सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देश में पहली बार इच्छा मृत्यु (Passive Euthanasia) की मंजूरी दी। अदालत ने लगभग 12 साल से कोमा में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे गाजियाबाद के हरीश राणा मामले में यह फैसला सुनाया है। कोर्ट के फैसले के बाद 32 वर्षीय हरीश के पिता ने कहा कि कोई भी माता-पिता अपने बेटे को ऐसी हालत में नहीं देखना चाहेंगे।
गाजियाबाद में अपने घर के बाहर पत्रकारों से बातचीत में हरीश राणा के पिता अशोक राणा ने फैसले के भावनात्मक दर्द को स्वीकार करते हुए न्यायालय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनका परिवार लगभग तीन साल से कानूनी लड़ाई लड़ रहा था। अशोक राणा ने याचिका सुनने और मानवीय आदेश देने के लिए उच्चतम न्यायालय को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इस फैसले से परिवार को कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं होगा लेकिन इसे भारी मन से स्वीकार किया गया है।
एक पिता के रूप में यह बेहद दर्दनाक- अशोक राणा
अशोक ने मीडियाकर्मियों से कहा, “एक पिता के रूप में, यह बेहद दर्दनाक है। कोई भी माता-पिता अपने बेटे को ऐसी हालत में नहीं देखना चाहेंगे।” उन्होंने कहा कि परिवार को उम्मीद है कि इस फैसले से ऐसी ही परिस्थितियों का सामना करने वाले अन्य लोगों को मदद मिलेगी। हरीश के पिता ने कहा, “हमारा मानना है कि व्यापक जनहित में इस फैसले से कई लोगों के परिवारों को मदद मिल सकती है जो हरीश जैसी स्थिति में हो सकते हैं।”
परिवार बोला- उनके बेटे की स्थिति लाइलाज
परिवार ने कहा कि उन्होंने यह महसूस करने के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया कि उनके बेटे की स्थिति लाइलाज और अपरिवर्तनीय है। उन्होंने केवल लाइफ सपोर्ट ट्रीटमेंट को वापस लेने के दिशानिर्देशों को लागू करने का अनुरोध किया। परिवार ने फैसले को बेहद कठिन बताया और कहा कि यह हरीश के हित में लिया गया है और उम्मीद जताई कि इस फैसले से समान परिस्थितियों का सामना करने वाले अन्य परिवारों को मदद मिलेगी।
वहीं, उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद गाजियाबाद की ‘ब्रह्म राज एम्पायर सोसायटी’ के बाहर भीड़ जमा हो गई, जिनमें मुख्य रूप से पत्रकार और टीवी कैमरामैन शामिल थे। इसी सोसायटी में हरीश का परिवार रहता है। इस आवासीय परिसर में सुरक्षाकर्मियों ने सुरक्षा कड़ी कर दी और बाहरी लोगों को परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया।
क्रिकेट मैदानों में सैंडविच बेचते हैं हरीश के पिता
स्थानीय निवासियों ने बेटे के इलाज के लिए परिवार के हर संभव प्रयास की पुष्टि की। अधिकारियों ने बताया कि परिवार मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले का रहने वाला है। हरीश राणा के पिता अशोक राणा ने 1989 से फरवरी 2021 में अपनी सेवानिवृत्ति तक नयी दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक निजी होटल के खानपान विभाग में काम किया और वर्तमान में वह अपनी पेंशन और घर पर तैयार खाद्य सामग्री को बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं।
कुछ स्थानीय लोगों ने संवाददाताओं को बताया कि अशोक राणा और उनकी पत्नी निर्मला राणा ने अपने बेटे के इलाज का खर्च उठाने के लिए दिल्ली में अपना घर बेच दिया था। उन्होंने बताया कि पूर्व में एक आतिथ्य संस्था में काम करने वाले अशोक राणा को हर महीने लगभग 3,600 रुपये पेंशन मिलती है। सोसायटी के एक अन्य निवासी ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि अशोक राणा अपनी रोजी-रोटी चलाने के लिए सुबह के समय पास के क्रिकेट मैदानों में सैंडविच बेचते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार दी ‘इच्छा मृत्यु’ की अनुमति
उच्चतम न्यायालय ने 12 साल से ज्यादा समय से कोमा में वेंटिलेटर के सहारे सांस ले रहे हरीश राणा को वेंटिलेटर से हटाकर ‘इच्छा मृत्यु’ की अनुमति दे दी। हरीश राणा 20 अगस्त 2013 में एक इमारत की चौथी मंजिल से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को AIIMS को निर्देश दिया कि वह प्रक्रिया में गरिमा सुनिश्चित करते हुए उपचार वापस लेने के लिए एक योजना तैयार करे। दिल्ली स्थित एम्स के अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि न्यायालय के आदेश को लागू करने के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
(इनपुट- पीटीआई)
