हरियाणा: आंदोलनकारी महिला किसानों को ट्रक ने रौंदा, तीन की मौत; बोले राहुल- देश को खोखला कर रही यह क्रूरता-नफरत

बता दें कि यह हादसा सुबह साढ़े 6 बजे के करीब झज्जर रोड पर हुआ। जानकारी के मुताबिक किसान प्रदर्शन में शामिल बुजुर्ग महिलाएं डिवाइडर पर बैठी हुई थीं।

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तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है(फोटो सोर्स: PTI)।

हरियाणा के बहादुरगढ़ में गुरुवार की सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। एक तेज रफ्तार ट्रक ने महिला किसान प्रदर्शनकारियों को रौंद दिया। इस दर्दनाक घटना में तीन बुजुर्ग महिलाओं की जान चली गई और तीन अन्य महिलाओं की हालत गंभीर बताई जा रही है। वहीं मौके पर पुलिस ने पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक यह घटना आज सुबह साढ़े 6 बजे के आसपास की बताई जा रही है। जिसमें झज्जर रोड पर बुजुर्ग महिलाएं डिवाइडर पर बैठी हुई थीं। इतने में एक तेज रफ्तार ट्रक उन्हें रौंदते हुए आगे निकल गया। इस हादसे में दो महिलाओं की घटनास्थल पर ही मौत हो गई जबकि एक महिला ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

हादसे में जिन तीनों महिलाओं की जान गई है, वो सभी पंजाब के मानसा जिले की रहने वालीं हैं। जानकारी के अनुसार महिलाएं सुबह अपने घर जाने के लिए ऑटो का इंतजार करते हुए डिवाइडर पर बैठी थीं। तभी झज्जर रोड पर फ्लाइओवर के नीचे तेज रफ्तार ट्रक ने उन्हें कुचल दिया। हादसे की खबर पाते ही मौके पर पुलिस पहुंची।

बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा पारित तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ नवंबर 2020 से दिल्ली बॉर्डर पर किसान संगठनों का विरोध प्रदर्शन चल रहा है। इसी आंदोलन से तीनों महिलाएं भी जुड़ी थीं।

इस घटना पर कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने संवेदना प्रकट करते हुए लिखा, “भारत माता- देश की अन्नदाता- को कुचला गया है। ये क्रूरता और नफ़रत हमारे देश को खोखला कर रही है। मेरी शोक संवेदनाएं।”

बता दें कि इससे पहले यूपी के लखीमपुर खीरी में भी विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों को महिंद्रा थार से कुचलने का मामला सामने आया था। जिसमें 4 किसानों की मौत हो गई थी। इसके बाद भड़की हिंसा में तीन भाजपा कार्यकर्ता और एक पत्रकार की मौत हो गई थी। इस मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा मुख्य आरोपी बनाए गए हैं।

किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी: किसानों की मांग है कि केंद्र सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस ले और एमएसपी गारंटी कानून बनाए। वहीं संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से कहा गया है कि जबतक सरकार किसानों की मांगे नहीं मानती तबतक किसान वापस नहीं जाएंगे। वहां दिल्ली की सीमा पर चल रहे किसान आंदोलन को 11 महीने पूरे हो चुके हैं।

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