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डॉ हर्षवर्धन ने वैज्ञानिको- प्रदूषण रहित पटाखे बनाएं वैज्ञानिकों

राजधानी सहित सूमचे एनसीआर में पटाखों पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से प्रतिबंध लगाए जाने के बाद इस पर चल रही बहसों के बीच पर्यावरण मंत्री ने कहा कि उन्होंने देश के वैज्ञानिकों के साथ विचार-विमर्श भी किया है।

Author नई दिल्ली | October 16, 2017 2:48 AM
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन

केंद्रीय विज्ञान व पर्यावरण मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने देश के वैज्ञानिकों से कहा है कि वे प्रदूषण रहित पटाखे ईजाद करें ताकि परंपराओं के चलते पर्यावरण व बच्चों की सेहत को होने वाले नुकसान को रोका जा सके। डॉ हर्षवर्धन रविवार को इंडिया गेट पर क्लीन एयर कैंपेन को हरी झंडी दिखाने के पूर्व दौड़ में शामिल होने वाले बच्चों को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर बच्चों ने भी हवा को साफ रखने की शपथ ली। साफ हवा की मुहिम को आगे बढ़ाने का वचन देते हुए उन्होंने कहा कि जो शपथ बच्चे लेते हैं, उसकी सफलता तय है। राजधानी सहित सूमचे एनसीआर में पटाखों पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से प्रतिबंध लगाए जाने के बाद इस पर चल रही बहसों के बीच पर्यावरण मंत्री ने कहा कि उन्होंने देश के वैज्ञानिकों के साथ विचार-विमर्श भी किया है। उन्होंने वैज्ञानिकों को चुनौती देते हुए कहा कि अगले साल दीपावली के पहले वे घातक रसायनों से मुक्त पटाखे ईजाद करें ताकि लोगों को आतिशबाजी के जरिये खुशी जाहिर करने का मौका मिल सके। साथ ही पर्यावरण और बच्चों की सेहत को होने वाले नुकसान को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि बारूदी धुएं का सबसे ज्यादा नुकसान बच्चों को होता है और बच्चे हमारी भावी पीढ़ी हैं। उनको सेहतमंद रखने के लिए हमें अपनी आवोहवा पर ध्यान देना होगा।

उन्होंने कहा कि लोगों के छोटे-छोटे कदम उठाने से ही बड़े अभियान सफल होते हैं। इसलिए पर्यावरण के प्रति देशवासियों को योगदान देना होगा। इस मौके पर पर्यावरण राज्यमंत्री डॉ महेश शर्मा ने कहा कि स्वच्छता अभियान सामूहिक भागीदारी से ही सफल होगा। इसलिए लोगों को आगे आना होगा। हमारे लिए स्वच्छ हवा के साथ खुशनुमा त्योहार की परंपरा को कायम रखना बहुत जरूरी है। डॉ शर्मा ने कहा कि साफ हवा हमारी भावी पीढ़ी के लिए जरूरी है।
इस मुहिम में दिल्ली के कई स्कूलों के हजारों बच्चों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर आयोजनकर्ताओं ने कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ भारत का लक्ष्य बिना साफ हवा के पाना संभव नहीं। इस मुहिम का मकसद लोगों को उनकी जिम्मेदारी का एहसास कराना भी है ताकि वे समझ सकें कि साफ हवा का लक्ष्य अकेले नहीं बल्कि सामूहिक भागीदारी से ही संभव है।

 

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