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मोदी सरकार से इस्‍तीफा देने वाली पहली मंत्री हैं हरसिमरत कौर, RSS के सहयोगी संगठन ने लगाया था वॉलमाार्ट को फायदा पहुंचाने का आरोप

हरसिमरत नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के शुरू होने से पहले भी विवादों में आईं थीं। मई 2019 में स्वदेशी जागरण मंच ने हरसिमरत की ग्लोबल रिटेल की दिग्गज कंपनी वॉलमार्ट के साथ रिश्तों की जांच की मांग की थी।

Author Edited By आलोक श्रीवास्तव नई दिल्ली | Updated: September 18, 2020 2:35 PM
Harsimrat Kaur Badal

शिरोमणि अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल का इस्तीफा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंजूर कर लिया। हरसिमरत ने 17 सितंबर 2020 की शाम मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दिया था। हरसमिरत केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री थीं। उन्होंने संसद में पेश किए गए कृषि से जुड़े दो विधेयकों के विरोध में इस्तीफा दिया। हरसिमरत मोदी कैबिनेट से इस्तीफा देने वाली पहली मंत्री हैं।

हरसिमरत नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के शुरू होने से पहले भी विवादों में आईं थीं। मई 2019 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सहयोगी संगठन स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने हरसिमरत की ग्लोबल रिटेल की दिग्गज कंपनी वॉलमार्ट के साथ रिश्तों की जांच की मांग की थी। दरअसल, वॉलमार्ट इंडिया के सीईओ क्रिश अय्यर ने एक ट्वीट किया था। उसमें उन्होंने हरसिमरत कौर को सिर्फ भटिंडा से चुनाव जीतने की बधाई दी थी, लेकिन आरएसएस की आर्थिक मामलों की इकाई एसजेएम को यह नागवार गुजरा था।

तब स्वदेशी जागरण मंच के सह संयोजक अश्विनी महाजन ने ट्विटर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पीयूष गोयल और अरुण जेटली को टैग करते हुए लिखा था, ‘वॉलमार्ट के इस ट्वीट पर आपका ध्यान आकर्षित कराना चाहता हूं, बिना कारण के नहीं। श्रीमती हरसिमरत बादल कंपनी को एफडीआई का लाभ दिलाने के लिए फूड रिटेल खोलने आदि में मदद कर रही हैं। कृपया इसे ध्यान में रखें।’ हालांकि, इसके बावजूद मोदी सरकार में उन्हें दोबारा केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री बनाया गया।

हरसिमरत कौर ने सितंबर 2018 में आरोप लगाया था कि नवजोत सिंह सिद्धू ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए मिली राजनीतिक मंजूरी का दुरुपयोग किया। इसके बाद हरसिमरत ने यह भी दावा किया था कि सुषमा स्वराज (तत्कालीन विदेश मंत्री) ने करतारपुर साहिब गलियारा (कॉरिडोर) खोलने के मुद्दे को ‘गड़बड़ाने’ के लिए नवजोत सिंह सिद्धू को फटकार लगाई है।

यह है सीटों का गणित: पंजाब में लोकसभा की 13 सीटें हैं। कांग्रेस ने 8 सीटें जीतीं। एक आम आदमी पार्टी के हिस्से में आई। दो-दो सीटें भाजपा और अकाली दल ने जीतीं। ये दोनों सीटें अकाली परिवार ने ही जीतीं। एक पर हरसिमरत और दूसरी (फिरोजपुर सीट) पर उनके पति सुखबीर बादल सांसद बने। अकाली दल और बीजेपी लंबे वक्त से साथ हैं। ऐसे में पिछली बार की ही तरह इस बार भी अकाली दल को एक मंत्री पद मिला।

2009 में की थी राजनीतिक जीवन की शुरुआत: हरसिमरत कौर का जन्म 25 जुलाई, 1966 को दिल्ली में एक सिख परिवार में हुआ था। उन्होंने मैट्रिक्यूलेट और वस्त्र डिजाइन में डिप्लोमा कर रखा है। 21 नवंबर 1991 को उनका विवाह सुखबीर सिंह बादल से हुआ। उनकी दो बेटियां और एक बेटा है। शादी से पहले वह एक एजेंसी में मर्चेंडाइजर का काम भी कर चुकी हैं।

हरसिमरत ने खुद का एक्सपोर्ट बिजनेस भी शुरू किया था। साथ ही वह परिवार के कारोबार को भी देखती हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 2009 लोकसभा चुनाव से की थी। तब उन्होंने कांग्रेस के राहींदर सिंह को हराया और भटिंडा से लोकसभा सदस्य चुनी गईं। वह 2014 में दोबारा जीतीं और मोदी सरकार में केंद्रीय खाद्य मंत्री बनीं। 2019 में इसी सीट से लगातार तीसरी बार सांसद चुनी गईं।

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