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Uttarakhand crisis: विश्वासमत के पहले हरीश रावत का बढ़ा भरोसा

नैनीताल स्थित हाई कोर्ट ने सरकार के खिलाफ बागी हो गए नौ कांग्रेस विधायकों की राज्य विधानसभा अध्यक्ष के उन्हें सदन की सदस्यता के अयोग्य घोषित करने के संबंध में जारी किए गए ‘कारण बताओ’ नोटिस को चुनौती देने की याचिका खारिज कर दी।

Author देहरादून | March 26, 2016 5:28 AM
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत । (फाइल फोटो)

संकट में खड़ी उत्तराखंड की हरीश रावत सरकार को शुक्रवार को बड़ी राहत मिली। नैनीताल स्थित हाई कोर्ट ने सरकार के खिलाफ बागी हो गए नौ कांग्रेस विधायकों की राज्य विधानसभा अध्यक्ष के उन्हें सदन की सदस्यता के अयोग्य घोषित करने के संबंध में जारी किए गए ‘कारण बताओ’ नोटिस को चुनौती देने की याचिका खारिज कर दी।

न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता वाले हाई कोर्ट के एकल पीठ ने बागी कांग्रेस विधायकों के इस संबंध में दायर की गई याचिका पर सुनवाई के बाद उसे खारिज कर दिया। सुनवाई के बाद प्रदेश की कांग्रेस सरकार की तरफ से पैरवी करने पहुंचे वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने पत्रकारों से कहा कि हाई कोर्ट के इस याचिका को खारिज करने के आधार के बारे में जानकारी निर्णय की प्रति देखने के बाद मिलेगी। यह पूछे जाने पर कि उन्होंने नोटिस के पक्ष में क्या तर्क रखे, सिब्बल ने कहा, ‘अगर विधानसभा अध्यक्ष सदस्यों को कोई नोटिस देते हैं तो उस पर फैसला केवल वही ले सकते हैं। संविधान के अनुच्छेद 226 की सहायता आप इसमें नहीं ले सकते, क्योंकि जब तक अध्यक्ष अपना फैसला नहीं लेते तब तक यह मामला हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र का नहीं है और यह सुप्रीम कोर्ट के कुछ निर्णय हैं, जो अदालत के सामने रखे’।
हाई कोर्ट के इस फैसले को 28 मार्च को राज्य विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने की चुनौती से पहले प्रदेश की हरीश रावत सरकार के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है। आगामी सोमवार को होने वाले शक्तिपरीक्षण की चुनौती से निपटने के लिए कांग्रेस की सारी आशाएं अध्यक्ष कुंजवाल के नौ बागी विधायकों को अयोग्य घोषित करने के कदम पर टिकी हुई हैं जिससे सदन की प्रभावी क्षमता घटकर 61 रह जाए और बहुमत का आंकड़ा भी कम हो कर 31 पर आ जाए।

सत्तर सदस्यीय उत्तराखंड विधानसभा में सत्ताधारी कांग्रेस के नौ विधायकों के बागी होकर भाजपा के साथ खड़े हो जाने के बाद अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के अलावा उसके पास अपने 26 विधायक हैं, जबकि हरीश रावत सरकार में शामिल प्रगतिशील लोकतांत्रिक मोर्चा (पीडीएफ) के छह सदस्यों के समर्थन को मिलाकर उसके पक्ष में कुल 32 विधायक हैं।

दूसरी तरफ भाजपा के पास 28 विधायक हैं जिनमें से उसके घनसाली से विधायक भीमलाल आर्य की वफादारी पर फिलहाल यकीन नहीं किया जा सकता। कमल के निशान पर जीतने के बावजूद, आर्य अपनी पार्टी के विरोध में और रावत सरकार की तारीफ करने में कभी पीछे नहीं रहे जिसके कारण वे भाजपा से निलंबन झेल रहे हैं। भाजपा अब तक अपने पक्ष में अपने 27 और नौ बागी विधायकों सहित कुल 35 विधायकों के समर्थन का दावा कर रही थी। लेकिन हाई कोर्ट के ताजा फैसले के मद्देनजर उसके संख्या बल के खेल में कांग्रेस से पीछे रहने की संभावनाएं बनती नजर आ रही हैं।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि अभी हमें सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलने की पूरी आशा है। सोमवार को रावत सरकार नहीं बचेगी। कांग्रेस के पांच और विधायक हमारे संपर्क में हैं जो जल्दी ही कांग्रेस छोड़ देंगे। वहीं बागी विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष के भेजे गए नोटिस की मियाद शनिवार शाम पांच बजे खत्म हो जाएगी। उसके बाद विधानसभा अध्यक्ष बागी विधायकों की सदस्यता को लेकर अपना फैसला सुनाएंगे।
दूसरी ओर बागी विधायकों की अब बची-खुची उम्मीद सुप्रीम कोर्ट पर टिकी है। यदि सुप्रीम कोर्ट ने भी बागी विधायकों को राहत नहीं दी तो रावत सरकार के बचने की पूरी संभावना दिखाई दे रही है। वहीं भाजपा निर्दलीय विधायकों को तोड़ने के लिए कमर कसे हुए है। कांग्रेस और निर्दलीय विधायक इस वक्त रामनगर में जिम कार्बेट पार्क के क्षेत्र में एक पूर्व कांग्रेसी नेता के रिसोर्ट में हैं। वही भाजपा के विधायक जयपुर में डेरा डाले हुए हैं। वहीं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने इस राजनीतिक संकट का हल निकालने की पेशकश की है। तिवारी ने अपने बयान में कहा कि इस राजनीतिक संकट के लिए राज्य के किसी भी पार्टी के नेता से बात करने को तैयार हैं।

सुप्रीम कोर्ट जाएगा बागी खेमा
अदालती फैसले के बाद मुख्यमंत्री खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई वहीं भाजपा और बागी कांग्रेसी विधायकों के खेमे में मातम छा गया। बागी विधायकों के नेता हरक सिंह रावत ने कहा कि अब वे नैनीताल हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। हरक सिंह रावत ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर 18 मार्च को विधानसभा की कायर्वाही की वीडियो फुटेज मांगी है। इस फुटेज को हरक सिंह रावत व उनके साथी बागी विधायक सुप्रीम कोर्ट में सबूत के रूप में पेश करेंगे।
बहुमत साबित करेगी मेरी सरकार
हाई कोर्ट के फैसले ने यह साबित कर दिया है कि विधानसभा अध्यक्ष की बागी विधायकों को नोटिस भेजने की कार्रवाई बिल्कुल सही थी। सोमवार को विधानसभा में आखिर सत्य की ही जीत होगी और मेरी सरकार बहुमत साबित करके रहेगी।
-हरीश रावत, मुख्यमंत्री

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