स्टाम्प ड्यूटी चोरी में EC अशोक लवासा के परिवार को क्लीन चिट, हरियाणा सरकार ने कहा- नहीं हुई कोई टैक्स चोरी

आयकर विभाग ने वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान नोवेल लवासा के आयकर रिटर्न और ट्रांसफर डीड के बीच विसंगतियां पायी। इसके बाद नवंबर 2019 में आईटी विभाग ने हरियाण के अतिरिक्त मुख्य सचिव और वित्त आयुक्त को इस मामले को लेकर लिखा था।

हरियाणा सरकार ने स्टाम्प ड्यूटी चोरी में चुनाव आयुक्त अशोक लवासा के परिवार को क्लीन चिट दे दिया है।

भाजपा शासित हरियाणा सरकार ने चुनाव आयुक्त (ईसी) अशोक लवासा के परिवार के सदस्यों को आयकर विभाग (आईटी) विभाग द्वारा कथित स्टांप ड्यूटी चोरी के एक मामले में क्लीन चिट दे दी है। 27 दिसंबर को इंडियन एक्सप्रेस ने पहली रिपोर्ट की थी कि गुरुग्राम में अशोक लवासा की पत्नी नोवेल लवासा और उनकी बहन शकुंतला लवासा के बीच एक अपार्टमेंट के हस्तांतरण के दौरान स्टांप ड्यूटी में कथित रूप से चोरी के आरोप की जांच आईटी विभाग ने की।

विभाग ने वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान नोवेल लवासा के आयकर रिटर्न और ट्रांसफर डीड के बीच विसंगतियां पायी। इसके बाद नवंबर 2019 में आईटी विभाग ने हरियाण के अतिरिक्त मुख्य सचिव और वित्त आयुक्त को इस मामले को लेकर लिखा था।

आईटी विभाग के अनुसार, नोवेल लवासा के रिटर्न में यह दिखाया गया है कि उन्होंने गुरुग्राम स्थित चार मंजिले इमारत का पहला तल्ला 1.73 करोड़ रुपये में शकुंतला लवासा को बेचा। जबकि रजिस्टर्ड ट्रांसफर डीड में दिखाता है कि नोवेल ने 27 दिसंबर 2018 को वह संपत्ति अपने पति को उपहार में दी और इसी संपत्ति को अशोक लवासा ने अपनी बहन को जनवरी 2019 में उपहार में दे दी।

हरियाणा में यदि कोई व्यक्ति अपने खून के रिश्ते (भाई, बहन, बेटा, बेटी, पोता, पति) को देता है तो इसके ऊपर स्टाम्प ड्यूटी नहीं लता है। आईटी विभाग ने हरियाणा सरकार को बतायाय कि संपत्ति हस्तांतरण के मामले में किसी तरह का स्टाम्प ड्यूटी नहीं दिया गया। साथ ही विभाग ने जांच की मांग की।

हालांकि, हरियाणा के राजस्व विभाग के वित्तीय आयुक्त और गुरुग्राम के उपायुक्त ने पिछले महीने कहा था कि 16 सितंबर, 2019 को सप्लीमेंट्री डीड के माध्यम से स्टाम्प शुल्क के रूप में 10.42 लाख रुपये का भुगतान किया गया था।

सप्लीमेंट्री डीड में कहा गया है कि नोवेल लवासा ने गुरुग्राम की संपत्ति शकुंतला लवासा को 1.73 करोड़ रुपये में बेची। लेकिन यह चीज 27.12.2018 और 21.1.2019 के ट्रांसफर डीड में नहीं दिखाया गया। सप्लीमेंट्री डीड में आगे कहा गया कि इस “त्रुटि और चूक” को सुधारने के लिए और संपत्ति के “सभी विवादों से बचने के लिए 10,42,200 रुपये के स्टांप शुल्क का भुगतान 16 सितंबर, 2019 को किया गया था।

हरियाणा के राजस्व विभाग आयुक्त के कार्यालय से दिसंबर महीने में आईटी विभाग को एक पत्र भेजा गया। पत्र में कहा गया, “शुल्क के रूप में 10,42,200 रुपये के भुगतान के बाद … स्टैंप ड्यूटी की कोई चोरी नहीं है।”

आईटी विभाग ने क्लीन चिट के जवाब में राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या इस तरह के “भूल और सुधार” को कानून के तहत अनुमति दी गई है। हरियाणा सरकार से भी कहा गया है कि वह उक्त सुधार के लिए लवासा परिवार द्वारा प्रस्तुत सहायक दस्तावेजों की एक प्रति उपलब्ध कराए।

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