राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हरिवंश को राज्यसभा के लिए नामित किया है। वह इससे पहले दो बार राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं। दोनों बार जदयू ने उन्हें बिहार से राज्यसभा भेजा था। इस बार जदयू ने नीतीश कुमार को राज्यसभा का सदस्य बनाया है।

हरिवंश ने अपने पिछले कार्यकाल में राज्यसभा के उपसभापति के तौर पर काम किया। उनका यह कार्यकाल नौ अप्रैल को ही खत्म हुआ था। शुक्रवार दस अप्रैल को ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राज्यसभा के लिए नामित कर दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पूर्व CJI रंजन गोगोई के रिटायर होने के बाद खाली हुई सीट पर उन्हें राज्यसभा के सदस्य के तौर पर नॉमिनेट किया गया है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने पिछला कार्यकाल खत्म होने पर की थी प्रशंसा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 मार्च 2026 को राज्यसभा से रिटायर हो रहे उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह की भूरी-भूरी प्रशंसा की थी। पीएम ने उन्हें “मृदुभाषी” और सदन में सबका विश्वास जीतने वाला बताया। उन्होंने कहा था कि हरिवंश ने लंबे समय तक जिम्मेदारी निभाई और संकट के समय शांत व संतुलित तरीके से सदन का संचालन किया। संसद कवर करने एक वरिष्ठ पत्रकार ने बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी को हरिवंश का काम पसंद था।

शुक्रवार को भी पीएम नरेंद्र मोदी ने हरिवशं को राष्ट्रपति द्वारा नॉमिनेट किए जाने के बाद उन्हें शुभकामनाएं दीं। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, “हरिवंश जी ने पत्रकारिता और सार्वजनिक जीवन में अमूल्य योगदान दिया है। वे एक सम्मानित बुद्धिजीवी और विचारक हैं। उन्होंने अपने गहन विचारों और अंतर्दृष्टि से पिछले कुछ वर्षों में सदन की कार्यवाही को समृद्ध किया है। मुझे प्रसन्नता है कि माननीय राष्ट्रपति जी ने उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है। आगामी संसदीय कार्यकाल के लिए उन्हें मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं!”

बीजेपी के करीब जाने का मिला ईनाम?

हरिवंश इससे पहले दो बार जदयू के टिकट पर राज्यसभा के लिए चुने गए थे लेकिन साल 2022 में जब नीतीश कुमार ने बीजेपी को छोड़ राजद को साथ लिया, तब हरिवंश ने नीतीश उपसभापति पद नहीं छोड़ा। तब से ही हरिवंश और जदयू के बीच दूरी बढ़ गई और वे बीजेपी के करीबी हो गए। इसके कुछ समय बाद ही जदयू ने जब अपनी नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया तो उसमें हरिवंश को जगह नहीं दी।

पत्रकार थे हरिवंश, जेपी के गांव से है संबंध

राजनीति में आने से पहले हरिवंश एक पत्रकार थे। साल 2014 में नीतीश कुमार ने उन्हें राज्यसभा भेजने का फैसला किया। तब हरिवंश ने मीडिया से कहा था कि नीतीश कुमार द्वारा बताए जाने से पहले उन्हें खुद इस बात की जानकारी नहीं थी कि वे राज्यसभा के लिए चुने गए हैं। एक हिंदी अखबार के संपादक रहे हरिवंश का बलिया के सीताब दियारा गांव से संबंध हैं। यह जयप्रकाश नारायण का पैतृक गांव भी है। जयप्रकाश के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का भी हरिवंश पर गहरा प्रभाव था।

बीएचयू से की पढ़ाई

हरिवंश ने बीएचयू ने अर्थशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद एक बैंक में कुछ समय नौकरी की। इसके बाद वह पत्रकारिता में आ गए। हरिवंश ने हिंदी और अंग्रेजी भाषा में कुल 24 किताबें लिखी हैं।

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पत्रकार से सांसद (राज्‍यसभा) और राज्‍यसभा के उपसभापति बनने वाले हरिवंंश ने साल 2020 में जनसत्‍ता.कॉम से इंटरव्‍यू में अपने कई अनुभव साझा किए थे। लंबी बातचीत में उन्होंने बताया था कि कैसे दशकों पहले से हमें आज मौजूद खतरों के प्रति आगाह किया जाता रहा और हम अनसुना करते रहे। पढ़िए पूरी खबर