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केंद्रीय मंत्री वी के सिंह के गांव में बेकाबू हुआ कोरोना, दो हफ्तों में 30 लोगों की गई जान

केंद्रीय मंत्री के गांव के अलावा कई और गांवों में भी संदिग्ध कोविड-19 के कारण अधिक संख्या में मौतें हुई हैं। पिछले महीने रोहतक के टिटोली गांव में 21 लोगों की मौत हुई थी।

Edited By रुंजय कुमार चंडीगढ़ | May 16, 2021 9:14 PM
बापोड़ा को ‘‘फौजियों के गांव’’ के रूप में भी जाना जाता है और यह केंद्रीय मंत्री जनरल वी के सिंह का पैतृक गांव भी है। (सांकेतिक फोटो – पीटीआई)

हरियाणा के भिवानी जिले में केंद्रीय मंत्री वी के सिंह के पैतृक गांव बापोड़ा में पिछले दो हफ्तों में 30 से अधिक लोगों की मौत हो गई है। यह जानकारी गांव के सरपंच ने रविवार को दी। असामान्य रूप से इतनी अधिक संख्या में हुई मौतों ने यह चिंता उत्पन्न कर दी है कि इसका कारण कोविड-19 महामारी हो सकती है। बापोड़ा के ग्राम प्रधान नरेश ने कहा कि इनमें से कई लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षण थे लेकिन उनमें से केवल तीन ही जांच में संक्रमित पाए गए थे।

ग्राम प्रधान नरेश ने कहा, ‘‘पिछले दो हफ्तों के दौरान गांव में 30 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। उनमें से कई बुजुर्ग थे, मरने वालों में से केवल तीन की ही जांच रिपोर्ट में कोविड-19 की पुष्टि हुई थी।’’ भिवानी के उपायुक्त जयबीर सिंह आर्य ने पीटीआई-भाषा को फोन पर बताया कि गांव के सभी निवासियों की जांच की गई है। रविवार को गांव का दौरा करने वाले अधिकारी ने यह भी बताया कि गांव में एक एंबुलेंस भी तैनात कर दी गई है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने गांव में एक पृथक-वास केंद्र स्थापित किया है और आपातकालीन उपयोग के लिए एक एंबुलेंस भी तैनात की है। यहां टीकाकरण केंद्र भी स्थापित किए गए हैं।’’ अधिकारी ने कहा, ‘‘पूरे गांव को सैनिटाइज किया गया है।’’ सरपंच नरेश ने कहा कि बापोड़ा गांव की आबादी 20 हजार से ज्यादा है। मौतों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें (मरने वाले लोगों) बुखार और खांसी जैसे लक्षण थे, लेकिन उन्होंने जांच नहीं कराई। इसलिए, उनकी मौत के पीछे का असली कारण अज्ञात है।’’ उन्होंने कहा कि कई ग्रामीण कोविड-19 जांच नहीं कराना चाहते।

ग्राम प्रधान ने कहा कि हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए गांव में जांच और स्क्रीनिंग तेज कर दी है। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ दिनों के दौरान 150 से अधिक लोगों की जांच की गई और केवल एक ही व्यक्ति संक्रमित पाया गया।’’ नरेश ने कहा कि राज्य सरकार टीकाकरण शिविर भी लगा रही है और हाल में लगाए गए एक शिविर को ग्रामीणों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली। सरपंच ने कहा कि बापोड़ा को ‘‘फौजियों के गांव’’ के रूप में भी जाना जाता है और यह केंद्रीय मंत्री जनरल वी के सिंह का पैतृक गांव भी है।

बापोड़ा एकमात्र ऐसा गांव नहीं है जहां संदिग्ध कोविड-19 के कारण इतनी अधिक संख्या में मौतें हुई हैं। पिछले महीने रोहतक के टिटोली गांव में 21 लोगों की मौत हुई थी, लेकिन अधिकारियों ने कहा कि इनमें से केवल चार की मौत संक्रमण के कारण होने की पुष्टि हुई। हाल के सप्ताहों में भिवानी के मुंधल खुर्द और मुंधल कलां गांवों में भी लगभग 40 मौतें होने की खबरें आई थीं। इस तरह की घटनाओं पर विपक्ष ने मांग की थी कि ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड-19 जांच बढ़ाई जानी चाहिए। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड-19 की समस्या से निपटने के लिए एक कार्यबल गठित करने की मांग की थी।

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