलते कांग्रेस को तीसरी बार जीत दिलाना मुख्यमंत्री के लिए एक बड़ी चुनौती है।

हरियाणा के प्रसिद्ध ‘लाल’- देवीलाल, बंसीलाल और भजनलाल ने भले ही दशकों तक राज्य की राजनीति में अपना सिक्का जमाए रखा, लेकिन उनके चले जाने के वर्षों बाद, अब उनके वंशज और संबंधी अपने परिवार के नाम को ऊंचा करने की उम्मीद के साथ विभिन्न सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं।

देवीलाल के पुत्र और पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला एवं उनके पुत्र अजय सिंह पिछले साल शिक्षक भर्ती घोटाले में सुनाई गई सजा के चलते चुनावों से बाहर रह सकते हैं लेकिन जेल की सजा पाए इन नेताओं के प्रतिनिधित्व वाली सीटों पर चुनाव लड़ रहे संबंधियों के लिए ये चुनाव अब प्रतिष्ठा का सवाल बन गए हैं।

ओमप्रकाश चौटाला के एक अन्य पुत्र और इनेलो के वरिष्ठ नेता अभय सिंह ऐलनाबाद विधानसभा सीट से दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं। जेल की सजा पाए नेताओं की अनुपस्थिति के चलते अपनी पार्टी को जीत दिलाना उनके लिए एक कठिन चुनौती होगी।

 

 

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